We’re glad this article found its way to you. If you’re not a subscriber, we’d love for you to consider subscribing—your support helps make this journalism possible. Either way, we hope you enjoy the read. Click to subscribe: subscribing
13 जनवरी, 2026 को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति, लिंग और धर्म आधारित भेदभाव को रोकने के लिए नए नियम जारी किए. 2012 के नियमों की जगह जारी किए गए इन नियमों में सभी कॉलेजों में समानता बनाए रखने के लिए अनिवार्य 'इक्विटी सेल' और ओबीसी छात्रों के लिए सुरक्षा का प्रावधान किया गया है. इन नियमों के जारी होते ही पूरे देश में हंगामा मच गया. उच्च जाति के छात्रों ने इनके दुरुपयोग और असमानता के बढ़ने की आशंका जताते हुए विरोध प्रदर्शन किए, जबकि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग ने इन नियमों को अपने ख़िलाफ़ होने वाले भेदभाव से बचाव का एक महत्वपूर्ण कदम बताया. इन नियमों को बाद में सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई और 29 जनवरी, 2026 को इन पर फ़िलहाल के लिए रोक लगा दी गई.
महाराष्ट्र के वर्धा स्थित महात्मा गांधी अंतररार्ष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय ने आरती कुमारी के डॉक्टरेट थीसिस जमा करने के एक महीने बाद जुलाई 2018 में उन्हें और चार अन्य छात्रों को निलंबित कर दिया था. विश्वविद्यालय ने कहा कि यह कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि उन पर भारतीय दंड संहिता की गंभीर धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे, जिनमें स्वेच्छा से किसी महिला का गर्भपात कराना भी शामिल है.
आरती ने मुझे बताया, ‘उन्होंने हमारी बात तक नहीं सुनी. मेरी पीएचडी का मूल्यांकन रोक दिया गया, जबकि हमने बार-बार बताया कि यह एक झूठा मामला था. कुलपति ने हमसे मिलने से भी इनकार कर दिया.’ सितंबर तक मामला ख़ारिज कर दिया और निलंबन भी रद्द कर दिया गया. लेकिन आरती की मुश्किलें ख़त्म नहीं हुईं. उन्होंने बताया कि उनकी थीसिस दो बार बिना कोई कारण बताए विभाग को वापस भेज दी गई और उनकी डॉक्टरेट की उपाधि अधर में लटकी रही. उस समय तक आरती का विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ टकराव इतना बढ़ चुका था कि उन्हें प्रशासन की बात पर बहुत भरोसा नहीं रह गया था.
Thanks for reading till the end. If you valued this piece, and you're already a subscriber, consider contributing to keep us afloat—so more readers can access work like this. Click to make a contribution: Contribute