बीडाक्विलिन दवा के दान पर निर्भर भारत, खुराक से वंचित टीबी मरीज

28 अगस्त 2019
दुनिया में सबसे अधिक क्षय रोगी भारत में हैं. 2017 में दुनिया भर के देशों में इस रोग के जो एक करोड़ नए मामले प्रकाश में आए थे उनमें से 28 लाख केवल भारत में थे.
राजेश कुमार सिंह/एपी
दुनिया में सबसे अधिक क्षय रोगी भारत में हैं. 2017 में दुनिया भर के देशों में इस रोग के जो एक करोड़ नए मामले प्रकाश में आए थे उनमें से 28 लाख केवल भारत में थे.
राजेश कुमार सिंह/एपी

24 मार्च 2016 को विश्व क्षय रोग (टीबी या तपेदिक रोग) दिवस के अवसर पर तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने भारत में बीडाक्विलिन खुराक लांच करने की घोषणा की. बीडाक्विलिन टीबी प्रतिरोधी नई औषधि है जो ऐसे रोगियों के इलाज में सक्षम है जिन पर अन्य औषधि का असर नहीं होता. सरकार ने घोषणा की कि वह यह औषधि क्षय रोग उन्मूलन के राष्ट्रीय कार्यक्रम के अंतर्गत निशुल्क वितरण करेगी.

दुनिया में सबसे अधिक क्षय रोगी भारत में हैं. 2017 में दुनिया भर के देशों में इस रोग के जो एक करोड़ नए मामले प्रकाश में आए थे उनमें से 28 लाख केवल भारत में हैं. साथ ही भारत में डीआर-टीबी रोगियों की संख्या भी सबसे अधिक है. यह इस रोग का नया रूप है. ऐसे रोगियों पर शक्तिशाली एंटीबायोटिक्स का भी असर नहीं होता. जब किसी टीबी रोगी पर दो सबसे शक्तिशाली एंटीबायोटिक का असर होना बंद हो जाता है तो इसे मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट टीबी या एमडीआर-टीबी कहते हैं.

2012 में संयुक्त राज्य अमेरिका की स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग की एजेंसी, फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने डीआर-टीबी के उपचार के लिए बीडाक्विलिन को मंजूरी दी. इस वैश्विक महामारी को रोकने के लिए भारत में बीडाक्विलिन खुराक की उपलब्धता जरूरी थी. नड्डा की उपरोक्त घोषणा को विश्व भर में गंभीरता से देखा गया.

भारत इस खुराक को बीडाक्विलिन उपहार कार्यक्रम से हासिल कर रहा है जो यूनाइटेड स्टेट्स एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट और अमेरिका की बड़ी फार्मा कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन का संयुक्त कार्यक्रम है. जॉनसन एंड जॉनसन के पास इस औषधि का पेटेंट है. दिसंबर 2014 में जॉनसन एंड जॉनसन ने घोषणा की कि उसकी सहायक कंपनी जेंससेन फार्मास्यूटिकल्स अगले 4 सालों में मध्यम आय वाले देशों को 30 मिलियन डॉलर की बीडाक्विलिन दान करेगी. मार्च 2019 तक भारत को बीडाक्विलिन की 10 हजार खुराक प्राप्त हुई हैं इसके अलावा अप्रैल में कंपनी ने भारत को अतिरिक्त 10 हजार खुराक उपहार दी है.

बीडाक्विलिन लांच के 3 साल बाद सूचना के अधिकार कानून के तहत प्राप्त जानकारियों से पता चलता है कि इस औषधि को हासिल करने के नियमों के बारे में भारत सरकार का स्वास्थ्य मंत्रालय स्पष्ट नहीं है. जून 2019 में मैंने स्वास्थ्य मंत्रालय में सूचना के कानून के तहत कई आवेदन किए. स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया है कि उसने यूएसएड और जॉनसन एंड जॉनसन के साथ किसी तरह के समझदारी पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर नहीं किया है. साथ ही मंत्रालय ने उपहार कार्यक्रम पर हस्ताक्षर के वक्त किसी तरह का टर्म ऑफ रिफरेंस तैयार नहीं किया था. आरटीआई के जवाब और सार्वजनिक दस्तावेजों से पता चलता है कि बीडाक्विलिन को भारत में उपलब्ध कराने के लिए जिस एकमात्र कागज पर हस्ताक्षर हुआ है वह है 2015 की जनवरी में जेंससेन को मिला निर्यात का लाइसेंस.

विद्या कृष्णन स्वास्थ्य मामलों की पत्रकार हैं और गोवा में रहती हैं. एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस और वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा पर उनकी पहली किताब 2020 में प्रकाशित होगी.

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