बेंगलुरु का बढ़ता कोविड-19 संकट, जैसे पिचकारी से बुझाई जा रही हो जंगल की आग

28 अप्रैल 2021 को बेंगलुरु में एक ऑक्सीजन रिफिल करने वाले केंद्र के अंदर अपने ऑक्सीजन सिलेंडर को भरने के लिए इंतजार करते लोग.
अभिषेक चिन्नप्पा / गैटी इमेजिस
28 अप्रैल 2021 को बेंगलुरु में एक ऑक्सीजन रिफिल करने वाले केंद्र के अंदर अपने ऑक्सीजन सिलेंडर को भरने के लिए इंतजार करते लोग.
अभिषेक चिन्नप्पा / गैटी इमेजिस

19 अप्रैल को बेंगलुरु शहरी जिले के अनेकल में स्थित अथरेया अस्पताल के प्रमुख नारायणस्वामी ने सरकार, स्वास्थ्य अधिकारियों, ऑक्सीजन आपूर्तिकर्ताओं और मीडिया को चेताया कि उनके अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी हो रही है और उनके रोगी, जिनमें से कई कोविड​-19 के गंभीर मरीज थे, बिना इसके जिंदा नहीं रह पाएंगे. “मेरे पास आठ मरीज हैं जिनकी हालत बहुत गंभीर है और उनके परिवार के सदस्य मेरे पैरों में गिरकर किसी भी कीमत पर उन्हें बचा लेने के लिए कह रहे हैं. लेकिन मैं असहाय हूं और कुछ नहीं कर सकता,” नारायणस्वामी, जो अनेकल में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं, ने यह बात बैंगलोर मिरर के संवाददाताओं से कही थी.

जब नारायणस्वामी फोन पर ऑक्सीजन के लिए अपील कर रहे थे तो एक 69 वर्षीय कोविड-19 रोगी ने उनकी बात सुन ली और जब वह उस आदमी का ऑक्सीजन सिलेंडर बदलने के लिए आए तो रोगी खाली सिलेंडर से चिपक गया. वह सिलेंडर छोड़ने को राजी नहीं था. नारायणस्वामी ने कहा, “उसे लगा कि मैं किसी दूसरे मरीज को देने के लिए उसका ऑक्सीजन छीन रहा हूं. मुझे उसे समझाना पड़ा लेकिन वह सुनने को तैयार नहीं था. हालत यह थी ​​कि उसका ऑक्सीजन स्तर गिरकर 70 से 65 हो रहा था. बस फिर मैं टूट गया.”

नारायणस्वामी के फोन कॉल के लगभग 24 घंटे बाद 20 अप्रैल की दोपहर में जिला स्वास्थ्य और सरकारी अधिकारियों ने अथरेया अस्पताल का दौरा किया. उन्होंने नारायणस्वामी को आश्वासन दिया कि वह अनेकल के अस्पतालों के लिए ऑक्सीजन की व्यवस्था कर देंगे. उन्होंने याद किया कि एक अधिकारी ने उनसे कहा, “जो कुछ भी हो रहा है उसके बावजूद हमें मरीजों के परिवारों को चिंता में नहीं डालना चाहिए. हमें घबराहट से बचना चाहिए ... भले ही हमारी जेब में कुछ न हो, हमें कहना चाहिए कि हमारी जेब भरी हुई है.”

स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ हुई बैठक के तुरंत बाद नारायणस्वामी ने अपने एक कर्मचारी को सिलेंडर रिफिल कराने के लिए सरकार द्वारा अनुशंसित आपूर्तिकर्ताओं के पास भेजा. आपूर्तिकर्ता के पास जाने वाले ट्रक में अथरेया अस्पताल सहित क्षेत्र के विभिन्न अस्पतालों के 72 खाली सिलेंडर थे. नारायणस्वामी ने पाया कि सिलिंडर रिफिल करने में आपूर्तिकर्ता आनाकानी कर रहे हैं और सरकारी अधिकारी इसका कोई जवाब नहीं दे रहे. नारायणस्वामी ने कहा, “आधी रात तक उनमें से कोई भी कॉल नहीं उठा रहा था. मैंने फिर से कॉल करना शुरू कर दिया. हर जगह संदेश भेजना शुरू कर दिया. मैंने वही हंगामा शुरू कर दिया. फिर जब हालात बेकाबू हो गए तो उनका जवाब मिला.” आखिरकार आधी रात के कुछ घंटे बाद अथरेया अस्पताल में ऑक्सीजन पहुंची लेकिन तब तक उस 69 वर्षीय रोगी के लिए बहुत देर हो चुकी थी. अल सुबह ही उसकी मृत्यु हो गई. नारायणस्वामी ने कहा, “मैं आपको ईमानदारी से बता रहा हूं कि हमारे पास निर्बाध रूप से ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं है. अगर बिना रुकावट आपूर्ति होती रहती तो शायद उसे बचाया जा सकता था.”

मैंने बेंगलुरु के छोटे और मध्यम आकार के निजी और सार्वजिनक अस्पतालों के 13 डॉक्टरों से बात की. इन डॉक्टरों में से 9 को अप्रैल से कम से कम एक बार ऑक्सीजन संकट का सामना करना पड़ा है. दो डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें सरकारी अधिकारियों से समय पर मदद मिली, जबकि अन्य ने सीधे आपूर्तिकर्ताओं से या काले बाजार से ऑक्सीजन खरीदी या मेडिकल बिरादरी से मदद ली. इनमें से अधिकांश अस्पतालों ने या तो नए रोगियों को भर्ती करना बंद कर दिया है या ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित हो जाने तक रोगियों को भर्ती नहीं कर रहे.

निकीता सक्सेना कारवां की स्‍टाफ राइटर हैं.

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