कोरोना संकट के बीच राज्यों की आपसी तकरार से बढ़ सकती है महंगाई

11 अप्रैल 2020
लॉकडाउन की घोषणा के बाद आंध्र प्रदेश-तमिलनाडु सीमा पर वाहनों को रोकते स्वास्थ्य कर्मी और पुलिस.
अरुण शंकर/एएफपी/गैटी इमेजिस
लॉकडाउन की घोषणा के बाद आंध्र प्रदेश-तमिलनाडु सीमा पर वाहनों को रोकते स्वास्थ्य कर्मी और पुलिस.
अरुण शंकर/एएफपी/गैटी इमेजिस

कोविड-19 महामारी के दौरान केरल के दो पड़ोसी राज्य- कर्नाटक और तमिलनाडु- के साथ संबंध दो तरह के उदहारण पेश करते हैं. एक तरफ हमें राज्य सरकारों के मिलकर काम करने से होने वाले फादये नजर आते हैं तो दूसरी तरफ ऐसा न करने से होने वाली मानवीय और आर्थिक क्षति. केरल और कर्नाटक के बीच 21 मार्च से विवाद चल रहा है. उस दिन कर्नाटक ने घोषणा की थी कि वह अन्य राज्यों को जोड़ने वाली अपनी सभी सड़कें बंद कर रहा है. इस निर्णय ने उत्तर केरल के कासरगोड जिले के लोगों का मंगलुरु जाना अवरुद्ध कर दिया. यह कासरगोड के पास अच्छी स्वास्थ्य सुविधाओं वाली जगह है. इसके गंभीर परिणाम सामने आए और कम से कम दस मरीजो की बेकारण मौत हो गई क्योंकि उन्हें आवश्यक इलाज नहीं मिला.

दोनों राज्यों के बीच विवाद से व्यापार भी पूरी तरह रुक गया जिसके चलते किसानों और उपभोक्ताओं को नुकसान पहुंचा है. राज्यों के बीच व्यापार और परिवहन को अवरुद्ध करने के परिणामस्वरूप अन्य दूरगामी परिणाम भी हो सकते हैं, जैसे कि मुक्त व्यापार पर प्रतिबंध के कारण खाद्य सामग्री का महंगा होना. इस बीच केरल और तमिलनाडु सरकारों के बीच जारी सहयोग ने देशव्यापी लॉकडाउन में केरल में फंसे प्रवासी कामगारों को लाभ पहुंचाया है और व्यापार को सुचारू बनाए रखा है.

21 मार्च को कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिला प्रशासन ने मंगलुरु और केरल के कासरगोड के बीच तलपडी चेकपोस्ट पर सड़क पर मिट्टी से भरे ट्रक खड़े करके राष्ट्रीय राजमार्ग 66 को अवरुद्ध कर दिया. कसारगोड में छह रोगियों का कोविड-19 परीक्षण सकारात्मक आने के बाद राज्य सरकार ने यह निर्णय लिया. कासरगोड को तब केंद्र सरकार द्वारा महामारी के 10 हॉटस्पॉट में से एक घोषित किया गया था. केरल से कर्नाटक में घुसने के दो दर्जन अन्य स्थानों को भी ऐसे ही बंद कर दिया गया. 28 मार्च को मंगलुरु के एक अस्पताल में कासरगोड के एक बीमार रोगी की एम्बुलैंस को रोक देने से मृत्यु हो गई. उसी दिन केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर केंद्र सरकार से सड़क अवरोध खत्म करने के लिए हस्तक्षेप की मांग की.

1 अप्रैल को केरल उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को "यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि कर्नाटक द्वारा खड़े किए गए अवरोधक हटा दिए जाएं." अदालत का विचार था कि "किसी भी तरह की देरी से हमारे नागरिकों के बहुमूल्य जीवन की हानि हो सकती है." तब तक मंगलुरु तक पहुंचने की कोशिश में 7 मरीजों की मौत सड़क अवरोध के कारण हो गई थी, केरल में कोविड-19 से हुई कुल मौतों की संख्या अब तक दो हो चुकी थी. यह सब इसके बावजूद है कि 30 जनवरी तक ही राज्य में भारत का पहला कोविड-19 मामला दर्ज किया गया था.

कर्नाटक सरकार ने नाकाबंदी को उठाने से इनकार कर दिया. राज्य के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने कहा ऐसा करने का अर्थ "मौत को गले लगाना" होगा. येदियुरप्पा ने यह टिप्पणी इस घबराहट में की थी कि केरल के लोग दक्षिणी कर्नाटक की सीमित चिकित्सा सुविधाओं को भर रहे हैं. कर्नाटक सरकार ने केरल उच्च न्यायालय के आदेश को उच्चतम न्यायालय के समक्ष चुनौती दी. 7 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने महाधिवक्ता तुषार मेहता के यह कहने के बाद मामले का निपटारा हुआ कि केंद्र सरकार ने दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों की बातचीत कराई है और इस मुद्दे को हल कर लिया है.

एंटो टी जोसेफ मुंबई के एक वरिष्ठ पत्रकार और ब्रिटिश शेवनिंग स्कॉलर हैं. उन्होंने लेखक, संपादक और स्तंभकार के रूप में डीएनए, इकोनॉमिक टाइम्स, द गार्डियन (यूके) और डेक्कन क्रॉनिकल ग्रुप के साथ काम किया है.

Keywords: coronavirus lockdown coronavirus COVID-19 federalism
कमेंट