छत्तीसगढ़ में कल्लूरी की वापसी चिंता की बात : हिमांशु कुमार

10 जनवरी 2019
छत्तीसगढ़ का बड़े पैमाने पर सैन्यकरण हुआ है. अर्धसैनिक बलों की तैनाती से स्थानीय प्रशासन दोयम दर्जे का हो गया और पूरा दबदबा सैन्य अधिकारियों का हो गया है.
इंडिया फोटो एजेंसी
छत्तीसगढ़ का बड़े पैमाने पर सैन्यकरण हुआ है. अर्धसैनिक बलों की तैनाती से स्थानीय प्रशासन दोयम दर्जे का हो गया और पूरा दबदबा सैन्य अधिकारियों का हो गया है.
इंडिया फोटो एजेंसी

छत्तीसगढ़ में जीत के बाद कांग्रेस पार्टी ने कई प्रशासनिक बदलाव किए हैं. इनमें सबसे चौंकाने वाला फैसला मानव अधिकारों के ​उल्लंघन के लिए बदनाम आईपीएस अधिकारी एस. आर. पी. कल्लूरी को छत्तीसगढ़ राज्य की आर्थिक अपराध शाखा और भ्रष्टाचार रोधी विभाग का प्रमुख बना दिया जाना है. फरवरी 2017 में छत्तीसगढ़ सरकार ने आईजी कल्लूरी को छुट्टी पर भेज दिया था. मानवाधिकार कार्यकर्ता कल्लूरी पर अधिकारों के ​हनन और गैर कानूनी हत्याओं को संरक्षण देने का आरोप लगाते रहे हैं.

2009 में जब कल्लूरी एसएसपी थे तब गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता हिंमाशु कुमार के आश्रम पर पुलिस ने बुलडोजर चला दिया था और उन्हें मजबूर हो कर छत्तीसगढ़ छोड़ना पड़ा. कारवां से बातचीत में हिमांशु कुमार ने बताया कि कांग्रेस जब विपक्ष में थी तब वह कल्लूरी को जेल भेजने की बात करती थी और सत्ता में आते ही उन्हें सम्मानित कर रही है.

कारवां ने कांग्रेस की जीत के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति और माओवादियों के साथ वार्ता की संभावना पर हिमांशु कुमार से बात की.

कारवां- मानवाधिकारों के मामले में बदनाम आईपीएस अधिकारी एस. आर. पी. कल्लूरी को छत्तीसगढ़ राज्य की आर्थिक अपराध शाखा और भ्रष्टाचार रोधी शाखा का प्रमुख बना दिया गया है. मुख्यमंत्री भुपेश बघेल जब विपक्ष में थे तो कल्लूरी को जेल भिजवाने की बात करते थे. इस बदलाव को आप कैसे देख रहे हैं?

हिमांशु कुमार- नई सरकार से हम सबको बहुत उम्मीदें है और सारी उम्मीद अभी टूटी भी नहीं हैं. हालांकि यह फैसला हैरान और चिंतित करने वाला है. मानवाधिकारों के लिए बदनाम अधिकारी कल्लूरी को बहुत बड़ी जिम्मेदारी वाले पद पर नियुक्त किया गया. कल्लूरी के बारे में कांग्रेस खुद कहती रही कि उन्हें जेल में होना चाहिए. यहां तक कि बीजेपी ने उन्हें पद से हटा दिया था. राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग उनको तलब कर चुका है लेकिन उन्होंने हाजिर होना जरूरी नहीं समझा. यह उनके बारे में बहुत कुछ बताता है. ऐसे आदमी को एंटी करपशन ब्यूरो का चीफ बना देना मानवाधिकारवादियों और आंदोलनकारियों के लिए बहुत चिंता की बात है.

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