तमिलनाडु में आदिवासी युवती के साथ दुष्कर्म करने वालों को बचा रही पुलिस

13 दिसंबर 2018
10 नवंबर को तमिलनाडु के धरमपुरी जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र सित्तीलिंगी में 2000 से अधिक मलयवासी आदिवासियों ने 16 साल की नाबालिक युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के खिलाफ प्रदर्शन किया.
10 नवंबर को तमिलनाडु के धरमपुरी जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र सित्तीलिंगी में 2000 से अधिक मलयवासी आदिवासियों ने 16 साल की नाबालिक युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के खिलाफ प्रदर्शन किया.

10 नवंबर को तमिलनाडु के धरमपुरी जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र सित्तीलिंगी में दो हजार से अधिक मलयवासी आदिवासियों ने प्रदर्शन किया. यह प्रदर्शन एक ऐसे अपराध के खिलाफ हुआ था जो गांव में पहले कभी नहीं सुना गया था. अपराध था- एक 16 साल की नाबालिक युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म और हत्या. आदिवासी केवल इस बात का विरोध नहीं कर रहे थे कि पुलिस दोषियों को पकड़ने में नाकाम रही है बल्कि स्वयं पुलिस की लापरवाही और मामले में उसकी उदासीनता और साथ ही खस्ताहाल सरकारी अस्पताल के खिलाफ भी प्रदर्शन कर रहे थे. इस अस्पताल में दुष्कर्म के बाद युवती को भर्ती किया गया था. नाम न बताने की शर्त पर 38 वर्षीय नर्स ने मुझे बताया, “जब पुलिस लड़की को लेकर जा रही थी तो हमें विश्वास था कि वे उसकी ठीक तरह से रेखदेख करेंगे. पुलिस हम आदिवासियों की कभी चिंता नहीं करती तब भी इस बार लगा था कि इतने गंभीर मामले में वह अपना काम ठीक तरह से करेगी. अब हमें उन लड़कों की ही तरह पुलिस भी हत्यारी लग रही है.”

2 दिन बाद आदिवासी परंपरा के अनुसार अंतिम संस्कार के लिए 16 वर्षीय युवती के शव को 200 से अधिक पुलिसबल के साथ सित्तीलिंगी लाया गया. प्रदर्शनों को हिंसक तरीके से दबाने के पुलिस के रिकॉर्ड के मद्देनजर यहां के रहने वालों ने भारी संख्या में गांव में पुलिस की उपस्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की. परिणामस्वरूप जिन भी लोगों से मैंने बात की उनमें से अधिकांश अपनी पहचान उजागर नहीं करना चाहते थे. सित्तीलिंगी में कॉलेज के एक 21 वर्षीय छात्र ने मुझे बताया, “हमने लड़कों को कह रखा था कि वे अंतिम संस्कार की विडियो बना लें क्योंकि हम जानते थे कि पुलिस हिंसा कर सकती है और बाद में प्रदर्शनरियों पर इसका आरोप लगा सकती है.“

स्थानीय लोगों का मानना है कि पुलिस अपराध की जांच में सुस्ती के लिए ही नहीं बल्कि दुष्कर्म को मात्र इसका प्रयास दिखा कर छिपाने की कोशिश करने की भी दोषी है. पुलिस 16 वर्षीय युवती को तत्काल चिकित्सा उपलब्ध नहीं करा सकी और उसने यौन हिंसा की सूचना अन्य एजेंसियों को नहीं दी. इसके अलावा और भी कई तरह की अनदेखी हुई जिसकी वजह से युवती की मौत हो गई. युवती की मौत धरमपुर शासकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में हुई जो यहां का जिला अस्पताल है. एफआईआर दायर करने से लेकर युवती की मौत तक की परिस्थितियों से लापरवाहियों का पता चलता है. लोग मानते हैं कि इस तरह की लापरवाही आदिवासियों के प्रति व्यवहार में आम है.

3 नवंबर को 16 वर्षीय नाबालिग लड़की धरमपुर के पप्पीरेड्डीपट्टी शहर के आवासीय स्कूल से दिवाली की छुट्टी में घर आई थी. दो दिन बाद उसके गांव के समुदाय के 2 आदमियों- ए सतीश और पी रमेश- ने गांव की एक नहर के किनारे कथित तौर पर उसका बलात्कार किया. रोते हुए उस युवती की 45 वर्षीय मां ने उस घटना के बारे में बताया जिसके बारे में मौत से पहले बेटी ने उन्हें बताया था. आरोपियों ने अपनी लुंगी निकाल कर लड़की के मुंह में ठूंस दी थी ताकि वह चिल्ला न सके. उसके कपड़े उतारे और उन कपड़ों से उसके हाथों को पीछे बांध दिया और फिर बारी बारी से उसका बलात्कार किया. लड़की का भाई जब उसका नाम पुकारता हुआ उसे ढूंढ रहा था तब उसकी आवाज सुन कर दोनों भाग गए और लड़की घिसटते हुए घर पहुंची.

जब लड़की घर पहुंची तो उसके शरीर पर चोट और खरोंच के निशान थे और वह बहुत मुश्किल से चल पा रही थी. इसके तुरंत बाद उसके मां-बाप और भाई उसे 12 किलोमीटर दूर कोट्टापट्टी गांव में स्थित सबसे नजदीकी पुलिस स्टेशन ले गए. दुष्कर्म की शिकार युवती के 24 वर्षीय भाई ने मुझे बताया, “पहले तो कांस्टेबल ने शिकायत दर्ज करने से ही मना कर दिया. फिर बाद में  2000 रुपए रिश्वत देने और तमिलनाडु पुलिस की हेल्प लाइन में फोन करने के बाद रिपोर्ट दर्ज हो सकी.” भाई का कहना है, “पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने से मना कर दिया और मामले को छिपाने में लग गई क्योंकि वे लोग सतीश की मां के अवैध शराब के व्यवसाय में लिप्त हैं और उसे बचाना चाहते हैं.”

अभय रेगी तमिलनाडु में स्वतंत्र पत्रकार हैं.

Keywords: Tribal communities society rape laws Tamil Nadu gender violence Sexual violence
कमेंट