लॉकडाउन में गुजरा शादी का सीजन, बारातों में बैंड बजाने और घोड़ा बग्गी चलाने वालों की टूटी कमर

कोरोनावायरस के कारण, तड़क-भड़क के लिए विख्यात भारतीय शादियों में रौनक कम हो गई है और इसका असर शादियों के कारोबार से जुड़े लोगों पर पड़ा है. बारात में बजने वाले बैंड खामोश पड़े हैं.
प्रदीप गौर/ मिंट/ गैटी इमेजिस
कोरोनावायरस के कारण, तड़क-भड़क के लिए विख्यात भारतीय शादियों में रौनक कम हो गई है और इसका असर शादियों के कारोबार से जुड़े लोगों पर पड़ा है. बारात में बजने वाले बैंड खामोश पड़े हैं.
प्रदीप गौर/ मिंट/ गैटी इमेजिस

शामली के 16 कलाकरों वाले हीरा बैंड के मालिक 28 साल के गुलशेर अहमद को उनके पिता मास्टर सकील अहमद अक्सर बताते हैं कि उनके दादा-परदादा मुगलों की सेना में ढोल बजाया करते थे और पीढ़ी दर पीढ़ी हम लोग इसी काम को करते आए हैं. “मेरे दादा ने यही काम किया, मेरे पिता मास्टर सकील अहमद ने यही किया है और अब मैं भी यही कर रहा हूं.”

अहमद ने बताया कि उनके बैंड में 16 कलाकार काम करते हैं. “इन कलाकारों से एक साल का कॉन्ट्रैक्ट (अनुबंध) करना पड़ता है जो हर साल अगस्त में होता है और 31 जुलाई तक लागू रहता है. कलाकारों को आधा पैसा कॉन्ट्रैक्ट के समय ही देना होता है और बाकी का पैसा काम के दिनों में दिया जाता है.”

उन्होंने बताया कि पिछले साल नवंबर में उन्होंने कलाकरों को 2.5 लाख रुपए चुकाए थे और मार्च और जून में 2.5 लाख और देने के बाद उनके पास इतनी ही रकम बचने की उम्मीद थी. “इस रकम से हम साल भर का घर खर्च चलते,” उन्होंने बताया.

लेकिन इस साल यह सिलसिला टूट गया.

अहमद ने कहा, “इस सीजन में मेरे पास 15 बारातों की बुकिंग थी. हम चार भाई हैं और वे तीनों भी मेरे साथ काम करते हैं. घर में अम्मी है और मेरी शादी पिछले साल हुई थी लेकिन अब स्थिति यह है पत्नी के जेवर बेच कर खर्च चलाना पड़ रहा है.”

सुनील कश्यप कारवां में डाइवर्सिटी रिपोर्टिंग फेलो हैं.

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