हिंदू भीड़ और पुलिस ने बोला “जय श्रीराम” और टूट पड़े मुसलमानों पर

28 फ़रवरी 2020
शिवम खन्ना
शिवम खन्ना

24 फरवरी को शाम करीब 6 बजे उत्तर-पूर्वी दिल्ली के हिंदू बहुल इलाके यमुना विहार में फहान इंटरनेशनल स्कूल के पास खड़े दिल्ली पुलिस के 10 कांस्टेबल वजीराबाद रोड पर खड़ी मुस्लिम प्रदर्शनकारियों की भीड़ को दौड़ा रहे थे. वहां रहनेवालों ने बताया कि उस दिन सुबह 11 बजे के बाद से इस सड़क पर नागरिकता (संशोधन) कानून का विरोध करने वाले एक मुस्लिम समूह और पुलिस कर्मियों के साथ खड़ी हिंदू भीड़ के बीच हिंसक झड़पें हो रही थीं. हिंदू दंगाइयों में किशोर, युवा और तोंदल गुंडे थे, जिनके हाथों में लोहे की छड़ें, लकड़ी के फट्टे और ईंटें थीं. कम से कम आधे घंटे के पथराव के बाद, कांस्टेबलों और हिंदू भीड़ ने "जय श्री राम" का नारा लगाते हुए मुस्लिम प्रदर्शनकारियों पर एकसाथ हमला कर दिया.

वजीराबाद रोड के एक तरफ यमुना विहार और दूसरी तरफ चांद बाग का मुस्लिम इलाका है, जहां एक महीने से सीएए विरोधी प्रदर्शन चल रहा है. 23 फरवरी को भारतीय जनता पार्टी के नेता कपिल मिश्रा ने इलाके में भाषण दिया था और दिल्ली पुलिस को चांद बाग रोड पर जारी विरोध प्रदर्शन को खत्म करने के लिए तीन दिन का अल्टीमेटम दिया था. मिश्रा ने धमकी दी थी कि अगर पुलिस ऐसा करने में विफल रही तो सीएए समर्थक खुद मामला सुलटा लेंगे. अगली शाम इलाके में हिंसा भड़क उठी. पास के एक पेट्रोल पंप और कई वाहनों को आग लगा दी गई. वजीराबाद रोड पर धुंए के गुबार के बीच पत्थरों की बौछार होने लगी.

भीड़ को इस तरह दौड़ाने से पहले तक फहान इंटरनेशनल स्कूल के पास तैनात पुलिसवाले बचाव की मुद्रा में थे. दोनों तरफ से बराबर पथराव हो रहा था. पथराव का एक पैटर्न था : एक तरफ के लोग पथराव करते और दूसरी ओर के लोग जवाब में पत्थरबाजी करने लगते. मैं हिंदुओं और पुलिस के पीछे से रिपोर्टिंग कर रहा था. ये लोग पत्थर मार रहे थे और गालियां बक रहे थे. भीड़ ने गत्तों के बक्सों और दूध के पैकेट रखने वाले ढिब्बों को ढाल बना लिया था. हर 10 मिनट के अंतराल में पुलिस और हिंदू भीड़ मुसलमानों की ओर कूच करती और वहां से जवाबी रोढ़ेबाजी के बाद पीछे आ जाती. उस शाम कई बार मैंने गोली चलने की आवाजें सुनी लेकिन बताना मुश्किल था कि गोलियां कहां से चली हैं. वहां मेरी मुलाकात एक पत्रकार से हुई जिसने मुझे बंदूक चलाते एक आदमी की फोटो दिखाई, जो यमुना विहार की ओर से चांद बाग की तरफ गोली चला रहा था.

तकरीबन 5.30 बजे मैंने फहान इंटरनेशनल स्कूल के बाहर तैनात हैड कांस्टेबल से बात की. नाम न छापने की शर्त पर उसने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मौके से गायब रहने की शिकायत की. उसने कहा, “हम यहां सुबह से खड़े हैं और अब तक कोई मदद नहीं आई है. इन बहनचोदों ने सब कुछ जला कर खाक कर दिया है. इन लोगों ने पेट्रोल पंप, पास का एक अस्पताल, एम्बुलैंस, कार और बाइकें जला दीं.” यह साफ नहीं था कि आग हिंदुओं ने लगाई थी कि मुसलमानों ने. “दंगा रोधी बल का कोई अतापता नहीं और हमें अब तक नहीं बताया गया कि अतिरिक्त तैनाती की जाएगी या नहीं.”

मैं जहां था वहां से यह नहीं देख पा रहा था कि मुस्लिम प्रदर्शनकारियों की संख्या कितनी है लेकिन हैड कांस्टेबल ने दावा कि वे “हजारों की संख्या में हैं.” उसने कहा, “तुम्हें क्या लगाता है, हम यहां बिदक कर क्यों बैठे हैं?” फिर हिंदू भीड़ की ओर इशारा करके कहने लगा, “ये तो गनीमत है कि ये लोग यहां हैं नहीं तो हमारा काम तमाम हो जाता.” शाम 6 बजे तक वजीराबाद रोड पर सैंकड़ों हिंदू और जमा हो गए. वे लोग कहां से आए, पता नहीं चला पर लगा कि सड़क के एक ओर लगे फाटक को तोड़ कर आए हैं.

कौशल श्रॉफ कारवां के स्‍टाफ राइटर हैं.

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