कश्मीर के शोपियां में सुरक्षा बलों और उग्रवादियों के बीच पिसते लोग

26 सितंबर 2019
सना इरशाद मट्टो
सना इरशाद मट्टो

अगस्त के आखिरी दिनों में कश्मीर के शोपियां जिला और सत्र न्यायालय में भारत सरकार के हालिया फैसले का असर साफ दिखाई पड़ रहा था. 5 अगस्त को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के तहत उसे मिले विशेष दर्जे को छीन लिया था. इस कदम से कुछ वक्त पहले ही सरकार ने घाटी में संचार ठप्प कर धारा 144 लगा दी थी. इसका नतीजा यह हुआ कि जिन वकीलों से मैं अदालत में मिलने गया, उन्हें भी कुछ पता नहीं था और वे हालात को समझने की कोशिश कर रहे थे. जो थोड़ी-बहुत सूचनाएं उनके पास थीं वे अच्छी नहीं थीं. वे लोग मुझसे पूछ रहे थे : "कश्मीर के दूसरे हिस्सों में क्या हो रहा है?”

कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म करने से पहले ही शोपियां में डर का माहौल बना हुआ है. 1 अगस्त को केंद्र सरकार ने घाटी में सैनिकों की संख्या को अभूतपूर्व रूप से बढ़ा दिया था. वकील बसित अहमद वानी ने बताया कि अनुच्छेद 370 हटाए जाने से एक दिन पहले उन्होंने सुना था कि किसी ने हिल्लाव और इमाम साहिब गांवों को जोड़ने वाली सड़क पर भारतीय सेना की गाड़ी में पत्थर मारा है. उन्होंने बताया कि सेना के जवानों ने “गाड़ी से उतर कर लोगों को पीटा और आसपास खड़े वाहनों, दुकानों और घरों की खिड़कियां तोड़ दीं.”

वकील हबील इकबाल ने बताया कि संचार पर रोक लगने के बाद शोपियां में 28 अगस्त तक समाचार पत्रों का वितरण नहीं हुआ. दिल्ली में स्थित सरकारी प्रेस विज्ञप्ति और एजेंसियों पर निर्भर रहने वाले घाटी के समाचार पत्र श्रीनगर शहर के अलावा किसी अन्य क्षेत्र को शायद ही कवर कर सकते थे इसलिए समाचार के लिए वकील ग्रामीण क्षेत्रों में हिरासत और यातना के मामलों के नोट देने लगे. हेफ-शेरमाल के वरिष्ठ वकील अब्दुल हामिद दार ने मुझे बताय कि भारतीय सेना ने उनके चचेरे भाई का टॉर्चर किया और उसकी चीखों को लाऊडस्पीकर पर “लोगों को सुनाया.”

"हम ऐसे इलाके में रहते हैं जहां सांस लेना भी दुश्वार है," दार कहते हैं. यहां के तमाम वकील और स्थानीय लोग भी दार जैसी ही सोच रखते हैं. यह भावना शोपियां में आतंकवादियों और सुरक्षा बलों के बीच खुले तौर पर होने वाले संघर्षों और मनमानी गिरफ्तारियों के कारण है. हालांकि 5 अगस्त से शोपियां में ऐसा कुछ नहीं घटा है लेकिन उग्रवादी फरमान जारी कर रहे हैं और लोगों को धमका रहे हैं. वहीं सुरक्षा बल भी इन धमकियों के जवाब में नागरिकों को और डरा रहे हैं.

“शोपियां में जो हो रहा है उससे युवाओं में भारत के प्रति अधिक घृणा और क्रोध पैदा हो रहा है. लोगों ने इरादा कर लिया है कि जब तक कश्मीर में द्वंद्व खत्म नहीं होता वे विरोध जारी रखेंगे.”

इरफान मेहराज श्रीनगर, कश्मीर में पत्रकार हैं.

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