नोटबंदी और जीएसटी से कपड़ा उद्योग संकटग्रस्त : मिल एसोसिएशन उपाध्यक्ष

11 सितंबर 2019

मुकेश त्यागी उत्तर भारत कपड़ा मिल एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष हैं. यह छोटे, मझोले और बड़े कपड़ा उद्योगों का संगठन है. संगठन के मुताबिक सदस्यों का कुल सालाना व्यापार 50 हजार करोड़ रुपए से अधिक है. 20 अगस्त को समाचार पत्र इंडियन एक्सप्रेस में संगठन ने एक विज्ञापन प्रकाशित किया था जिसका शीर्षक था: भारतीय कपड़ा उद्योग पर सबसे बड़ा संकट, बड़ी संख्या में नौकरियां हो रहीं खत्म.

विज्ञापन के अनुसार जारी संकट के कारण भारत के एक तिहाई कपड़ा उद्योग बंद हो गए हैं और भारी मात्रा में नकदी घाटा हो रहा है. विज्ञापन में दावा है कि इस बार की कपास फसल के दौरान यह उद्योग 80 करोड़ रुपए का कपास नहीं खरीद सकेगा. संगठन ने जो तथ्यांक जारी किया, उसके मुताबिक इस साल अप्रैल और जून के बीच सूत का निर्यात पिछले साल की इसी अवधि से 35 प्रतिशत कम हो गया है. विज्ञापन कहता है कि भारतीय कपड़ा उद्योग में प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से 10 करोड़ से अधिक लोग जुड़े हैं और इसे सरकार के अविलंब हस्तक्षेप की दरकार है ताकि रोजगार में हो रही कमी से बचा जा सके और इस उद्योग को गैर-निष्पादित परिसंपत्ति या नॉन परफोर्मिंग असेट हो जाने से बचाया जा सके.

27 अगस्त को कारवां के स्टाफ राइटर सागर ने दिल्ली में त्यागी से बातचीत की. त्यागी ने कपड़ा उद्योग में जारी संकट के कारण और सरकार से अपेक्षित उपायों के बारे में बताया. उनका कहना था कि “नकदी का संकट नोटबंदी के चलते भी है. नोटबंदी से कपड़ा उद्योग में नकद का प्रवेश बंद हो गया.”

सागर : क्या आप कपड़ा उद्योग में जारी संकट के बारे में बताएंगे जिसका विज्ञापन आपने समाचार पत्र में प्रकाशित किया था?

मुकेश त्यागी : कच्चा माल खरीदने में समस्या हो रही है. इस उद्योग का मुख्य कच्चा माल कपास है. भारत में कपड़ा उत्पादन में 50 से 60 फीसदी कपास का प्रयोग होता है. हमारे देश की गिनती दुनिया के सबसे बड़े कपास उत्पादक देशों में होती है. क्योंकि कपास एक कृषि वस्तु है इसलिए इसकी बिकवाली में सरकार की भूमिका है. हमारे संकट का मुख्य कारण कपास के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 25 से 28 फीसदी की वृद्धि होना है. इससे पहले इतनी बड़ी वृद्धि एक बार में कभी नहीं की गई थी. यह उद्योग इस वृद्धि को वहन नहीं कर सकता. हमारी यह चिंता पिछले साल भी थी लेकिन हमें उम्मीद थी कि वैश्विक बाजार में कपास की कीमत में बढ़ोतरी होगी लेकिन पिछले चार से छह महीनों में वैश्विक बाजार में कीमतें बहुत गिरी हैं. इसलिए हमारे कपड़े का उत्पादन मूल्य बढ़ गया है और कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुरूप नहीं हैं.

सागर कारवां के स्‍टाफ राइटर हैं.

Keywords: textiles demonetisation GST MSP Cotton
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