राष्ट्रीय हेल्थ आईडी पंजीकरण के लिए किया जा रहा मजबूर, चंडीगढ़ के डॉक्टरों ने लगाया आरोप

14 सितंबर 2020
17 अगस्त 2017 को चंडीगढ़ में सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल का एक दृश्य.
अजय वर्मा / रॉयटर्स
17 अगस्त 2017 को चंडीगढ़ में सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल का एक दृश्य.
अजय वर्मा / रॉयटर्स

सितंबर की शुरुआत में चंडीगढ़ के सेक्टर 32 में सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के एक जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर को डिजी डॉक्टर पर पंजीकरण करने में तीन दिन लग गए. डिजी डॉक्टर डॉक्टरों की एक रजिस्ट्री है जो हाल में घोषित राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन 2020 का हिस्सा है. मिशन के अनुसार इसका उद्देश्य देश के लिए एक एकीकृत डिजिटल स्वास्थ्य ढांचे का निर्माण करना है. "आखिर में मैं इतना निराश हो गया कि मैंने एनडीएचएम वेबसाइट पर उपलब्ध हेल्पलाइन नंबर को कॉल किया और पूछा कि क्या मेरे लिए पंजीकरण करना अनिवार्य है," रेजिडेंट डॉक्टर ने कहा. “मुझे बताया गया था कि अगर मैं पेशेवर चिकित्सक हूं तो पंजीकरण करना उपयोगी होगा लेकिन यह अनिवार्य नहीं है. फिर पंजीकरण के लिए मुझ पर इतना जोर क्यों डाला जा रहा था जबकि मैं अभी छात्र ही हूंं?” चंडीगढ़ के कम से कम पांच स्वास्थ्य कर्मचारियों ने मुझे बताया कि वे इस रजिस्ट्री में खुद को नामांकित करने और मिशन के तहत राष्ट्रीय स्वास्थ्य आईडी के लिए पंजीकरण करने के लिए मजबूर किए गए हैं जबकि इसे स्वैच्छिक बताया गया है. सभी पांचों ने नाम न छापने की शर्त पर मुझसे बात की.

28 अगस्त को केंद्र शासित प्रदेश में पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च के निदेशक जगत राम ने एक परिपत्र जारी किया है जिसमें कहा गया कि "हेल्थ आईडी बनाने के लिए पंजीकरण देश के सभी नागरिकों के लिए अनिवार्य है." चंडीगढ़ देश के उन सात केंद्र शासित प्रदेशों में से एक है जिनका राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण- केंद्रीय स्वास्थ और परिवार कल्याण मंत्रालय से जुड़ी स्वायत्त संस्था- ने राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन 2020 के तहत एक पायलट प्रोजेक्ट के लिए चयन किया है. पीजीआईएमईआर के आदेश में आगे कहा गया है कि चंडीगढ़ प्रशासन ने संस्थान को अपने सभी डॉक्टरों और उनके परिवार के सदस्यों को स्वास्थ्य आईडी के लिए पंजीकरण कराने का निर्देश दिया है. जीएमएसएच 32 की तरह चंडीगढ़ के अन्य सरकारी अस्पतालों और चिकित्सा शिक्षा संस्थानों ने भी इस तरह के निर्देश जारी किए हैं. हालांकि, एनएचएएम की घोषणा के बाद से एनएचए के सीईओ इंदु भूषण ने बार-बार कहा था कि यह "मूल रूप से नागरिकों के अधिकारों के तहत विशुद्ध स्वैच्छिक योजना है."

4 सितंबर को मुझे ईमेल की गई एक प्रतिक्रिया में एनएचए ने पीजीआईएमईआर के 28 अगस्त के सर्कुलर से खुद को दूर रखा है. एनएचएएम के कार्यान्वयन के प्रभारी एनएचए के अतिरिक्त सीईओ डॉ. प्रवीण गेदाम ने लिखा है कि पायलट प्रोजेक्ट के लिए, "हेल्थ आईडी बनाना पूरी तरह से स्वैच्छिक कार्य है यानी यह एक सहमति आधारित व्यवस्था है." गेदाम ने कहा कि अधिकारियों को सलाह दी गई थी कि "इस तरह के किसी भी आदेश को जारी न करें और यदि पहले ही जारी किए गए हैं तो ऐसे किसी भी आदेश को वापस लें/संशोधित करें."

पीजीआईएमईआर ने अपनी बात से पीछे हटते हुए कहा कि "अनिवार्य" शब्द एक त्रुटि थी जिसे सुधार लिया गया था. संस्थान ने 4 सितंबर को एक परिपत्र जारी किया जिसमें कहा गया कि स्वास्थ्य आईडी के लिए पंजीकरण पूरी तरह से स्वैच्छिक कार्य है. राम ने कहा, "यह अनिवार्य नहीं है लेकिन यह एक अच्छा प्रयास है जो अधिक से अधिक लोगों के पंजीकरण में सफल होगा और इसलिए हमने केवल अपने कर्मचारियों को ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित किया है." गेदाम ने अपने ईमेल में इस परिपत्र का भी उल्लेख किया और कहा कि अब "यह स्पष्ट कर दिया गया है कि स्वास्थ्य आईडी बनाने के लिए पंजीकरण विशुद्ध रूप से स्वैच्छिक है."

4 सितंबर को पीजीआईएमईआर ने अपना स्पष्ट आदेश जारी करने से पहले, चंडीगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक गजिंदर दीवान द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, चंडीगढ़ में कम से कम 57000 स्वास्थ्य आईडी पंजीकृत किए गए हैं. संघ क्षेत्र में एनडीएचएम को लागू करने की जिम्मेदारी दीवान की है. गेदाम के अनुसार, 4 सितंबर तक सात केंद्र शासित प्रदेशों में 92000 हेल्थ आईडी बनाए गए थे. हालांकि पीजीआईएमईआर ने स्पष्ट किया कि एनडीएचएम डेटाबेस में पंजीकरण स्वैच्छिक था, कई डॉक्टरों ने कहा कि उनसे पंजीकरण करने की उम्मीद की गई थी. कुछ ने आरोप लगाया कि प्रबंधन ने उन्हें पंजीकरण न करने के बुरे नतीजे झेलने की धमकी भी दी.

चेतना राणा कारवां में​ रिपोर्टिंग फैलो हैं.

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