कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र के खिलाफ महिलाओं का मोर्चा

02 जुलाई 2019
55 वर्षीय एंथनी जेवियर अमल गांव में चल रहे विरोध प्रदर्शन की अगुवा हैं. उनके लिए विरोध प्रदर्शन अपनी पहचान को बचाए रखने का मामला है.
अमृतराज स्टीफन/पेप कलेक्टिव
55 वर्षीय एंथनी जेवियर अमल गांव में चल रहे विरोध प्रदर्शन की अगुवा हैं. उनके लिए विरोध प्रदर्शन अपनी पहचान को बचाए रखने का मामला है.
अमृतराज स्टीफन/पेप कलेक्टिव

10 सितंबर 2012 को तमिलनाडु के चार गांवों के हजारों लोग तिरूनेलवेली जिले के इदिन्थाकरै गांव से लगे तटों पर कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र (केएनपीपी) का विरोध करने एकत्रित हुए. यह संयंत्र इस गांव से मात्र दो किलोमीटर दूर बना है. उस दिन संयंत्र में यूरेनियम ईंधन (फ्यूल) भरा जा रहा था जो परमाणु संयंत्र के आरंभ होने से पहले किया जाता है.

इस प्रदर्शन में भाग लेने वालों में अधिकांश महिलाएं थी. जैसे ही इन लोगों ने संयंत्र की तरफ कूच किया, राज्य सरकार ने लोगों को रोकने के लिए पहले आंसू गैस का इस्तेमाल किया और बाद में भीड़ पर गोलीबारी की. प्रदर्शनकारी पुलिस से बचने के लिए समुद्र की ओर भागे, इस घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई और 66 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया. गिरफ्तार लोगों में से बहुतों पर राजद्रोह का आरोप लगा दिया गया.

केएनपीपी देश का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा संयंत्र है. सबसे पहले 1979 में इस संयंत्र का प्रस्ताव किया गया था और उसी वक्त से स्थानीय जनता और मछुआरा समुदाय इसका विरोध कर रहे हैं. इस संयंत्र का निर्माण कार्य 2001 में शुरू हुआ और इसमें 2013 से काम आरम्भ हो गया. प्रदर्शनकारियों का दावा है कि संयंत्र से निकलने वाले प्रदूषित रसायन को समुद्र में छोड़ा दिया जाता है और इस विषाक्त तत्व से मछलियों की गुणवत्ता पर असर पड़ता है. इन्हें डर है कि संयंत्र के चलते उनके और आने वाली पीढ़ियों की जीविका के संसाधन नष्ट हो जाएंगे. मछुआरों का कहना है कि जब से यहां संयंत्र चालू हुआ है मछलियों की संख्या और प्रजातियां कम होती जा रही हैं.

2011 में संयंत्र के खिलाफ प्रदर्शन तीव्र हो गया. उस साल जापान में सुनामी के कारण फुकुशिमा दाईची परमाणु संयंत्र नष्ट हो गया था. इस संयंत्र के छह रिएक्टरों में से तीन फट गए थे. उस हादसे में 1600 लोगों की मृत्यु हो गई थी. इदिन्थाकरै के निवासियों को इसी हश्र का डर है क्योंकि 2004 में यहां भी सुनामी आई थी.

“मैं 80 दिनों तक त्रिची जेल में थी. मेरे खिलाफ राजद्रोह और राज्य के खिलाफ युद्ध का आरोप लगाया गया. कपड़े उतार कर हमारी तलाशी ली गई जैसे हम लोग हत्यारे या लुटेरे हैं.”
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