कोरोना लॉकडाउन ने तोड़ी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दूध उत्पादक किसानों की कमर

03 अप्रैल 2020
लॉकडाउन के चलते गांवों में दूध के दाम गिर गए लेकिन चारा महंगा हुआ है.
अजीत सोलंकी/एपी फोटो
लॉकडाउन के चलते गांवों में दूध के दाम गिर गए लेकिन चारा महंगा हुआ है.
अजीत सोलंकी/एपी फोटो

देश में दूध का सबसे ज्यादा उत्पादन करने वाला राज्य उत्तर प्रदेश है. देश के लाखों लोग दूध व्यवसाय से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं लेकिन जब से 21 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा हुई है तब से प्रदेश के गांवों में दूध व्यवसाय चरमरा गया है. दूध बेचकर गुजारा करने वाले लोगों को ग्राहक नहीं मिल रहे हैं और लोग 15 रुपए से 20 रुपए लीटर दूध बेचने को मजबूर हैं. लॉकडाउन से पहले दूध 40 से 50 रुपए लीटर बिक रहा था.

यहां के लोगों को लॉकडाउन के साथ-साथ बेमौसम बारिश की मार भी झेलनी पड़ रही है. गांवों में यह वक्त गेहूं कटाई का है मगर इस बार बारिश अधिक होने की वजह से गेहूं की कटाई समय से नहीं हो पा रही है. आमतौर पर इस वक्त तक लोगों के पास जनवरों को खिलाने वाला भूसा खत्म हो जाता है या बहुत कम बचता है और गेहूं कि कटाई से नया भूसा बाजार में आ जाता है लेकिन इस बार चारे की समस्या खड़ी हो गई है. भूसे का दाम आसमान छू रहा है और सौ किलो भूसे की कीमत 500 से 1000 रुपए तक बढ़ गई है.

लॉकडाउन का असर इन किसानों पर कैसे पड़ रहा है यह जानने के लिए मैंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बागपत और शामली जिलों के किसानों और खेत मजदूरों से बात की.

बागपत जिले के धनौरा सिल्वर नगर गांव के अनुज कश्यप ने 2014-15 में गांव का सर्वे किया था. उस सर्वे के आधार पर उन्होंने मुझे बताया कि उनके गांव में करीब 1800 परिवार रहते हैं और गांव के अधिकतर लोग दूध बेचने के काम से जुड़े हैं. उनके गांव में दूध की 8 डेरियां हैं और दस दूध की भट्टी हैं. ये भट्टियां भी गांववालों से दूध खरीदती हैं. अनुज ने बताया कि फिलहाल दूध का बड़ा बुरा हाल है क्योंकि कोई दूध नहीं खरीद रहा. उन्होंने बताया कि गांव के करीब 1000 लोग मजदूरी करके जीवनयापन करते हैं क्योंकि उनके पास खुद की खेती नहीं है. इन लोगों के घरों में औरतें भैंसे पालती हैं.

धनौरा सिल्वर नगर गांव में दूध भट्टी के मालिक अरशद से मैंने फोन पर बात की और पूछा कि भट्टियों ने दूध खरीदना क्यों कम कर दिया है. अरशद खोवा बनाते हैं और दिल्ली सप्लाई करते हैं. अरशद ने बताया कि लॉकडाउन से पहले उनके यहां से रोजाना 200 लीटर दूध की खपत होती थी जिसे वह 40 रुपए से 50 रुपए प्रति लीटर की दर से गांववालों से खरीदते थे लेकिन “जब से लॉकडाउन हुआ है तब से हमारा माल बाहर नहीं जा रहा है.” उन्होंने मुझे बताया, “अब बस हम 60 लीटर दूध खरीद रहे हैं जिसकी कीमत अब 30 रुपए प्रति लीटर दे रहे हैं. इसमें हमारा और मजदूरों, दोनों का बड़ा नुकसान हो रहा है.”

सुनील कश्यप कारवां में डाइवर्सिटी रिपोर्टिंग फेलो हैं.

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