एनडीए में वापसी असंभव : सी. के. जानू

साभार: सी. के. जानू
साभार: सी. के. जानू

19 फरवरी को केरल में आदिवासी अधिकार आंदोलन के इतिहास की सबसे हिंसक घटना की सालगिरह मनाई जाती है. अगस्त 2011 में केरल के वयनाड जिले में आदिवासी समुदाय ने विरोध प्रदर्शन किया. राज्य सचिवालय के सामने किए जा रहे इस प्रदर्शन में खेती योग्य भूमि की मांग की जा रही थी. प्रदर्शन बिना रुके 48 दिनों तक चला. तब राज्य के सीएम एके एंटनी थे जो आदिवासियों को जमीन देने पर राजी हो गए. लेकिन यह रजामंदी एक साल भी लागू नहीं रही और इसकी वजह से आदिवासियों ने दोबारा प्रदर्शन शुरू कर दिया. जनवरी 2003 में आदिवासी समुदाय ने वयनाड के मुथंगा के जंगलों में झोपड़ियां बना लीं, जो उनके विरोध प्रदर्शन का हिस्सा था. झोपड़ियां जगंल में उनका घर होने के अधिकार का प्रतीक थीं. प्रदर्शकारियों को आदिवासी गोत्र महासभा यानी एजीएमएस ने इकट्ठा किया था. ये समूह आदवासियों के जमीन अधिकार की लड़ाई लड़ता है. इसका नेतृत्व सी. के. जानू कर रही थीं. वे केरल के सबसे प्रमुख आदिवासी नेताओं में से एक हैं.

उस साल फरवरी में प्रदर्शनकारियों से इलाके को खाली करवाए जाने के प्रयास के तहत झोपड़ियों में आग लगा दी गई. प्रदर्शनकारियों ने जंगल अधिकारियों पर लूट का आरोप लगाकर उन्हें बंदी बना लिया. इसके बाद असंख्य अदिवासियों की गिरफ्तारी के साथ-साथ उनके खिलाफ जमकर हिंसा हुई. अति तो तब हो गई जब 19 फरवरी को पुलिस ने प्रदर्शन की मुख्य जगह पर गोली चला दी. इसमें एक प्रदर्शनकारी और एक पुलिस वाले की मौत हो गई. जानू और उनकी साथी गीतानंदन एजीएमएस में समन्वयक थे. उन्हें प्रदर्शन के दो दिन बाद गिरफ्तार कर लिया गया और बाद में जमानत पर छोड़ा गया. उस दौरान प्रदर्शन में शामिल जिन आदिवासियों के खिलाफ केस दर्ज हुआ था, वे आज तक उस केस को लड़ रहे हैं.

इसे “मुथंगा संघर्ष " के नाम से जाना गया. आदिवासियों को जमीन का अधिकार दिलाने के लिए कई आंदोलनों की श्रृंख्ला में से एक, मुथंगा संघर्ष, का नेतृत्व जानू ने किया है. 2016 में जानू के एनडीए से जुड़ने की अफवाह थी. फिर जानू ने घोषणा की कि वे जनाधिपत्य राष्ट्रीय सभा यानी जेआरएस नाम की एक नई राजनीतिक पार्टी बनाएंगी. इसके तुरंत बाद एजीएमएस के अपने साथियों के हल्के विरोध के बावजूद उन्होंने गीतानंदन के साथ भारतीय जनता पार्टी नीत एनडीए का दामन थाम लिया. अक्टूबर 2018 में उन्होंने कोझीकोड में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई. इसमें उन्होंने ऐलान किया कि उनकी पार्टी, जेआरएस, गठबंधन से अलग हो रही है क्योंकि उनकी पार्टी से किया गया वादा पूरा नहीं किया गया.

कारवां की रिपोर्टिंग फेलो आतिरा कोनिक्करा ने जानू से बातचीत की. जानू ने एनडीए से जुड़ने के कारण, उसे छोड़ने का उनका फैसला और आदिवासी समुदाय के उत्थान के लिए राजनीतिक तकत की अहमियत पर पूछे गए सवालों का जवाब दिया. उन्होंने कहा, “अगर आप भारत का इतिहास देखेंगे तो पाएंगे कि जिन समुदायों के पास राजनीतिक ताकत थी उन्होंने बदलाव हासिल किया है. ऐसे में जब आप इस सिस्टम का अध्ययन करते हैं तो पता चलता है कि सिर्फ राजनीति में घुस कर ही सफलता मिल सकती है.”

आतिरा कोनिक्करा : जब आप एनडीए का हिस्सा बनीं तो आपसे और आपकी पार्टी से क्या वादे किए गए थे?

आतिरा कोनिक्करा करवां की रिपोर्टिंग फेलो हैं.

Keywords: Adivasi community Kerala movement Muthanga struggle AK Antony
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