सरकारी संगीत ऐप "संगम" से हिंदू धर्म का प्रचार

10 अक्टूबर 2019
शाहिद तांत्रे/कारवां
शाहिद तांत्रे/कारवां

सरकारी संगीत ऐप संगम खोल कर देखें तो उसे उसमें “दुर्गा पूजा” शीर्षक वाला 14 गीतों का संग्रह दिखाई पड़ेगा. इस साल मई में भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने इस ऐप को लॉन्च किया था. मंत्रालय के अनुसार इस ऐप में 24 भारतीय भाषाओं में 2500 से ज्यादा भक्ति गीतों का संकलन है. दुर्गा पूजा वाले गीतों में मार्कण्डेय पुराण और अंबा अष्टकम के सप्तशती से लिए गए गीत हैं. अष्टकम आठ स्तोत्रों की श्रृंख्ला है जिसकी रचना का श्रेय आठवीं सदी के धर्म प्रचारक आदि शंकराचार्य को दिया जाता है. आदि शंकराचार्य ने वेदों की श्रेष्ठता और इनमें समस्त मानवीय ज्ञान के होने का प्रचार किया था. इस साल अगस्त में ऐप के पहले पेज में “श्री अमरनाथ यात्रा” नाम से 95 श्लोकों और भजनों को जोड़ा गया जिन्हें शंकर की शिवशतकम और ऋग्वेद से लिया गया है. इसी तरह कृष्ण जन्माष्टमी और गणेश चतुर्थी के भजनों को भी ऐप में संकलित किया गया है.

इस ऐप को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) ने अपनी विशेष परियोजना राष्ट्रीय संस्कृति ऑडियोवीजूअल आर्काइव (एनसीएए) के तहत तैयार किया है. यह आर्काइव अप्रैल 2014 में शुरू की गई और इसकी वेबसाइट के मुताबिक इसका लक्ष्य देश भर की संस्थाओं में उपलब्ध “भारतीय सांस्कृतिक विरासत की पहचान और उनका संरक्षण करना है” ताकि “लोगों तक इन सामग्रियों को पहुंचाया जा सके.” ऐप की परिकल्पना एनसीएए के “आउटरीच” कार्यक्रम के तहत की गई थी. और इस पर उपलब्ध सामग्री इसी परियोजना के डेटाबेस से ली गईं हैं.  आईजीएनसीए के मुताबिक, “संगम ऐप का उद्देश्य भारत और भारत के बाहर रहने वाले करोड़ों भक्तों की दैनिक पूजा का हिस्सा बनना है.” इसका लक्ष्य “टेक-सेवी पीढ़ी को भारतीय संस्कृति की मूल मान्यताओं की ओर आकर्षित करना है जो संस्कृत भाषा के मंत्रों, श्लोकों और हिंदी भाषा के दोहे, चालीसा और आरती की समृद्ध और वृहद विरासत से बनी है.” इस ऐप के बारे में आईजीएनसीए बताती है कि यह “हिंदुस्तानी, कर्नाटिक और लोक संगीत का मंच होने के साथ ही जैन धर्म, बुद्ध धर्म, सिख धर्म और इस्लाम धर्म के भक्ति गीतों, मंत्रों और श्लोकों का आर्काइव भी है.”

आईजीएनसीए और एनसीएए की उपर्युक्त घोषणाओं के बावजूद यह ऐप अपने घोषित उद्देश्य से मेल नहीं खाता. इस ऐप की अधिकांश सामग्री हिंदू धर्म से संबंधित है और केवल 23 गीत सूफी, जैन, बुद्ध और सिख धर्म  की श्रेणी में रखे गए हैं. इसके अलावा इसके मेटाडेटा में अन्य धर्मों से संबंधित जानकारियों में बड़ी गलतियां हैं. बुद्ध धर्म की पाली भाषा की प्रार्थना को सोलहवीं शताब्दी के कृष्ण भक्त संत सूरदास के साथ रखा गया है. ऐप में इस्लाम नाम की कोई श्रेणी ही नहीं है और ब्राह्मण परंपराओं और ग्रंथों पर विशेष जोर है. आईजीएनसीए की वेबसाइट के अनुसार, ऐप में वेदों, शंकराचार्य की मोह मुदगरा, जयदेव की गीत गोविंद, तुलसीदास की रामचरितमानस और थ्यागराजा की कीर्ति से संबंधित सामग्री है. लेकिन इस ऐप से भारत के अन्य धर्मों और आदिवासी परंपराओं और लोकगीत नदारद हैं.

परियोजना की रिपोर्ट के अनुसार, एनसीएए ने 15 सरकारी और इतनी ही गैर सरकारी संस्थाओं के साथ साझेदारी कर इस आर्काइव का डिजीटल डेटाबेस तैयार किया है और इसका प्रारंभिक लक्ष्य 30 हजार घंटों का ऑडियो-वीजूअल रिकार्ड तैयार करना है. यह एक पायलट परियोजना थी जिसे 31 मार्च 2018 तक पूरा किया जाना था लेकिन एनसीएए ने इसे तय तरीख से पहले पूरा कर लिया. इसका अनुमानित खर्च 10 करोड़ रुपए बताया गया है.

आंबेडकर ने लिखा था, “पुरुष सूक्त का सिद्धांत आपराधिक भावना से प्रेरित है और यह समाजद्रोही है क्योंकि इसका उद्देश्य एक वर्ग द्वारा अनैतिक तरीके से हासिल लाभ को बचाए रखना और अन्य वर्ग पर अन्यायपूर्ण व्यवस्था थोपना है.”

निलीना एम एस करवां की रिपोर्टिंग फेलो हैं.

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