नेपाल ने लगाई भारतीय नोटों पर रोक, पुराने नोट न बदलने पर लिया फैसला?

15 जनवरी 2019
तमाम आश्वासनों के बावजूद भारत ने पुराने नोट नहीं बदले हैं. नए नोट पर रोक लगा कर नेपाल बना रहा दबाव.
अमित दवे/रॉयटर्स
तमाम आश्वासनों के बावजूद भारत ने पुराने नोट नहीं बदले हैं. नए नोट पर रोक लगा कर नेपाल बना रहा दबाव.
अमित दवे/रॉयटर्स

13 दिसंबर को नेपाल के मंत्री परिषद ने 200, 500 और 2000 रुपए के भारतीय नोटों पर रोक लगाने का फैसला किया. फैसले के बाद सरकार के प्रवक्ता और संचार मंत्री गोकुल बांस्कोटा ने इसकी जानकारी मीडिया को दी.

8 नवंबर 2016 को भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘नोटबंदी’ की घोषणा का नेपाल पर बुरा असर पड़ा था. इस दौरान भारत में मजदूरी कर रहे नेपाली ही नहीं बल्कि नेपाल के बड़े व्यापारियों के पास रखे पुराने नोटों को भी नहीं बदला गया. नेपाल के केंद्रीय बैंक, नेपाल राष्ट्र बैंक, के पास करोड़ों रुपए के पुराने भारतीय नोट हैं. इसके अलावा भारत में काम करने वाले नेपालियों और सीमा पार व्यवसाय करने वाले व्यापारियों एवं सीमा क्षेत्र के लोगों के पास बड़ी मात्रा में पुराने भारतीय नोट होने का अनुमान है.

माना जा रहा है कि नोटबंदी के बाद पुराने नोटों को न बदलने के कारण नेपाल सरकार ने भारत के नए नोटों पर प्रतिबंध लगाया है. एक पत्रकार सम्मेलन में संचार मंत्री बांस्कोटा ने भी इस तरफ इशारा किया था.

प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा, ‘‘पूर्व में भारत द्वारा जारी नोटों को चलाया जा रहा था लेकिन नोटबंदी के बाद नेपाल में उपलब्ध भारतीय नोटों को नहीं बदला गया. जो नोट हम वहां से लाए थे जब उन नोटों को भी नहीं बदला गया तो हमें सतर्क होना पड़ रहा है और जनता को सतर्क करना सरकार का दायित्व है.’’

अप्रैल 2018 में नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने भारत की यात्रा की थी. यात्रा से पहले संसद को दिए अपने वक्तव्य में ओली ने कहा था, ''भारत सरकार के नोटबंदी के निर्णय से नेपाली नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ा है. मैं भारतीय नेताओं के साथ अपनी बातचीत में इस मसले पर चर्चा कर समस्या को हल करने का अनुरोध करूंगा.'' इस आश्वासन के बावजूद दोनों देशों के साझा वक्तव्य में इसका जिक्र नहीं है.

रोहेज खतिवडा नयॉं पत्रिका दैनिक से जुड़े हैं और सेतोपाटी डॉट कॉम में काम कर चुके हैं.

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