सोहराबुद्दीन शेख नकली एनकाउंटर के मुख्य गवाह सोलंकी ने कहा- भारत में न्याय नाम की कोई चीज नहीं है

27 सितंबर 2018
सोहराबुद्दीन फेक एनकाउंटर मामले में 21 सितंबर को सीबीआई कोर्ट ने एक प्रमुख गवाह- वीएल सोलंकी को गवाही देने के लिए बुलाया है. उन्होंने इस मामले की जांच में अहम भूमिका निभाई थी. मामले में सीबीआई कोर्ट के जज एसजे शर्मा से पहले जो जज थे उनका नाम एमबी गोसावी था. गोसावी ने अमित शाह को साल 2014 में मामले से बरी कर दिया था.
एपी
सोहराबुद्दीन फेक एनकाउंटर मामले में 21 सितंबर को सीबीआई कोर्ट ने एक प्रमुख गवाह- वीएल सोलंकी को गवाही देने के लिए बुलाया है. उन्होंने इस मामले की जांच में अहम भूमिका निभाई थी. मामले में सीबीआई कोर्ट के जज एसजे शर्मा से पहले जो जज थे उनका नाम एमबी गोसावी था. गोसावी ने अमित शाह को साल 2014 में मामले से बरी कर दिया था.
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सोहराबुद्दीन शेख फेक एनकाउंटर मामले में मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत ने अब तक 16 आरोपियों को बरी किया है. बरी किए गए आरोपियों में भारतीय पुलिस सेवा के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं. इनमें गुजरात पुलिस के पूर्व उपमहानिरीक्षक डीजी वंजारा, राजस्थान पुलिस के पूर्व अधीक्षक दिनेश मीणा और गुजरात पुलिस के एंटी-टेररिज्म स्क्वॉड के पूर्व अधीक्षक राजकुमार पांडियन का नाम शामिल है. नवंबर 2017 में मामले का ट्रायल शुरू होने के बाद से अब तक 90 गवाह पलट चुके हैं. इस साल 21 सितंबर को कोर्ट ने एक प्रमुख गवाह- रिटायर्ड पुलिस अधिकारी वीएल सोलंकी को गवाही देने के लिए बुलाया है. सोलंकी वह शख्स हैं जिनकी जांच की वजह से उपरोक्त वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की गिरफ्तारी हुई थी. सोलंकी सोहराबुद्दीन मामले के जांच अधिकारी थे. उन्होंने मामले की शुरुआती जांच की थी जिससे यह बात स्थापित हुई थी कि सोहराबुद्दीन की मौत फेक एनकाउंटर में हुई थी. सोलंकी की इस जांच के आधार पर गुजरात पुलिस ने मामले में 2007 की जनवरी में पहली चार्जशीट दाखिल की. इसके तीन साल बाद, सोहराबुद्दीन के भाई रुबाबुद्दीन ने एक याचिका डाली जिसके बाद सर्वोच्च अदालत ने मामले की जांच को सीबीआई के हवाले कर दिया. रुबाबुद्दीन ने चार्जशीट दाखिल किए जाने के छह दिन बाद अपनी पिटीशन डाली थी. साल 2010 की जुलाई में सीबीआई ने एक चार्जशीट दाखिल की. इसमें वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अलावा उस वक्त के गुजरात के गृहमंत्री और फिलहाल भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह पर भी आरोप लगाए गए. 2014 की दिसंबर में शाह को भी इस मामले से बरी कर दिया गया. शाह को बरी करने वाले जज का नाम एमबी गोसावी है. वह मामले में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट के जज तब बने जब इस मामले को पहले से देख रहे जज बीएच लोया की मौत हो गई. गोसावी ने शाह को उसी महीने बरी कर दिया जिस महीने उन्होंने मामले की सुनवाई शुरू की थी.

सीबीआई की चार्जशीट के मुताबिक 22 नवंबर 2005 की रात सोहराबुद्दीन, उनकी पत्नी कौसर बी और उनका साथी तुलसीराम प्रजापति एक लक्जरी बस में हैदराबाद से महाराष्ट्र के सांगली जा रहे थे. उनके इस सफर को गुजरात और राजस्थान पुलिस के अधिकारियों ने रोक दिया. तीनों को गुजरात के वलसाड ले जाया गया. प्रजापति को राजस्थान पुलिस उदयपुर ले गई जहां उसे पांच दिनों तक हिरासत में रख गया. सोहराबुद्दीन और कौसर बी को अहमदाबाद के पास दिशा फार्म हाउस में ले जाया गया. 25 नवंबर की रात सोहराबुद्दीन को गोली मार दी गई. अगली सुबह, उनकी पत्नी कौसर बी को भी गोली मार दी गई और दोनों के शवों को जला दिया गया. 2006 की दिसंबर में प्रजापति को भी मार दिया गया. सोलंकी की जांच से महत्वपूर्ण घटनाओं का पता चला- जैसे, उन्होंने मुख्य गवाहों की पहचान की इनमें बस में सफर कर रहीं शारदा आप्टे भी शामिल थीं जिन्होंने इस बात की पुख्ता जानकारी दी कि सोहराबुद्दीन और कौसर बी उसी बस में सफर कर रहे थे.

इस साल जुलाई में गुजरात पुलिस ने सोलंकी और उनके परिवार को मिली पुलिस सुरक्षा वापस ले ली. इसके बाद इस रिटायर पुलिस अधिकारी ने अहमदाबाद पुलिस कमिश्नर को अपना डर बताते हुए एक चिट्ठी लिखी जिसमें कहा कि उनकी जान और सुरक्षा को खतरा है. इस चिट्ठी में छीनी गई सुरक्षा वापस देने की अपील की गई थी. इस चिट्ठी को उन्होंने गुजरात पुलिस के डीजी, गुजरात पुलिस के क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट के डायरेक्टर जनरल, गुजरात सरकार और सोहराबुद्दीन मामले को देख रहे सीबीआई स्पेशल कोर्ट को भी भेजा. उन्होंने अपनी चिट्ठी में लिखा है, “क्या हमें यह मान लेना चाहिए कि सुरक्षा इसलिए हटाई गई है ताकि मेरे और मेरे परिवार के ऊपर दबाव बने और हम गवाही से पलट जाएं?” जिस दिन सोलंकी को कोर्ट के सामने पेश होना था उस दिन उन्होंने कारवां के स्टाफ राइटर सागर से बात की. इस बातचीत के दौरान उन्होंने सोहराबुद्दीन मामले से जुड़ी जांच और उससे सामने आए तथ्यों के बारे में बताया और इसकी वजह से उनके जीवन पर पड़े असर की जानकारी भी दी.

सागर:आपने गुजरात पुलिस को एक चिट्ठी लिखी है जिसमें कहा है कि आपकी और आपके परिवार की जान खतरे में है क्योंकि आप सोहराबुद्दीन मामले के मुख्य गवाह हैं. आपके ऊपर किस तरह का दबाव है?

वीएल सोलंकी: पहले तो उन्होंने बिना मांगे पुलिस सुरक्षा दी थी. 18 जुलाई 2018 को उन्होंने यह सुरक्षा हटा ली. इसके दो दिनों बाद मैंने सभी एजेंसियों को आवेदन लिखा, जिन्हें आवेदन किया गया उनमें गुजरात के डीजीपी; गुजरात सीआईडी के डीजी; गुजरात गृह विभाग के गृह सचिव; सुप्रीम कोर्ट; गुजरात हाई कोर्ट; सीबीआई के डीजी; और मुंबई सेशन कोर्ट के जज शामिल हैं. मेरी आपसे बातचीत तक इस पर कोई एक्शन नहीं लिया गया है. दूसरी बात यह है कि अब मुझे कोर्ट जाने का समन (बुलावा) आया है. मैं इस मामले का मुख्य गवाह हूं. मैंने शुरुआती जांच की है. मेरी शुरुआती जांच के बाद मामले में केस दर्ज हुआ था और यह पुख्ता तौर पर साबित हुआ है कि यह एक फेक एनकाउंटर है. जब जांच चल रही थी उस दौरान मैंने इस मामले के एक महत्वपूर्ण पहलू की जांच की थी. लेकिन अभी तो मैं इस मामले में कोर्ट जाने तक की स्थिति में नहीं हूं क्योंकि मेरी पुलिस सुरक्षा हटा ली गई है. मैं अपनी जिंदगी की कीमत पर माननीय न्यायालय की कार्यवाही में हिस्सा लेने नहीं जा सकता. यही मेरी स्थिति है. और आप लोग- (पत्राकार)- और वो तमाम लोग जिन्हें इस मामले की सच्चाई पता है, उन्हें पता है कि (इस मामले में शामिल) सारे लोग अपराधी हैं, कभी भी कुछ भी कर सकते हैं.

सागर कारवां के स्‍टाफ राइटर हैं.

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