"अगर एक्स-रे रिपोर्ट असली होगी तो गोली का निशान दिखेगा", नवरीत के दादा डि​बडिबा

13 फरवरी को किसान आंदोलन के गाजीपुर स्थल पर अपने पोते नवप्रीत सिंह के लिए एक प्रदर्शन करते हरदीप सिंह डिबडिबा (बीच में). 26 जनवरी को हुई ट्रैक्टर रैली के दौरान नवरीत की मृत्यु हो गई थी. डिबडिबा ने मौत की जांच की मांग करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है.
साकिब अलि / हिंदुस्तान टाइम्स / गैटी इमेजिस
13 फरवरी को किसान आंदोलन के गाजीपुर स्थल पर अपने पोते नवप्रीत सिंह के लिए एक प्रदर्शन करते हरदीप सिंह डिबडिबा (बीच में). 26 जनवरी को हुई ट्रैक्टर रैली के दौरान नवरीत की मृत्यु हो गई थी. डिबडिबा ने मौत की जांच की मांग करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है.
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4 मार्च को दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश योगेश खन्ना ने उत्तर प्रदेश पुलिस और रामपुर जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिया कि वे दिल्ली पुलिस को नवरीत सिंह की पोस्टमार्टम रिपोर्ट की मूल एक्स-रे प्लेट और वीडियो उपलब्ध कराएं. रामपुर के किसान नवप्रीत की 26 जनवरी को हुई ट्रैक्टर रैली में मौत हो गई थी. खन्ना ने नवरीत के दादा हरदीप सिंह डि​बडिबा की याचिका पर सुनवाई करते हुए उपरोक्त आदेश पारित किया. डिबडिबा की याचिका में 25 वर्षीय किसान नवरीत की मौत की स्वतंत्र जांच की मांग की गई थी. आदेश के बाद, डिबडिबा अपने बेटे और भतीजे के साथ सिंघु सीमा पहुंचे. 27 जनवरी को जब नवरीत का एक्स-रे हुआ था तो उनका मूल एक्स-रे देखा था. "अगर हमें दिखाई जाने वाली एक्स-रे प्लेट में बुलेट से होने वाला निशान या प्रक्षेपवक्र नहीं हुआ, तो इसका मतलब हुआ कि मूल एक्स-रे में फेर-बदल की गई है," डिबडिबा ने जोर देकर कहा.

"परिवार के तीन सदस्य मूल एक्स-रे प्लेट और वीडियो रिकॉर्डिंग देखेंगे. मेरा भतीजा, जो एक्स-रे के वक्त उस कमरे में मौजूद था, मेरा बेटा और मैं," डिबडिबा ने बताया और कहा, "मेरा भतीजा यह जांचेगा या सत्यापित करेगा कि क्या यह वही एक्स-रे प्लेट है जिसे उसने पहले देखा था." डिबडिबा ने कहा कि मूल एक्स-रे में "तीन इंच लंबा बुलेट का निशान" था जो स्पष्ट रूप से बुलेट के घुसने और बाहर निकलने के बिंदुओं को दिखा रहा था. नवरीत की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दिखाया गया था कि अन्य चोटों के बीच, उनकी ठुड्डी के बाईं ओर "उलटा और हड्डी तक गहरे" मार्जिन के साथ एक गंभीर घाव था और दाहिने कान पर "अनियमित और उलटा" मार्जिन और "कानों की ओस्कल्स" हड्डी पर एक और गहरा घाव था और ''उसका भेजा बाहर आ गया था.”

जैसा कि कारवां ने पहले बताया था कि नवरीत की मौत के चश्मदीदों ने कहा था कि दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने उसे मध्य दिल्ली के आंध्रा एजुकेशन सोसायटी के बाहर गोली मारी थी. जिसके बाद उसका ट्रैक्टर पलट गया. कई फोरेंसिक विशेषज्ञों के अनुसार पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चलता है कि ऐसी चोटें केवल गोलियों के कारण ही आ सकती हैं. जब पोस्टमार्टम किया गया तब डिबडिबा और नवप्रीत के चाचा रामपुर के जिला अस्पताल में मौजूद थे. उन्होंने बताया कि जांच करने वाले डॉक्टरों ने माना था कि चोटें गोली के कारण हुई हैं लेकिन दिल्ली पुलिस दावा कर रही है कि नवरीत की मौत तेज गति से चल रहे ट्रैक्टर के पुलिस बैरिकेड के टकरा कर पलट जाने से हुई थी.

डिबडिबा ने कहा कि जिस दिन नवप्रीत की मौत हुई, उसी दिन उन्होंने रामपुर जिला अस्पताल के सीएमओ सुबोध शर्मा से उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट और एक्स-रे मांगी थी और फिर 30 जनवरी को भी उन्होंने इसकी मांग की थी लेकिन दोनों बार ही उन्हें देने से मना कर दिया गया. उन्होंने कहा कि सीएमओ ने उनसे कहा, "नहीं, हम किसी भी हालत में नहीं दे सकते." इस आरोप के संबंध में जब कारवां ने उनसे संपर्क किया था तो शर्मा ने कहा था, "हम केवल अदालत के समक्ष बोल सकते हैं."

अपनी याचिका में डिबडिबा ने मांग की थी कि “न्यायपालिका द्वारा नियुक्त और उसी की निगरानी में विशेष जांच टीम बनाई जाए जिसमें ऐसे पुलिस अधिकारी हों जो ईमानदार, प्रभावकारी और सत्यनिष्ठ हों.”  उन्होंने परिवार को शव की एक्स-रे रिपोर्ट और पोस्टमार्टम की वीडियो रिकॉर्डिंग की प्रतियां उपलब्ध कराने के लिए अदालत से अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की थी. खन्ना ने पहली सुनवाई के बाद 11 फरवरी को उत्तर प्रदेश पुलिस और जिला अस्पताल के सीएमओ को नोटिस जारी किया था.

जतिंदर कौर तुर वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले दो दशकों से इंडियन एक्सप्रेस, टाइम्स ऑफ इंडिया, हिंदुस्तान टाइम्स और डेक्कन क्रॉनिकल सहित विभिन्न राष्ट्रीय अखबारों में लिख रही हैं.

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