निर्भया मामले में फांसी का एक साल

मृत्युदंड मिले बेटे की मां राम बाई से वे मुलाकतें

20 मार्च 2021
मुकेश सिंह के दिवंगत पिता मंगे लाल और मां राम बाई.
मानसी थपलियाल / रॉयटर्स
मुकेश सिंह के दिवंगत पिता मंगे लाल और मां राम बाई.
मानसी थपलियाल / रॉयटर्स

20 मार्च 2020 को निर्भया मामले के चारों दोषियों को फांसी दी गई थी. 16 दिसंबर 2012 को 23 साल की फिजियोथेरेपी की विद्यार्थी ज्योति सिंह की दिल्ली में सामूहिक बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई थी. इस मामले को ''निर्भया'' केस के तौर पर जाना गया. फांसी दिए जाने से पहले कारवां अंग्रेजी की वेब एडिटर सुरभि काँगा ने दोषियों में से एक मुकेश सिंह की मां से मुलाकात की थी. इस मुलाकात की रिपोर्ट पिछले साल 19 मार्च को कारवां में प्रकाशित हुई थी. आज फांसी के एक साल बाद काँगा फिर एक बार उन मुलाकातों को याद कर रही हैं.

एक पूरा साल बीत गया जब 68 साल की राम बाई अपने बेटे मुकेश से आखिरी बार मिलने की उम्मीद में दिल्ली की तिहाड़ जेल पहुंची थीं.उनके पहुंचने से कुछ ही घंटे पहले दिल्ली की अदालत ने उनके बेटे की फांसी की सजा पर रोक लगाने को ठुकरा दिया था. फांसी का दिन 20 मार्च सुबह 5.30 पर आखिरी मुहर लगाई जा चुकी थी.

जब मैं उनसे मिली थी तो लगभग पांच फीट से भी कम की दुबली-पतली, कृशकाय बूढ़ी राम बाई इस आखिरी फैसले से टूटी हुई नजर आ रही थीं. सुबकते हुए वह बोलीं, ''वही हुआ जिसका मुझे अरसे से डर था.'' आंखों से बह रहे आंसू तार-तार हो चुके उनके शॉल को भीगो रहे थे. ''उसकी जान लेकर उन्हें क्या मिलेगा, बताओ मुझे? क्या मिलेगा उन्हें? उन्होंने मुझसे मेरा दूसरा बेटा छीन लिया, मेरा पति छीन लिया... इसे भी छीन कर क्या मिलेगा उन्हें?''

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31 जनवरी 2020 जब मैं राम बाई से पहली बार मिली थी तो वह तिहाड़ आई थीं यह सोच कर कि अपने बेटे से मिलने का उनका यह आखिरी मौका होगा. उस वक्त मुकेश को 1 फरवरी को फांसी दी जानी थी. ''मैं क्या कह सकती हूं,'' उन्होंने पूछा था. उनके मरकटहा चेहरे पर थकान साफ दिख रही थी. ''हमारी किसने कभी सुनी है? हम गरीब हैं, गरीबों की कौन सुनता है,'' टूटी हुई आवाज में उन्होंने मुझसे कहा था. ''मैं रातों को सो नहीं पाती... बस सोचती रहती हूं, मेरा बेटा कैसा है, उसने खाना खाया होगा या नहीं.'' उन्होंने बताया था कि उनका कुछ भी खाने-पीने का जी नहीं करता. ''मुझे बस यही ख्याल खाए जाता है कि भगवान ने यह क्या कर दिया?''

सुरभि कॉंगा द कैरवैन की वेब एडिटर हैं.

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