गोरखपुर विश्वविद्यालय में दलित छात्रा की मौत के बाद परिसर में जातिवादी उत्पीड़न का मामला गरमाया, परिजनों ने उठाई जांच की मांग

प्रियंका कुमारी का शव 31 जुलाई को गोरखपुर विश्वविद्यालय के गृह विज्ञान विभाग के स्टोर रूम में फांसी के फेंदे से लटकता हुआ मिला था.
सौजन्य : राजेश कुमार आर्य
प्रियंका कुमारी का शव 31 जुलाई को गोरखपुर विश्वविद्यालय के गृह विज्ञान विभाग के स्टोर रूम में फांसी के फेंदे से लटकता हुआ मिला था.
सौजन्य : राजेश कुमार आर्य

गोरखपुर के दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की एक दलित छात्रा प्रियंका कुमारी की मौत पर रहस्य का पर्दा अभी तक बरकरार है. परिजन इसे हत्या बता रहे हैं, वहीं प्रशासन इसे आत्महत्या बताने में जुटा हुआ है. हालांकि छात्रा के पिता की शिकायत पर पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया है. इसमें विश्वविद्यालय के गृह विज्ञान विभाग की प्रमुख और उनके सहयोगियों को आरोपी बनाया गया है.

21 साल की प्रियंका कुमारी गोरखपुर के शिवपुर सहबाजगंज की एक दलित बस्ती की निवासी थी. वह 31 जुलाई को गोरखपुर विश्वविद्यालय में मृत पाई गई थी. उसका शव गृह विज्ञान विभाग के स्टोर रूम में फांसी के फंदे से लटकता हुआ मिला था. शव एक दुपट्टे के सहारे लटका हुआ था. बीएससी (गृह विज्ञान) के तीसरे साल की छात्रा प्रियंका परीक्षा देने विश्वविद्यालय गई थी.

प्रियंका के पिता विनोद कुमार की शिकायत पर गोरखपुर की कैंट थाना पुलिस ने विश्वविद्यालय के गृह विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष और उनके सहयोगियों पर हत्या का मामला दर्ज किया है लेकिन इसमें एससी-एसटी एक्ट की धाराएं नहीं लगाई गई हैं.

विनोद कुमार और उनका परिवार शिवपुर सहबाजगंज में दो कमरे के एक मकान में रहता है. सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करने वाले विनोद कुमार तीन लड़कियों और एक लड़के के पिता हैं. प्रियंका लड़कियों में सबसे छोटी थी. उसकी सबसे बड़ी बहन संगीता की शादी हो चुकी है. उनसे छोटी अनीता ने 12वीं तक की पढ़ाई की है. एएनएम का कोर्स करने के बाद वह अपने घर के पास स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में नौकरी करती है. वहीं प्रियंका का भाई मनीष कुमार आईटीआई का छात्र है. प्रियंका ने अपनी इंटर तक की पढ़ाई शहर के बौलिया रेलवे कॉलोनी स्थित राष्ट्रीय इंटर कॉलेज से की थी.

परिजनों का कहना है कि प्रियंका पढ़ने में तेज थी. उसने हाई स्कूल और इंटर की परीक्षा प्रथम श्रेणी में पास की थी. परिजनों के मुताबिक विश्वविद्यालय में 'रक्ताल्पता एवं कुपोषण से बचाव के लिए कम मूल्य, उच्च गुणवत्ता युक्त आहार का निर्माण' विषय पर एक प्रतियोगिता हुई थी. इसमें प्रियंका के बनाए 'गेहूं और मक्के के आटे की बर्फी' को पहला पुरस्कार मिला था. परिजन इस प्रतियोगिता पर अखबार में आई एक खबर की कटिंग भी दिखाते हैं. इसके मुताबिक प्रतियोगिता 28 जुलाई को आयोजित की गई थी यानी की प्रियंका का शव मिलने के तीन दिन पहले. परिजनों का कहना है कि इस इनाम से प्रियंका काफी खुश थी.

राजेश कुमार आर्य पत्रकार हैं और जनसत्ता, अमर उजाला, बीबीसी और एशियाविल के लिए काम किया है.

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