हापुड़ हत्याकांड: हमलावरों के परिवारों ने माना कि गोकशी के संदेह में ही भीड़ ने हमला किया था, फिर भी पुलिस मामले पर परदा डालने में जुटी है

26 जून 2018
पिलखुआ में कासिम के घर पर उनकी एक तस्वीर
कारवां/शाहिद तांत्रे
पिलखुआ में कासिम के घर पर उनकी एक तस्वीर
कारवां/शाहिद तांत्रे

ईद-उल-फि़तर के दो दिन बाद की घटना है. हापुड़ के पिलखुआ निवासी मोहम्‍मद कासिम (50) के पास 18 जून को एक फोन आता है. उसके तुरंत बाद वे घर से निकल जाते हैं. सुबह दस साढ़े दस बजे के बीच की बात होगी. अपने बेटे महताब को वे कह कर जाते हैं कि वापसी में एक बकरा या भैंसा लेकर आएंगे. उन्‍होंने बेटे को फोन करने वाले का नाम तो नहीं बताया लेकिन इतना कहा कि सात किलोमीटर दूर बझेड़ा खुर्द गांव में मवेशियों की खरीद पर एक बढि़या सौदा पट गया है. महताब ने मान लिया कि फोन करने वाला पिता का कोई परिचित ही रहा होगा.

उस दिन शाम चार बजे के आसपास महताब बताते हैं कि उन्‍हें एक पड़ोसी का फोन आया. उसने बताया कि कासिम पिलखुआ कोतवाली में हैं. महताब कहता है, ''थाने गए, थाने में नहीं मिले. फिर अस्‍पताल गए, वहां पर उनकी लाश थी. शरीर पर निशान थे डंडे के, चक्‍कू के, दरांती के.''

कासिम कसाई का काम करते थे. बकरे और भैंसे का गोश्‍त बेचते थे. दिल्‍ली से पूरब की ओर कोई 70 किलोमीटर दूर राष्‍ट्रीय राजमार्ग 9 पर उनका घर पड़ता है. मैं 21 जून को वहां पहुंचा. वे पिलखुआ में एक दोमंजिला मकान के भीतर किराये के एक कमरे में परिवार के साथ रहते थे. बाहर दो बकरे बंधे हुए थे. छह बच्‍चों में महताब (20) सबसे बड़ा है. वह ठेले पर फल बेचता है.

कासिम के घर से निकलने के बाद क्‍या हुआ था, इस पर काफी जानकारी बाहर आ चुकी है. मवेशी खरीदने के लिए जब वह नियत जगह पर पहुंचा तो भीड़ ने उनके ऊपर हमला किया, बेतरह पीटा और जान से मार दिया. एक वीडियो काफी प्रसारित हुआ है जिसमें कासिम को बझेड़ा खुर्द गांव के एक सूखे खेत में पड़ा दिखाया गया है. उन्‍हें घेर कर कुछ लोग खड़े हैं जो पीट रहे हैं. बाद में मुझे गांव के लोगों से जानकारी मिली कि वे बझेड़ा खुर्द के राजपूत थे. वीडियो में सुना जा सकता है कि हमलावर कासिम को ''बहनचोद'' और ''सूअर'' कह रहे थे. कासिम दर्द से कराह रहे थे. वे नीमबेहोशी में थे और उनके बाहिनी एड़ी के पास का मांस उखड़ा हुआ था. फिर अचानक वे पलट जाते हैं. वहां खड़े लोगों को यह बात करते सुना जा सकता है कासिम को पीने के लिए पानी दिया जाए या नहीं, जिंदा छोड़ा जाए या नहीं. ऐसा लगता है कि वीडियो पुसिवाले की मौजूदगी में शूट किया गया है. भीड़ में से एक आवाज़ पास में मौजूद किसी पुलिसवाले का जिक्र करते सुनी जा सकती है. आवाज़ आती है, ''पुलिसवाले को गाय मिली... ये पुलिसवाले खड़े हैं न.''

एक और व्‍यक्ति पर हमला हुआ था- मोहम्‍मद समीउद्दीन, जो पास के गांव मादापुर के रहने वाले हैं और कथित तौर पर कासिम की मदद को आए थे. उन्‍हें बुरी तरह पीटा गया. वे फिलहाल हापुड़ शहर के देवनंदिनी अस्‍पताल के आइसीयू में भर्ती हैं.

सागर कारवां के स्‍टाफ राइटर हैं.

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