भारत की विकास दर के अनुमानों पर आरबीआई के बदलते बोल

दास 2016 की नोटबंदी का प्रमुख चेहरा थे.
पुनीत परांजपे/ एएफपी/ गैटी इमेजिस
दास 2016 की नोटबंदी का प्रमुख चेहरा थे.
पुनीत परांजपे/ एएफपी/ गैटी इमेजिस

22 मई को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने भारत की आर्थिक स्थिति को "घेरती निराशा" के रूप में वर्णित किया. कोविड-19 से पहले भारत की सकल घरेलू उत्पाद का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, "सभी अनिश्चितताओं को देखते हुए 2020-21 में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि नकारात्मक रहने का अनुमान है, 2020-21 की एच 2 (दूसरी छमाही) से आगे कुछ गति पकड़ने का अनुमान है." एच 2 अक्टूबर से मार्च 2020-2021 की दूसरी छमाही को संदर्भित करता है.

जीडीपी एक महत्वपूर्ण आर्थिक पैरामीटर है. जबकि आरबीआई अपनी कार्यप्रणाली और प्रमुख अर्थशास्त्रियों के सर्वेक्षण का उपयोग कर जीडीपी में वृद्धि का अनुमान करता है, सरकार के अनुमानों की गणना राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा की जाती है. अपने ताजा संवाददाता सम्मेलन में, दास 2019-20 के लिए जीडीपी की वृद्धि के बारे में चुप रहे. लेकिन उन्होंने विस्तार से बताया कि कोविड​-19 लॉकडाउन ने देश में घरेलू आर्थिक गतिविधि को किस तरह से प्रभावित किया है.

“शीर्ष छह औद्योगिक राज्यों का कहना है कि औद्योगिक उत्पादन का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा लाल या नारंगी क्षेत्रों में हैं," उन्होंने कहा. “हाई-फ्रीक्वैंसी संकेतक मार्च 2020 में शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में मांग में गिरावट का संकेत देते हैं. ... कोविड-19 से सबसे बड़ा झटका निजी खपत को लगा है जो घरेलू मांग का लगभग 60 प्रतिशत है." दास इस बेचैनी को कम करने में अनिच्छुक लग रहे थे.

दास के लिए यह असामान्य था. उन्हें अपनी सार्वजनिक घोषणाओं में आशावादी माना जाता है. 2019-20 के लिए आरबीआई के जीडीपी में वृद्धि के अनुमानों में भी यही आशावाद परिलक्षित हुआ था. इतिहास में स्नातकोत्तर दास को दिसंबर 2018 में आरबीआई के गवर्नर के रूप में नियुक्त किया गया था. वह लगभग तीन दशकों में आरबीआई के ऐसे पहले गवर्नर हैं जो अर्थशास्त्र के क्षेत्र से बाहर के हैं. अपनी नियुक्ति से पहले, दास अगस्त 2015 से मई 2017 के बीच आर्थिक मामलों के सचिव थे. 2016 में जब नरेन्द्र मोदी ने नोटबंदी की घोषणा की थी तब भी वह सरकार के सा​थ मजबूती से खड़े थे. दास इस कदम का एक प्रमुख चेहरा बने. उन्होंने कई सार्वजनिक बयान दिए, सरकारी प्रेस कॉन्फ्रेंसें आयोजित कीं. अरुण जेटली, जो उस समय वित्त मंत्री थे, के साथ मिलकर काम करते हुए उन्होंने माल एवं सेवा कर (जीएसटी) का कानूनी मसौदा तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

एक महीने पहले 17 अप्रैल 2020 को, जब भारतीय अर्थव्यवस्था कोविड-19 महामारी के चलते किए गए लॉकडाउन के कारण लड़खड़ा रही थी, दास तब भी आशावादी थे. वर्ष 2020-2021 के लिए भारत की वृद्धि दर के बारे में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुमानों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा था, “भारत उन मुट्ठी भर देशों में से है जिन्हें 1.9 प्रतिशत की सकारात्मक वृद्धि से दस प्रतिशत तक चढ़ने का अनुमान है. वास्तव में, यह जी-20 अर्थव्यवस्थाओं के बीच उच्चतम विकास दर है.” उन्होंने कहा, "2021-22 में भारत के प्रक्षेपवक्र पर कोविड-पूर्व, मंदी-पूर्व के 7.4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ एक तेज बदलाव के साथ फिर से आगे बढ़ने की उम्मीद है."

एंटो टी जोसेफ मुंबई के एक वरिष्ठ पत्रकार और ब्रिटिश शेवनिंग स्कॉलर हैं. उन्होंने लेखक, संपादक और स्तंभकार के रूप में डीएनए, इकोनॉमिक टाइम्स, द गार्डियन (यूके) और डेक्कन क्रॉनिकल ग्रुप के साथ काम किया है.

Keywords: COVID-19 RBI Reserve Bank of India GDP economic growth
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