नोएडा में राशन वितरण में राजनीति, चुनाव वाले राज्यों के लोगों को दिया जा रहा अनाज, यूपी वालों को कहा जा रहा पहले राशन कार्ड बनाओ

23 अप्रैल 2020 को नई दिल्ली में नोवेल कोरोनावायरस बीमारी के प्रसार को धीमा करने के लिए देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान राशन के इंतजार में खड़ी एक औरत. महामारी के दौरान सरकार से प्राप्त सहायता पाने में नोएडा में एक झुग्गी में रहने वाले वाल्मीकि समुदाय के सदस्यों को नियमित आपूर्ति प्राप्त करने के लिए पहले राशन कार्ड बनवाने के लिए मजबूर किया जा रहा है.
दानिश सिद्दीकी / रॉयटर्स
23 अप्रैल 2020 को नई दिल्ली में नोवेल कोरोनावायरस बीमारी के प्रसार को धीमा करने के लिए देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान राशन के इंतजार में खड़ी एक औरत. महामारी के दौरान सरकार से प्राप्त सहायता पाने में नोएडा में एक झुग्गी में रहने वाले वाल्मीकि समुदाय के सदस्यों को नियमित आपूर्ति प्राप्त करने के लिए पहले राशन कार्ड बनवाने के लिए मजबूर किया जा रहा है.
दानिश सिद्दीकी / रॉयटर्स

10 जून को उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर या नोएडा के सेक्टर 8 की एक झुग्गी में रहने वाले वाल्मीकि समाज के लोगों ने बताया कि मार्च 25 को शुरू हुए लॉकडाउन से अब तक नोएडा अथॉरिटी ने इस इलाके में केवल तीन बार राशन बांटा है. इन लोगों ने मुझे बताया कि अधिकारियों ने उनसे राशन कार्ड मांगे थे जबकि ऐसी कोई शर्त इसी इलाके में रहने वाले बिहार और पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए नहीं है.

डेमोक्रेटिक आउटरीच फॉर सोशल ट्रांसफॉरमेशन (दोस्त) के एक प्रतिनिधि ने उपरोक्त बात की पुष्टि की. यह संस्था नोएडा प्राधिकरण के साथ मिलकर लॉकडाउन के दौरान राशन वितरण में सहयोग कर रही है. सूरज सुधाकर इस संस्था के सेक्टर 8  में जारी राहत कार्य के इंचार्ज हैं. सुधाकर ने मुझसे कहा, “हमने सोचा कि लोगों को तुरंत राशन देने से अच्छा होगा कि उनके लिए राशन कार्ड बनवा कर स्थाई समाधान निकाला जाए.”

वाल्मीकि समाज पर राशन कार्ड के लिए आवेदन करने का दबाव डाला जा रहा है जबकि राज्य सरकार ने तय किया है कि 30 जून से वह सार्वजनिक वितरण प्रणाली को वैश्विक करेगी. 17 अप्रैल को एक प्रेस रिलीज में राज्य सरकार के इस निर्णय की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री अजय सिंह बिष्ट या आदित्यनाथ ने कहा था कि इससे यह सुनिश्चित होगा कि जरूरतमंद को निशुल्क राशन मिले, फिर चाहे उसके पास राशन कार्ड या आधार कार्ड हो या ना हो.

परिणाम स्वरूप वाल्मीकि समुदाय के पास राशन कार्ड के बिना आपूर्ति प्राप्त करने के बहुत कम रास्ते हैं. एक हस्तलिखित पत्र में 14 अप्रैल को झुग्गी के लोगों ने गौतमबुद्ध नगर के जिला मजिस्ट्रेट सुहास लालिनाकेरे यथिराज को राशन की कमी की सूचना दी थी. उस पत्र में लिखा था कि करीब 250 से 300 वाल्मीकि परिवारों को राशन कार्ड की जरूरत है और इन लोगों को बहुत सारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. उस पत्र में करीब 150 लोगों के फोन नंबर भी थे ताकि यदि सरकार राशन वितरण के प्रयास को तीव्र करना चाहे तो लोगों से संपर्क कर ले. इनमें से 20 लोगों से मैंने बात की. इन लोगों ने मुझे बताया कि वितरण के काम में असंगति है. इन लोगों ने बताया कि स्थानीय स्तर पर राशन खरीदना संभव नहीं हो पा रहा है क्योंकि यह इलाका लंबे समय से कंटेनमेंट जोन में आता है और लोगों की बचत भी खत्म हो गई है. कुछ लोगों ने कहा कि उन्होंने सरकारी अधिकारियों को भोजन बांटते देखा है लेकिन वह बहुत अपर्याप्त था.

मैंने यथिराज को इस संबंध में सवाल भेजे थे लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया. इस क्षेत्र के विधायक पंकज सिंह के एक स्टाफ कर्मचारी ने नाम ना लिखने की शर्त पर आपूर्ति में कमी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि “सरकार प्रत्येक व्यक्ति को जरूरत के हिसाब से राशन उपलब्ध करा रही है.”

आतिरा कोनिक्करा करवां की रिपोर्टिंग फेलो हैं.

Keywords: COVID-19 coronavirus lockdown coronavirus Yogi Adityanath
कमेंट