अपनी ताजा फिल्म “विवेक” को लेकर आनंद पटवर्धन ने कहा- बोलने से खतरा हो सकता है, चुप्पी से तो “आत्मा की हत्या” हो जाएगी

08 अप्रैल 2019
साभार आनंद पटवर्धन
साभार आनंद पटवर्धन

जैसे-जैसे भारत 2019 के आम चुनाव की ओर बढ़ रहा है, ये खुद को एक चौराहे पर खड़ा पा रहा है. पिछले 5 सालों में एक धर्मनिरपेक्ष और बहुलतावादी लोकतंत्र के भारत के विचार को नरेंद्र मोदी की सत्तावादी सरकार ने बेहद कठिन चुनौती दी है. इसमें संघ परिवार का समर्थन शामिल है, क्योंकि संघ उग्रवादी हिंदू राष्ट्रवाद की तलवार लिए चलता है.

विकास के बावजूद बेरोजगारी 4 दशक पीछे चली गई है, ऐसे में अब ये साफ हो रहा है कि मोदी सरकार आर्थिक विकास के अपने वादे को निभाने में नाकाम रही है. लेकिन क्या इससे बीजेपी को अभी मिल रहे बहुसंख्यकों के समर्थन में कमी आएगी, ये देखना अभी बाकी है. कार्यकर्ता और फिल्मकार आनंद पटवर्धन की पिछली डॉक्यूमेंट्री “विवेक” देखने से पता चलता है कि अगर बीजेपी चुनाव हार भी जाती है तो भी हिंदुत्व का जुलूस थमने वाला नहीं है.

लगभग आधा दशक के समय में विवेक आठ भागों की भूमिका निभाता है. इसके सहारे हाल में हुए हिंदुत्व के उदय और उस खून के निशान को भी दिखाया गया है, जो इस उदय के दौरान खिंचा चला आया. फिल्म में नरेंद्र दाभोलकर और गोविंद पनसारे जैसे तर्कवादियों की हत्या को भी दिखाया गया है. वहीं, ये भी दिखाया गया है कि कैसे ये हत्याएं उग्रवादी हिंदू संगठन सनातन संस्था से जुड़ी थीं. गोरक्षा के नाम पर मुसलमानों और दलितों पर हुए हिंसक हमलों को भी दिखाया गया है और जाति आधारित भेदभाव की वजह से आत्महत्या का कदम उठाने वाले रोहित वेमुला के मामले को भी दिखाया गया है. इनके अलावा हिंसा की कई छोटी-बड़ी घटनाओं को दिखाया गया है जो वर्तमान के उथल-पुथल भरे माहौल से जुड़ी हैं.

जैसा कि फिल्म उन जख्मों को तलाशती है जो इस हिंसा ने भारत से सामूहिक चैतन्य पर छोड़ा है, इसमें एक ऐसा नागरिक और समाज समाने आता है जिसमें हिंदुत्व और हिंदू राष्ट्रवाद गहरे जाकर बैठा है. ऐसे में ये सोचना मुश्किल है कि इस विचारधारा को एक चुनाव भर में समाप्त किया जा सकता है. मार्च के अंत में मैंने पटवर्धन से फिल्म और इसकी थीम के बारे में बात की थी. उन्होंने कहा, “मैं उम्मीद करता हूं कि अगर आप में थोड़ी भी मानवता है तो ये आपको झंकझोर देगी. ऐसा इसलिए नहीं क्योंकि ये बहुत महान फिल्म है बल्कि जिस बारे में ये बात करती है वह सच होने के साथ दुखी करने वाला भी है.”

विस्वाक: फिल्म आठ भागों में हैं जिनमें कई सारी बातें हैं- इनमें हत्याएं, गाय के नाम पर हिंसा, हिंदू आतंकवाद और दलितों पर आत्याचार जैसी बातें शामिल हैं. यहां तक कि ये हिंदू दक्षिणपंथ के शिवाजी और वीडी सावरकर जैसे आदर्शों की विरासत का भी विश्लेषण करती है. भगवा से जुड़े इस विशाल कैनवास में क्या थीसिस समाया है?

विस्वाक गोवा स्थित स्वतंत्र पत्रकार हैं.

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