शिक्षा / रिपोर्ताज
उच्च शिक्षा के निजीकरण की शुरुआत 1990 के दशक में हो गई थी. 1994 में, भारत ने एक समझौते पर साइन किया जिससे वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइज़ेशन और जनरल एग्रीमेंट ऑन ट्रेड इन सर्विसेज़ बने. इस समझौते ने उच्च शिक्षा को एक ऐसी सेवा माना जिसका व्यापार किया जा सकता है और जिसमें निजी क्षेत्र मुनाफ़ा कमा सकता है.