राजस्थान के किसान बीजेपी के खिलाफ करेंगे वोट?

09 दिसंबर 2018
कारवां/ तुषार धारा
कारवां/ तुषार धारा

“आप लोगों को यहां लहसुन का क्या भाव मिलता है?” राहुल गांधी ने 24 अक्टूबर को राजस्थान के झालावाड़ जिले में एक जन सभा में उपस्थित लोगों से सवाल किया. जनता के शोर के बीच दो उंगलियों को हवा में दिखाते हुए गांधी ने कहा, “दो रुपया”. फिर गांधी ने कहा, "किसानों को पानी नहीं मिलता, बिजली नहीं मिलती और फसल की सही कीमत नहीं मिलती. उन्हें बीमा का पैसा देना पड़ता है. वे अपना पैसा वसूल नहीं कर पाते." कांग्रेस अध्यक्ष की बातें कृषि संकट का सामना कर रहे राज्य के लहसुन किसानों के लिए एकदम सच है. यहां का किसान पिछले साल से उपज की बाजार कीमत में गिरावट को झेल रहा है. राजस्थान के बूंदी जिले के चंदाना गांव के किसान बाबू लाल ने मुझे बताया, “लहसुन का जो पैसा मुझे मिल रहा है वह बीज, बुवाई, मजदूरी और अन्य खर्चों के लिए भी पर्याप्त नहीं है.

अक्टूबर और नवंबर में मैंने राजस्थान के दो कृषि क्षेत्रों की यात्रा की. दक्षिण पूर्व में कोटा के हड़ौती क्षेत्र और उत्तर के बीकानेर संभाग के चुरू और हनुमानगढ़ जिलों की यात्रा की. इन सभी जिलों में मैंने पाया कि कृषि संकट ने न सिर्फ लहसुन की कीमत को गिराया है बल्कि संकट का असर दूसरी फसलों पर भी पड़ा है. मैंने पाया कि राज्य की नीति कृषि को मदद करने के लिए पर्याप्त नहीं है और सरकार ने अपने चुनावी वादे पूरे नहीं किए हैं. राज्य में 7 दिसंबर को विधानसभा चुनाव होने हैं और भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के चुनाव प्रचार में इन मुद्दों का बहुत महत्व है.

कोटा के बाहरी इलाके में स्थित उपज मंडी में हजारों बोरे लहसुन के रखे हुए थे और किसान ट्रकों से बोरे निकाल के बाहर रख रहे थे. लहसुन राजस्थानी खाने का महत्वपूर्ण हिस्सा है. बाबू लाल लहसुन के 40 बोरे लेकर मंडी पहुंचे हैं जिसे उन्होंने ने दो बीघा जमीन पर बोया था. प्रत्येक बोरे में 50 किलो फसल है. यदि बाबू लाल अपने लहसुन को 10 रुपए प्रति किलो की दर से बेच पाते हैं तो उनको अपनी लागत मिल जाएगी लेकिन वो बताते हैं कि उन्हें 5 रुपए प्रति किलो से अधिक मिलने की आशा नहीं है. उन्होंने बताया कि उन्होंने फसल उगाने में 20 हजार रुपए खर्च किए हैं.

सबसे कम स्तर के लहसुन की कीमत 5 रुपए प्रति किलो होती है और सबसे अच्छी गुणवत्ता वाला मुट्ठी के आकार और महक वाला लहसुन 30 रुपए प्रति किलो में बिकता है. छोटे किसानों को आमतौर पर 10000 रुपए मिलते हैं जिसमें से उन्हें ढुलाई और मजदूरी का भुगतान करना पड़ता है क्योंकि बहुत कम किसान के लिए ज्यादा पानी की खपत वाले उच्च गुणवत्ता लहसुन का उत्पादन करना मुमकिन है. कोटा मंडी में कृषि कंपनी मारूति ट्रेडिंग कंपनी में काम करने वाले नरेश अग्रवाल ने बताया, “रोजाना आने वाले लगभग 7 हजार बोरों में केवल 50 से 100 बोरे ही 30 रुपए प्रति किलो हासिल कर पाते हैं. “बाकि का 7 से 15 रुपए प्रति किलो की औसत दर से बिकता है.”

राज्य के कृषि विभाग के 2017-18 के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार हड़ौती में राज्य का 82 प्रतिशत लहसुन उत्पादन हुआ था जो 755350 टन था. हड़ौती में चार जिले आते हैं कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़. इन जिलों से 200 सदस्यीय राज्य विधानसभा के 17 विधायक आते हैं. हड़ौती को बीजेपी का गढ़ माना जाता है. 2013 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने यहां की 16 सीटें जीती थीं. यहीं मुख्यमंत्री राजे सिंधिया झालावाड़ की झालरापाटन विधानसभा सीट लगातार तीन बार जीती है.

तुषार धारा कारवां में रिपोर्टिंग फेलो हैं. तुषार ने ब्लूमबर्ग न्यूज, इंडियन एक्सप्रेस और फर्स्टपोस्ट के साथ काम किया है और राजस्थान में मजदूर किसान शक्ति संगठन के साथ रहे हैं.

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