वर्धा हिंदी विश्वविद्यालय ने कांशीराम की बरसी मनाने वाले बहुजन छात्रों को किया निष्कासित

14 अक्टूबर 2019
छात्रों ने दलितों और मुस्लिमों की लिंचिंग, कश्मीर में संचार पर जारी रोक और एनआरसी के नाम पर हो रही मनमानी सहित अन्य विषयों पर प्रधानमंत्री को पोस्ट कार्ड लिखे.
साभार : रजनीश अंबेडकर
छात्रों ने दलितों और मुस्लिमों की लिंचिंग, कश्मीर में संचार पर जारी रोक और एनआरसी के नाम पर हो रही मनमानी सहित अन्य विषयों पर प्रधानमंत्री को पोस्ट कार्ड लिखे.
साभार : रजनीश अंबेडकर

महाराष्ट्र के वर्धा जिले में स्थित महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय ने इस महीने की 9 तारीख को अपने छह छात्रों को निष्कासित कर दिया. इन छात्रों को बहुजन विचारक कांशीराम की बरसी के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित करने के कारण निकाला गया है. विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन पर बिना अनुमति के आयोजन करने का आरोप लगाया है. निकाले गए सभी छात्र दलित और ओबीसी समुदाय से हैं. निकाले गए छात्र चंदन सरोज ने दावा किया कि जब विश्वविद्यालय प्रशासन हमारी आवाज को नहीं दबा पाया तो “उसने हमें निकाल दिया.”

सरोज दलित हैं और विश्वविद्यालय से एमफिल कर रहे हैं. उनके मुताबिक कांशीराम की पुण्यतिथि के अवसर पर पिछले साल भी एक कार्यक्रम हुआ था लेकिन पहले कभी भी अनुमति लेने को नहीं कहा गया. सरोज ने बताया कि कांशीराम की पुण्यतिथि पर यह कार्यक्रम इसलिए हो रहा था क्योंकि देशभर में हुई लिंचिंग की सभी घटनाओं में दलित और बहुजनों को निशाना बनाया गया है. सरोज ने दावा किया, “जिन लोगों ने हमें कार्यक्रम करने से रोका उन पर संघ और सरकार का दबाव है.” उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालय के वर्तमान उपकुलपति आरएसएस से जुड़े हैं.

निकाले गए छात्र सरोज, नीरज कुमार, रजनीश अंबेडकर, पंकज वेला और वैभव पिंपलकर ने 49 हस्तियों पर बिहार पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज करने के खिलाफ प्रदर्शन भी किया था. अक्टूबर माह में इन हस्तियों ने भारत में बढ़ते मॉब लिंचिंग के मामलों के बारे में प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखा था. जब विश्वविद्यालय प्रशासन को इस बारे में पता चला तो उसने छात्रों को कार्यक्रम करने की अनुमति नहीं दी. सरोज का कहना था, “जब हमने प्रशासन से कहा कि प्रधानमंत्री को पत्र लिखना लोगों का संवैधानिक अधिकार है तो उनका जवाब था कि छात्रों को भी इसके लिए औपचारिक अनुमति लेनी होगी.

7 अक्टूबर को छात्रों ने इस प्रदर्शन के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन से अनुमति मांगी थी लेकिन प्रशासन ने इसे तुरंत खारिज कर दिया. रजिस्ट्रार कार्यालय ने अपने नोटिस में कहा था कि विश्वविद्यालय परिसर के अंदर प्रदर्शन निषेध है. दो दिन बाद कांशीराम की पुण्यतिथि पर छात्रों ने प्रदर्शन करने की दुबारा अनुमति मांगी. विश्वविद्यालय प्रशासन ने नोटिस निकालकर इसकी अनुमति देने से इनकार कर दिया. दूसरे दिन तकरीबन डेढ़ सौ छात्रों ने विश्वविद्यालय के गांधी हिल में इकट्ठा होकर विरोध प्रदर्शन किया. जब छात्र उस जगह जाने लगे जहां वे पहले प्रदर्शन करना चाहते थे, तब वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोक लिया. छात्रों ने गांधी हिल पर बैठकर ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम पोस्ट कार्ड लिखे.

जो लोग संविधान पर विश्वास करते हैं, सामाजिक न्याय की बात करते हैं और वैज्ञानिक और तार्किक सोच रखते हैं उनका दमन हो रहा है.

आतिरा कोनिक्करा करवां की रिपोर्टिंग फेलो हैं.

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