पंजाब में पूर्व पत्रकार की चाकू मारकर हत्या, परिवार ने लगाया पुलिस जांच में चूक का आरोप

10 मई की रात पंजाब की एक सड़क पर 35 वर्षीय किसान और पूर्व पत्रकार सनप्रीत सिंह मंगत मृत अवस्था में पाए गए. उनके परिवार के अनुसार पुलिस ने लापरवाही से हत्या की जांच की है.
साभार : जतिंदर कौर तुर
10 मई की रात पंजाब की एक सड़क पर 35 वर्षीय किसान और पूर्व पत्रकार सनप्रीत सिंह मंगत मृत अवस्था में पाए गए. उनके परिवार के अनुसार पुलिस ने लापरवाही से हत्या की जांच की है.
साभार : जतिंदर कौर तुर

10 मई की रात पंजाब के लुधियाना के माछीवाड़ा के राहों कस्बे को जोड़ने वाली सड़क पर 35 वर्षीय किसान और पूर्व पत्रकार सनप्रीत सिंह मंगत मृत अवस्था में पाए गए. सनप्रीत का शव उनके पिता बलवंत सिंह को मिला और पंजाब पुलिस ने कुछ घंटों के भीतर मामले में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की. प्राथमिकी में दावा किया गया है कि बलवंत ने बताया है कि उनके बेटे की मौत एक  "अज्ञात वाहन चालक" के "अज्ञात वाहन" से हुई "दुर्घटना" में हुई. लेकिन बलवंत ने कहा कि सनप्रीत की मौत के बाद उन्होंने खून से लथपथ हालत में शव पाया, इस दावे को खारिज करता है. उन्होंने मुझे बताया कि पुलिस उन्हें समझाने की कोशिश करती रही कि सनप्रीत की एक दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी. अगले दिन पोस्टमार्टम से पता चला कि सनप्रीत को कम से कम 13 बार चाकू मारा गया था और पांच दिन बाद पुलिस ने एफआईआर में सूचीबद्ध अपराधों में हत्या भी जोड़ा.

शुरुआती एफआईआर के साथ अन्य बहुत से कारण हैं जिनके चलते सनप्रीत के परिजन पुलिस जांच पर सवाल उठा रहे हैं. 23 मई को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में पुलिस ने कहा कि उसने सनप्रीत की हत्या के आरोप में छह युवकों को पकड़ा था और उन्होंने अपराध को कबूल कर लिया है. प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि हमलावर सड़क पर चलते हुए हथियारों से लैस और भड़के हुए थे और उनकी नीयत राहचलते लूटपात करने की थी. विज्ञप्ति में कहा गया कि छह लोगों ने कबूल किया है कि उन्होंने सनप्रीत से एक चांदी की चेन चुराई थी.

लेकिन बलवंत ने कहा कि उनका बेटा इस तरह की कोई चेन पहनता ही नहीं था. नाम जाहिर ना करने का अनुरोध करते हुए सनप्रीत के मामा ने कहा कि नोवल कोरोनोवायरस का मुकाबला करने के लिए जारी राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन में नशे में धुत्त आ​दमियों के लिए मुख्य सड़क में यात्रा करने वाली बात बहुत अजीब है. परिवार ने कहा कि भले ही पुलिस ने असली अपराधियों को गिरफ्तार किया हो लेकिन पुलिस के पास ऐसा कोई सबूत नहीं जिससे उन्हें दोषी ठहराया जा सके- आपराधिक प्रक्रिया के अनुसार, अदालत में पुलिस का कबूलनामा स्वीकार्य नहीं है.

परिजनों के अनुसार सभी नहीं तो कम से कम कई ऐसे संकेत हैं जो बताते हैं पुलिस ने हड़बड़ी और बेमन से हत्या की जांच की. परिजनों ने कहा कि पुलिस अनावश्यक रूप से उस मामले की सामने ला रही है जिसमें सनप्रीत को झूठमूठ में फंसाया गया था. वह मामला खसखस (पोस्त की भूसी) ​​के परिवहन से संबंधित था. उन्होंने दावा किया कि पुलिस हत्या की गुत्थी सुलझाने के दबाव को कम करने के लिए सनप्रीत को ही बदनाम करने की कोशिश कर रही है. पुलिस इस बात को भी नजरअंदाज करती दिखी कि एक पत्रकार के रूप में  सनप्रीत ने अवैध रेत खनन पर रिपोर्टें लिखीं थी. परिवार और सनप्रीत काम परिचित लोगों ने कहा कि पुलिस को यह भी जांच करनी चाहिए कि क्या हत्या का इससे कोई संबंध था. जांच में इन खामियों के कारण सनप्रीत के मामा ने कहा कि परिवार एक स्वतंत्र एजेंसी द्वारा हत्या की उच्च-स्तरीय जांच की मांग करेगा.

सनप्रीत अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले व्यक्ति थे. उनके परिवार में माता-पिता, पत्नी और दो बच्चे है. उनकी मौत की खबर फैलने के बाद, एसबीएस नगर में उनके दोस्तों और पत्रकारों ने सोशल मीडिया पर सनप्रीत की मौत पर शोक व्यक्त किया. वह एक "निडर" रिपोर्टर थे, उनमें से एक ने कहा. सनप्रीत के मामा ने भी उन्हें एक ऐसा रिपोर्टर बताया, "जिसने कई लोगों के गलत धंधे उजागर किए." उन्हें जानने वाले दो पत्रकारों ने मुझे बताया कि यह संभव है कि उनकी रेत खनन की रिपोर्टों के कारण उनकी हत्या कर दी गई थी.

जतिंदर कौर तुर वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले दो दशकों से इंडियन एक्सप्रेस, टाइम्स ऑफ इंडिया, हिंदुस्तान टाइम्स और डेक्कन क्रॉनिकल सहित विभिन्न राष्ट्रीय अखबारों में लिख रही हैं.

Keywords: Punjab police murder
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