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12 जून, 2025 की सुबह मुक्ति अर्जुनसिंह वंसाडिया की 60 वर्षीय मां दिव्या वंसाडिया बहुत ख़ुश थीं. वह पति अर्जुनसिंह के साथ उसी दोपहर लंदन के लिए उड़ान भरने वाली थीं, जहां मुक्ति की बड़ी बहन रहती थीं. मुक्ति ने बताया, 'मैं चाहती थी कि उन्हें ड्रीमलाइनर का अनुभव मिले.' बोइंग 787 एक आधुनिक, चौड़ी बॉडी वाला विमान है जिसमें बहुत बड़ा केबिन और नौ सीटों वाली कतारें होती हैं. मुक्ति अपने माता-पिता के इस नए अनुभव को 'शानदार, आरामदायक और यादगार' बनाना चाहती थीं. सूरत के किसान अर्जुनसिंह घबराए और डरे हुए थे. उन्होंने पहले कभी हवाई यात्रा नहीं की थी. मुक्ति ने उन्हें बिठाकर समझाया, 'एयरलाइंस का सुरक्षा रिकॉर्ड बहुत अच्छा होता है. पापा, यह सड़कों जैसा नहीं है जहां रोज़ दुर्घटनाएं होती हैं.'
उनके माता-पिता की फ़्लाइट, एयर इंडिया 171, एविएशन के इतिहास की एक सबसे छोटी उड़ान सबित हुई. टेक-ऑफ़ से लेकर क्रैश होने तक कुल 32 सेकंड की उड़ान. इस जोड़े के साथ 239 यात्री और क्रू सदस्य मारे गए. जब विमान अहमदाबाद एयरपोर्ट से दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित बी. जे. मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल ब्लॉक से टकराया, तो ज़मीन पर मौजूद 19 लोग भी मारे गए. मुक्ति ने मुझसे पूछा, 'ऐसा क्यों हुआ?' यह एक ऐसा सवाल है जो मुक्ति और सैकड़ों अन्य परिवारों को एआइ 171 के बारे में परेशान करता है.
एविएशन से जुड़े अधिकारियों ने जल्द ही एक जवाब पर सहमति बना ली थी. भारत के नागरिक उड्डयन मंत्रालय के तहत काम करने वाली एजेंसी, एयरक्राफ़्ट एक्सीडेंट इंवेस्टिगेशन ब्यूरो (एएआइबी), द्वारा अपनी शुरुआती रिपोर्ट सौंपने से दो दिन पहले, वॉल स्ट्रीट जर्नल ने एक एक्सक्लूसिव ख़बर छापी. इसका शीर्षक था : 'एयर इंडिया जांच में पायलटों की कार्रवाई और विमान के फ़्यूल स्विच पर शुरुआती फ़ोकस.' ख़बर में कहा गया कि शुरुआती जांच से पता चलता है कि पायलट ने इंजन तक ईंधन पहुंचाने वाले स्विच को बंद कर दिया था. हालांकि, रिपोर्ट में इस बात को साबित करने का तरीक़ा अजीब था. 12 जुलाई को एएआइबी ने अपनी रिपोर्ट रात 1 बजे जारी की, कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं, कोई तकनीकी ब्रीफ़िंग नहीं और न ही जांचकर्ताओं ने कोई सवाल लिया. वह बस 15 पेज का एक बिना हस्ताक्षर और बिना तारीख़ वाला दस्तावेज़ था, जिसमें सीधे तौर पर पायलट को दोषी नहीं ठहराया गया था, लेकिन चुने हुए डेटा के आधार पर यह इशारा किया गया था कि पायलट ने इंजन का ईंधन बंद कर दिया था.
मैंने जिन एविएशन इंजीनियरों से बात की, उन्होंने कहा कि रिपोर्ट का बाकी हिस्सा बकवास है और इसमें उन ज़रूरी जानकारियों की कमी है जिन्हें ऐसी रिपोर्टों में आमतौर पर उजागर किया जाता है. ‘फ़ाउंडेशन फ़ॉर एविएशन सेफ़्टी’ के डिप्टी डायरेक्टर, जो जैकबसन, ने मुझे बताया कि रिपोर्ट में जो डेटा शामिल नहीं किया गया, वही डेटा यह तय करने के लिए ज़रूरी था कि कॉकपिट की बातचीत से पहले ही विमान किसी मुश्किल स्थिति में था या नहीं.
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