"कोरोना से राज्य अकेले लड़ रहे हैं, केंद्र सरकार नहीं कर रही अतिरिक्त मदद", केरल के वित्त मंत्री थॉमस इसाक

08 अप्रैल 2020

कोविड-19 महामारी ज्यादातर राज्य सरकारों की वित्तीय रीढ़ तोड़ रही है, जो बढ़ते खर्च और राजस्व को हो रहे नुकसान को झेल रही हैं. इस कठिन समय में केरल के अर्थशास्त्री वित्त मंत्री थॉमस इसाक ने वरिष्ठ पत्रकार एंटो टी. जोसेफ को बताया कि केंद्र सरकार ने राज्यों को बजट राशि से अलग कोई धन आवंटित नहीं किया है और न ही उन्हें उधार लेने की अनुमति ही दी है. इसाक ने कहा कि केंद्र ने राज्यों को "महामारी से लड़ने के लिए कोई अतिरिक्त पैसा नहीं दिया है. यह निंदनीय है."

इसाक ने कहा कि महामारी के खिलाफ राज्यों का संघर्ष जीएसटी भुगतान करने में केंद्र की देरी से जटिल हो गया है. 2017 में जब पांच साल के लिए जीएसटी कानून लागू किया गया था तब जीएसटी के कार्यान्वयन के कारण राजस्व में किसी भी नुकसान के लिए राज्यों को मदद करने के लिए उपकर की स्थापना की गई थी. इसाक ने बताया कि केरल सरकार इस मामले में केंद्र के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की सोच रही है. वित्त मंत्री ने कहा कि वह इस बारे में अन्य वित्त मंत्रियों से समर्थन मांगेंगे.

एंटो टी. जोसेफ : राज्य सरकारों को वित्तीय रिजर्व में तेजी से हो रही कमी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है. आपके आकलन से लॉकडाउन के कारण राजस्व में कितनी गिरावट हुई है?

थॉमस इसाक : लॉकडाउन के कारण हमारा राजस्व संकलन सामान्य का लगभग 20 प्रतिशत होगा. लॉकडाउन में कोई भी जीएसटी राजस्व नहीं होता है. हमने लॉटरी बंद कर दी है. केरल में शराब की दुकानें बंद हैं. मोटर वाहनों की बिक्री नहीं हो रही है और भूमि का लेनदेन लगभग शून्य है.

भले ही लॉकडाउन में ढील दी जाती है लेकिन मुझे उम्मीद है कि आने वाले तीन महीनों में राजस्व सामान्य का आधा रह जाएगा. पहला, लॉकडाउन चौंका देने वाला रहा है. दो, लॉकडाउन को ढीला करने का मतलब यह नहीं है कि चीजें सामान्य होने जा रही हैं. मुझे नहीं पता कि उन सभी छोटी कंपनियों का क्या होने वाला है जो बंद हो गई हैं. पर्यटन जैसे क्षेत्र अब जल्द ठीक होने वाले नहीं हैं.

एंटो टी जोसेफ मुंबई के एक वरिष्ठ पत्रकार और ब्रिटिश शेवनिंग स्कॉलर हैं. उन्होंने लेखक, संपादक और स्तंभकार के रूप में डीएनए, इकोनॉमिक टाइम्स, द गार्डियन (यूके) और डेक्कन क्रॉनिकल ग्रुप के साथ काम किया है.

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