पहले से धीमी पड़ी देश की अर्थव्यवस्था को और कमजोर करेगा कोरोना लॉकडाउन

10 अप्रैल 2020
सीएमआईई के आंकड़ों के अनुसार बेरोजगारी दर जो 22 मार्च को 8.41 प्रतिशत थी 5 अप्रैल तक बढ़कर 23.38 प्रतिशत हो गई है.
अनुश्री फडणवीस/रॉयटर्स
सीएमआईई के आंकड़ों के अनुसार बेरोजगारी दर जो 22 मार्च को 8.41 प्रतिशत थी 5 अप्रैल तक बढ़कर 23.38 प्रतिशत हो गई है.
अनुश्री फडणवीस/रॉयटर्स

24 मार्च को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा घोषित 21 दिनों का देशव्यापी लॉकडाउन भारतीय अर्थव्यवस्था की मुश्किलें बढ़ा रहा है. इससे भारत में आर्थिक गतिविधियों के लगभग पूरी तरह बंद हो जाने के चलते देशभर में हजारों दिहाड़ी मजदूरों का भविष्य अनिश्चित हो गया है और रोजगार और नौकरी की सुरक्षा के लिए उनके रास्ते मंद पड़ गए हैं.

कई क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ने भारत के सकल घरेलू उत्पाद या जीडीपी विकास दर के अपने अनुमानों में संशोधन किया है. मूडीज को उम्मीद है कि वर्ष 2020 में भारत की जीडीपी दर 2.5 प्रतिशत रह सकती है. एक अन्य रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने कहा है कि वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए भारत की जीडीपी विकास दर 2 प्रतिशत रहने की संभावना है. यह दर पिछले 30 वर्षों की सबसे कम दर है. क्रिसिल रेटिंग ने वित्त वर्ष 2021 के लिए भारत की जीडीपी विकास दर को पहले के 5.2 प्रतिशत के अनुमास से घटाकर 3.5 प्रतिशत कर दिया है. केयर रेटिंग्स के अनुमान के मुताबिक, 21 दिन की लॉकडाउन अवधि के दौरान सभी उत्पादन गतिविधि का 80 प्रतिशत बंद रहने से अर्थव्यवस्था को दैनिक रूप से 35000 से 40000 करोड़ रुपए का नुकसान होगा. कुल मिलाकर यह नुकसान 6.3 लाख करोड़ से 7.2 लाख करोड़ रुपए के बीच होगा.

ताजा निवेश पर भी इसका बहुत बुरा असर हुआ है. सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी के आंकड़े बताते हैं कि दिसंबर 2019 में समाप्त होने वाली तिमाही की तुलना में मार्च 2020 में समाप्त तिमाही में नया निजी और सार्वजनिक निवेश 41 प्रतिशत घटकर 2.91 लाख करोड़ रह गया है. सीएमआईई के आंकड़ों से यह भी संकेत मिलता है कि इसी तिमाही में ठप पड़े निवेश का कुल मूल्य 13.9 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है जो 1995 के बाद से सबसे अधिक है. इस बीच, मजदूरों और श्रमिकों के लिए स्थिति निराशाजनक लगती है. सीएमआईई के आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2020 तक बेरोजगारी बढ़कर 8.7 प्रतिशत हो गई है जो पिछले 43 महीनों में सबसे अधिक बेरोजगारी दर है.

इस सप्ताह जारी कुछ आंकड़ों में सीएमआईई ने 22 मार्च से 5 अप्रैल तक की बेरोजगारी दर की गणना की है - इस अवधि में श्रम बल पर लॉकडाउन का बड़ा प्रभाव देखा गया है. आंकड़ों से पता चलता है कि बेरोजगारी दर जो 22 मार्च को 8.41 प्रतिशत थी 5 अप्रैल तक बढ़कर 23.38 प्रतिशत हो गई.

भारतीय अर्थव्यवस्था पर लॉकडाउन के प्रभाव को समझने के लिए, मैंने वित्त मंत्रालय के शोध संस्थान नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी या एनआईपीएफपी में फेलो राधिका पांडे से बात की. "भारतीय अर्थव्यवस्था पहले ही मंदी से गुजर रही थी और कोविड-19 के चलते पूर्ण लॉकडाउन के बाद तो निकट भविष्य में तीव्र रिकवरी की कोई भी संभावना नजर नहीं आती." उन्होंने कहा, "नोवेल कोरोनोवायरस के प्रभाव को शुरू में चीन से आयात में आए व्यवधान के कारण आपूर्ति के झटके के रूप में देखा जा रहा था लेकिन अब लॉकडाउन और सामाजिक दूरी के कारण यह झटका एक व्यापक-आधार वाली मांग तक विस्तारित हो गया है. लॉकडाउन की रोशनी में गैर-आवश्यक वस्तुओं की खपत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा. अनौपचारिक क्षेत्र इससे प्रभावित होगा और बहुत कम मार्जिन पर काम करने वाला एमएसएमई (मध्यम और लघु और सूक्ष्म उद्यम) क्षेत्र मांग में जबरदस्त कमी महसूस करेगा." उन्होंने कहा कि कोई भी इस "झटके के फैलाव" के बारे में नहीं जानता और जो विश्लेषण फिलहाल हो रहा है वह "बेवक्त" है. पांडे ने आगे कहा, “तकनीकी भाषा में कहें तो मंदी का अर्थ है नकारात्मक वृद्धि की दो तिमाहियां. हालांकि हम विकास में कमी देखेंगे. हालांकि जब लॉकडाउन खत्म होगा, तो संभावना है कि मांग वापस उछाल मारे. फिर भी, कोविड से पहले की स्थिति की तुलना में यह अधिक कठिन और अनिश्चित होगा."

कौशल श्रॉफ कारवां के स्‍टाफ राइटर हैं.

Keywords: COVID-19 economic slowdown coronavirus lockdown unemployment economic growth
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