“कश्मीर में जो हो रहा है वह क्रूर, अलोकतांत्रिक और मानवाधिकरों का उल्लंघन है”, राष्ट्र संघ के विशेष प्रतिवेदक डेविड के

30 अगस्त 2019
बुरहान ओबजिलविची/एपी
बुरहान ओबजिलविची/एपी

3 सप्ताह से भी अधिक समय गुजर चुका है और कश्मीर में संचार पर अभी भी रोक जारी है. इंटरनेट बंद है और मोबाइल फोन नेटवर्क निलंबित है. इसके साथ, कश्मीरी और केबल टीवी सेवा बाधित है. 5 अगस्त को नरेन्द्र मोदी सरकार ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत कश्मीर को मिले विशेष दर्जे को हटा लिया था. इसके बाद से ही घाटी में सुरक्षा बलों की भारी तैनाती है. 22 अगस्त को संयुक्त राष्ट्र मानव अधिकार के 5 विशेषज्ञों के एक समूह ने वक्तव्य जारी कर भारत सरकार को अभिव्यक्ति की आजादी, सूचना और कश्मीर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दमन को बंद करने की अपील की थी.

डेविड के संयुक्त राष्ट्र संघ के विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा और प्रोत्साहन के विशेष प्रतिवेदक हैं. उपरोक्त वक्तव्य में उनके भी हस्ताक्षर हैं. कारवां की रिपोर्टिंग फेलो निलीना एम एस ने कश्मीर के हालातों पर उनसे बात की. काये का मानना है कि भारत सरकार का यह कदम “कश्मीर और संपूर्ण भारत की जनता के लिए नुकसानदायक है.”

निलीना एम एस : कश्मीर मामले पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भाषण की प्रतिक्रिया में आपने ट्वीट किया था कि पिछले साल जुलाई में आपने कश्मीर में अभिव्यक्ति की आजादी की स्थिति की समीक्षा के लिए भ्रमण करने की औपचारिक अनुमति भारत सरकार से मांगी थी. क्या आप ऐसी समीक्षा में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया के बारे में हमें विस्तार से बताएंगे?

डेविड काये : संयुक्त राष्ट्र संघ के विशेष प्रतिवेदक का एक नियमित काम सदस्य देशों का भ्रमण करना है. जिसकी रिपोर्ट हम राष्ट्र संघ मानव अधिकार परिषद को देते हैं. ऐसी यात्राओं के लिए हमें सरकार से दरख्वास्त करनी होती है. सरकार को इसकी स्वीकृति देनी होती है और यात्रा की तारीख तय की जाती है. मैं ऐसी दरख्वास्त हमेशा करता रहता हूं. मैं हर साल ऐसी कई यात्राएं करता हूं.

भारत सरकार से मेरी दरख्वास्त अन्य देशों से की जाने वाली ऐसी मांगों से अलग नहीं है. मैं इन यात्राओं में बहुत सारे काम करता हूं. कानूनी दायरे में ऑनलाइन अथवा ऑफलाइन रूप में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को प्रोत्साहित करने की समीक्षा करता हूं. मैं इनके लिए जो नियम हैं उनके कार्यान्वयन की जांच करता हूं. इस प्रक्रिया में मैं सरकार और सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और पत्रकारों और प्रसारणकर्ताओं से मुक्त और साथ ही स्वतंत्र इंटरनेट के प्रोत्साहन के लिए जिम्मेदार एजेंसियों और विभागों से गंभीर अंतरक्रिया करता हूं. इस प्रक्रिया के तहत मैं कानून को लागू करने वाली संस्थाओं से बातचीत करता हूं. उदाहरण के लिए इंटरनेट के इस्तेमाल और ऐसी रिपोर्टिंग जिनसे हिंसा का खतरा हो, पर बातचीत करता हूं.

निलीना एम एस करवां की रिपोर्टिंग फेलो हैं.

Keywords: United Nations freedom of expression Kashmir Manzar Human Right Narendra Modi UN Security Council
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