अपनी स्थापना के एक साल के अंदर ही दलित पैंथर्स ने आरएसएस को महाराष्ट्र में ब्राह्मणवादी दमन का मुख्य प्रतीक बना दिया था. इसके सदस्यों ने भगवद गीता जलाई, जिसके बारे में आंबेडकर ने कहा था कि यह चातुर्वर्ण्य का बचाव करती है.