2 अप्रैल को दलितों पर गोली चलाने वाले चौहान का दावा, केन्द्रीय मंत्री तोमर ने बचाया गिरफ्तारी से

01 दिसंबर 2018
2 अप्रैल को देशभर में हुए दलितों के प्रदर्शन के वीडियो में राजा चौहान को प्रदर्शनकारियों पर अपनी पिस्तौल से गोली चलाते साफ देखा जा सकता है. चौहान ने अंधाधुंध गोली चलाने की बात मानी और कहा कि उसे अपने किए पर गर्व है.
साभार राजा सिंह चौहान
2 अप्रैल को देशभर में हुए दलितों के प्रदर्शन के वीडियो में राजा चौहान को प्रदर्शनकारियों पर अपनी पिस्तौल से गोली चलाते साफ देखा जा सकता है. चौहान ने अंधाधुंध गोली चलाने की बात मानी और कहा कि उसे अपने किए पर गर्व है.
साभार राजा सिंह चौहान

अपने नौकरों की तुलना में पांच फीट और चंद सेंटीमीटर के राजा सिंह चौहान छोटी कद काठी के है. वह हमेशा तीन चार लोगों से घिरे रहते हैं. चौहान ग्वालियर में सरकारी पैसों से एक कौशल विकास केन्द्र चलाते हैं. आज वह भगवा कुर्ते पैजामे में इस केन्द्र के बाहर घास पर रखी एक मेज पर बैठे हैं. मैंने उनसे कोई डेढ़ घंटा बातचीत की और इस दौरान लोग लगातार मिलने आते रहे. मिलने वाले सभी स्थानीय मर्द थे. कुछ लोग उनसे राम राम करने आए थे और कुछ लोग सलाह मशवरे के लिए. एक आदमी उन्हें अपने जन्मदिन की पार्टी में बुलाने आया था. हर मुलाकात से पहले चौहान का निजी सचिव आने वाले की जाति का उल्लेख कर पहचान करा रहा था. वह कहता था, “ये शर्मा जी हैं”, पंडित”, “ये अपने तोमर का लड़का है”. हर आगंतुक पहले झुक कर चौहान के पैर छूता और फिर बोलने या बैठने के लिए चौहान की आज्ञा की प्रतीक्षा करता.

राजा राजपूत जात के रसूखदार चौहान समुदाय के हैं. फिलहाल वह किसी हीरो से कम नहीं हैं. 2 अप्रैल के भारत बंद के समय राजा चौहान राष्ट्रीय समाचारपत्रों की सुर्खियों में थे. उस दिन देश भर में दलितों ने सर्वोच्च अदालत के मार्च महीने में दिए फैसले के खिलाफ आंदोलन किया था. सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार रोकथाम अधिनियम को कमजोर करने वाले अपने फैसला में इस कानून के तत्काल गिरफ्तारी वाले प्रावधान को हटा दिया था. इसके बाद बिना किसी राजनीतिक दल की अगुवाई में देश भर के दलितों ने व्यापक प्रदर्शन किया. बहुत सी जगहों पर प्रदर्शनकारी दलित पुलिस भिड़ गए और अन्य कई जगह सवर्णों के विरोध प्रदर्शनों से उनका आमना-सामना हुआ. सवर्णों की भीड़ ने आंदोलनकारियों पर पथराव किया, उन पर लाठियों से हमला किया और गोलियां चलाई. देश भर में पुलिस और सवर्णों की गोलीबारी में कम से कम 9 दलितों की मौत हो गई. उनमें से तीन मौतें अकेले ग्वालियर में हुईं और चार की मौत मध्य प्रदेश के ही भिंड में हुई.

ग्वालियर के गोली चलाने वाला वीडियो देश भर में हेडलाइन बना. वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि दो लोग प्रदर्शनकारियों पर सीधा निशाना लगा रहे हैं. एक वीडियो में राजा को भी देखा जा सकता है. बाद में पता चला कि यह वीडियो ग्वालियर के थाटीपुर इलाके का है जिसमें राजा प्रदर्शकारियों पर गोली चलाते दिखाई दे रहे हैं. उजली सफेद कमीज पहने राजा एक ऊंचे स्थान से प्रदशर्नकारियों पर गोली चलाते हैं और फिर पूरे विश्वास के साथ पिस्तौल को ठीक करते हुए प्रदर्शनकारियों की ओर बढ़ते हैं. उनके पीछे लोगों का झुंड “जय श्री राम” का नारा लगाता हुआ चल पड़ता है.

उस दिन की गोलीबारी में दीपक जाटव और राकेश टमोटिया नाम के दो दलित मारे गए. जाटव को उनके घर गल्ला कोठार में और टमोटिया को भीम नगर कॉलोनी के बाहर लेबर अड्डे में गोली मारी गई. ये दोनों जगहें थाटीपुर में हैं जहां ज्यादातर जाटवों सहित अन्य दलितों की बसावट है. दोनों मृतकों को छाती के पास गोली लगी थी. दोनों एक दूसरे से सिर्फ 500 मीटर की दूरी में मारे गए थे. दोनों ही मामलों में एफआईआर दर्ज है.

महेन्द्र सिंह चौहान को जाटव और टमोटिया की हत्या के लिए गिरफ्तार किया गया. वह तीन महीने तक जेल में रहा और दो महीने पहले जमानत पर रिहा हुआ है. इन हत्याओं के लिए राजपूत जाति के ऋषभ भदोरिया और ओबीसी जाति के ऋषि गुर्जर को भी महेन्द्र के साथ ही गिरफ्तार किया गया था. दोनों अभी जमानत पर बाहर हैं.

सागर कारवां के स्‍टाफ राइटर हैं.

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