दिल्ली हिंसा में हिंदू भीड़ के बम हमले मीडिया में नहीं बने खबर

06 जुलाई 2020
24 फरवरी को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में एक मजार में पेट्रोल बम फेंकता आदमी. फरवरी के आखिर में राष्ट्रीय राजधानी में हुई हिंसा में मुस्लिम शिकायतकर्ताओं ने हिंदू भीड़ द्वारा विस्फोटक का उपयोग करने का आरोप लगाया गया था.
दानिश सिद्दीकी / रॉयटर्स
24 फरवरी को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में एक मजार में पेट्रोल बम फेंकता आदमी. फरवरी के आखिर में राष्ट्रीय राजधानी में हुई हिंसा में मुस्लिम शिकायतकर्ताओं ने हिंदू भीड़ द्वारा विस्फोटक का उपयोग करने का आरोप लगाया गया था.
दानिश सिद्दीकी / रॉयटर्स

इस साल फरवरी के आखिर में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा की तमाम रिपोर्टिंगों से एक प्रमुख बात जो गायब रही वह है हिंदू भीड़ द्वारा बमों का बहुतायत में विध्वंसकारी इस्तेमाल. इन इलाकों के मुस्लिम निवासियों द्वारा दिल्ली पुलिस में दर्ज ढेरों शिकायतों में हिंदुत्ववादी नारे लगाने वाली और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाली भीड़ पर बमों का इस्तेमाल करने के आरोप है. विस्फोटक के इस्तेमाल की बस एक खबर मीडिया ने दिखाई थी जिसमें आम आदमी पार्टी के काउंसलर ताहिर हुसैन के छत पर मिले बमों का उल्लेख है. ताहिर हुसैन पर गुप्तचर विभाग के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या का आरोप है. कारवां के पास जो शिकायतें हैं उनमें मुस्तफाबाद, चांदबाग और करावल नगर में विस्फोटकों से हमले की बात कही गई है.

अपनी रिपोर्टिंग के दौरान मैंने देखा कि पुलिस अधिकारी एक शिकायतकर्ता को हिंसा में बम के इस्तेमाल की शिकायत ना करने का दबाव डाल रहे थे. संभव है कि इसी वजह से हिंसा में बम के इस्तेमाल की बात की रिपोर्टिंग बहुत कम हुई है. दो अन्य शिकायतकर्ताओं ने मुझे बताया कि उन्होंने हिंसा के तुरंत बाद शिकायत दर्ज कराई थी. पुलिस ने इन शिकायतों के आधार पर जो एफआईआर दर्ज की उनमें आरोपियों के नाम नहीं थे और विस्फोटकों की जानकारी भी नहीं रखी गई थी. इसका नतीजा यह हुआ कि शिकायतकर्ताओं को मुस्तफाबाद के ईदगाह मैदान में बनाए गए राहत शिविर में पुलिस सहायता डेस्क में नई शिकायतें दर्ज करानी पड़ीं. लेकिन नई शिकायतों के बाद भी ऐसा नहीं लगता कि हिंसा में विस्फोटक के इस्तेमाल की पड़ताल की गई.

मुस्तफाबाद के इलियास ने अपनी शिकायत में लिखा है, “25 फरवरी रात तकरीबन 11 बजे मेरे बेटे के फोन पर कॉल आया कि तुम्हारे मकान व दुकान पर हमला हो गया है और लूटपाट की जा रही है.” इलियास ने यह शिकायत 19 मार्च को गोकलपुरी पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई थी. इलियास ने बताया कि यह सुनते ही वह अपनी दुकान की तरफ भागे और वहां एक भीड़ को खड़ा पाया. उस शिकायत में उन्होंने 7 लोगों का नाम लिया है जिनके हाथों में हथियार थे और वे लोग उनकी दुकान से सामान लूट कर एक टेंपो में भर रहे थे. इलियास ने लिखा है, “तभी मैंने देखा कि अनिल स्वीट वाला एक बम हाथ में लेकर आया. उसने सबसे पीछे होने को कहा और पहले जगदीश प्रधान जिंदाबाद, नंदकिशोर गुर्जर जिंदाबाद, सत्यपाल सांसद जिंदाबाद के नारे लगाए और फिर एक बम मेरे मकान पर फेंक दिया जिसके बाद बहुत जोर से धमाका हुआ और आसपास मेरे मकान की छत उड़ती दिखाई दी और मेरे कान तक सुन्न हो गए.'' इलियास ने शिकायत में लिखा है कि वह डर गए थे इसलिए अपने घर भाग कर आ गए. हमले के तुरंत बाद उन्होंने गोकलपुरी थाने में पहली शिकायत दर्ज कराई थी. अपनी दूसरी शिकायत में इलियास ने बताया है कि पहली शिकायत पर एफआईआर दर्ज होने के बावजूद उन्होंने क्यों दूसरी शिकायत की.

19 मार्च को दर्ज अपनी दूसरी शिकायत में इलियास ने लिखा है, “मैंने साफ तौर पर बताया था कि एक बैग से अनिल स्वीट वाले ने बम निकाल कर मेरे घर पर मारा है और उसने मकान उड़ाया है. इसके बाद मैंने कई बार आशीष गर्ग जी से विनती करी थी भाई यह एफआईआर जो मैंने बताई थी वह है ही नहीं, तो वह बोला कि चुपचाप बैठ जा नहीं तो तुझे भी अभी 302 के मुकदमे में पैक कर दूंगा सारी अकल ठिकाने आ जाएगी.” दिल्ली पुलिस ने दूसरी शिकायत पर एफआईआर दर्ज नहीं की है.

3 मार्च को इलियास की शिकायत पर गोकुलपुरी पुलिस ने एफआईआर दर्ज की. एफआईआर में शिकायत है कि दंगाइयों ने दुकान लूटी और उसमें आग लगा दी. एफआईआर बताती है कि इसमें इलियास को तकरीबन आठ से नौ लाख रुपए का नुकसान हुआ. लेकिन इस एफआईआर में उन व्यक्तियों के नाम नहीं हैं जिनके नाम इलियास ने अपनी शिकायत में लिए थे और यह भी दर्ज नहीं है कि इलियास विस्फोटक का इस्तेमाल कर उनकी संपत्ति को उड़ा देने वाले शख्स को पहचानते हैं.

प्रभजीत सिंह स्वतंत्र पत्रकार हैं.

Keywords: Delhi Violence Dead and Buried Delhi Police bomb
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