नागपुर का बीफ़

नितिन गडकरी के कारोबार में बीफ़ कंपनी की बड़ी कमाई

इलसट्रेशन : अनन्या गुप्ता

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एफ़आइआर के मुताबिक, 10 मार्च, 2022 की रात 3.30 बजे महाराष्ट्र के लोनावला ग्रामीण पुलिस थाने में एक फ़ोन आया. सूचना देने वाले ने अपना नाम तो नहीं बताया, लेकिन जानकारी दी कि पुणे-मुंबई एक्सप्रेसवे से बीफ़ (गोवंश का मांस) से लदा एक ट्रक गुज़रने वाला है. कॉलर का दावा था कि यह ट्रक पश्चिमी घाट (वेस्टर्न घाट्स) के रास्ते निकलेगा.

यह एक महत्वपूर्ण सूचना थी. 2015 में बीजेपी सरकार द्वारा पशु संरक्षण कानूनों में किए गए बदलावों के बाद, महाराष्ट्र में बीफ़ रखना हेरोइन या कोकीन जैसे मादक पदार्थ रखने से भी अधिक गंभीर अपराध की श्रेणी में आ गया है. पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की. असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर कुतुबुद्दीन गुलाब ख़ान सिंहगढ़ कॉलेज के पास तैनात थे, जहां पहाड़ों में प्रवेश से पहले हाईवे एक चौड़ा मोड़ लेता है. उसी शाम उन्हें 'एनएल 01 एबी 5853' नंबर का वही ट्रक दिखा, जिसका ज़िक्र सूचना में था. ख़ान ने रुकने का इशारा किया, लेकिन ट्रक तेज़ी से निकल गया. पीछा करने के बाद पुलिस ने 35 वर्षीय ड्राइवर मग्नू अशरफी पासवान और 25 वर्षीय क्लीनर शुभम शर्मा को गिरफ़्तार कर लिया.

ट्रक के दस्तावेज़ों से पता चला कि यह हैदराबाद से चला था और इसमें 1,400 डिब्बे प्रोसेस्ड मीट लदा था. प्रत्येक डिब्बे का वज़न 20 किलोग्राम था. ज़ब्त मीट की बाज़ार में कीमत पुलिस ने लगभग 60 लाख रुपए आंकी. आरोपियों के पास न तो मांस की वैधता का कोई प्रमाणपत्र था और न ही परिवहन के वैध काग़ज़ात. उन्हें बस इतना निर्देश था कि यह माल मुंबई या हैदराबाद निवासी रेहान अहमद कुरैशी (उर्फ़ रेहान चौधरी) तक पहुंचाना है.

महाराष्ट्र पुलिस को मांस के मालिकाना हक के लिए ज़्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ी. अगले ही दिन मुंबई की रेंबल एग्रो एंड फूड्स कंपनी ने पुणे के वडगांव मावल कोर्ट में अर्ज़ी दी कि केस की सुनवाई पूरी होने तक 28 टन मांस उसे सौंप दिया जाए. कंपनी का दावा था कि यह मांस गाय का नहीं बल्कि भैंस का है, जो कि कानूनन वैध है. रेंबल ने दलील दी कि यह मीट उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से खरीदा गया था, जिसे प्रोसेसिंग के लिए हैदराबाद भेजा गया और अब वियतनाम निर्यात करने हेतु मुंबई ले जाया जा रहा था.

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