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(एक)
वुमथांग सितलहो 13 मई की सुबह अच्छे मूड में थे. उन्होंने जल्दी-जल्दी नाश्ता किया. प्रार्थना की. फिर 75 साल के यह बैपटिस्ट पादरी चूराचांदपुर से कंगपोकपी के लिए निकल गए. चूराचांदपुर मणिपुर के दक्षिण में है. कंगपोकपी क़रीब 100 किलोमीटर उत्तर में है.
आम दिनों में यह सफ़र तीन घंटे का होता. लेकिन तीन साल पहले कुकी और मैतेई के बीच शुरू हुए जातीय झगड़े के बाद इम्फाल घाटी कुकी लोगों के लिए बंद हो गई. कुकी लोग आसपास के पहाड़ों में रहते हैं. वुमथांग की थाडौ जनजाति इन्हीं में सबसे बड़ी है.
क़रीब चार लाख लोगों की आवाजाही पर सख्त पाबंदी है. राज्य सरकार ने कोई दूसरा वैकल्पिक रास्ता नहीं बनाया, तो पहाड़ी जिलों के लोगों ने ख़ुद पैसे इकट्ठा किए. उन्होंने अस्थायी सड़कें बनवाईं. ये सड़कें अलग-अलग उग्रवादी संगठनों ने बनाईं.
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