पंजाब में धूल खा रहे सैकड़ों पीएम केयर्स वेंटिलेटर, राज्य और केंद्र सरकार एक-दूसरे पर मढ़ रहे आरोप

14 मई 2021 को कोविड-19 की दूसरी लहर के बीच अमृतसर के एक अस्पताल में एक खराब वेंटिलेटर को रखते हुए एक स्वास्थ्य कर्मी. खबर है कि पंजाब में सैकड़ों पीएम केयर्स वेंटिलेटर मरम्मत और इंस्टॉलेशन के आभाव में अप्रयुक्त पड़े हैं.
नरिंदर नानू / एएफपी / गैट्टी इमेजिस
14 मई 2021 को कोविड-19 की दूसरी लहर के बीच अमृतसर के एक अस्पताल में एक खराब वेंटिलेटर को रखते हुए एक स्वास्थ्य कर्मी. खबर है कि पंजाब में सैकड़ों पीएम केयर्स वेंटिलेटर मरम्मत और इंस्टॉलेशन के आभाव में अप्रयुक्त पड़े हैं.
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मई 2020 में कैंसर रोगियों के साथ काम करने वाली एक गैर-लाभकारी संस्था के संस्थापक गुरप्रीत सिंह चांदबाजा ने पहली बार पंजाब के फरीदकोट जिले के गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में इस्तेमाल न होने वाले वेंटिलेटर का मुद्दा उठाया. उन्होंने चिकित्सा अधीक्षक से इस्तेमाल न हो रहे उन वेंटिलेटर के बारे में पूछा जो उन 809 वेंटिलेटरों में से थे जिन्हें केंद्र सरकार ने पीएम केयर्स फंड के तहत पंजाब को आवंटित किए थे. पिछले साल भी चांदबाज ने कई बार अस्पताल का दौरा किया और देखा कि पड़े-पड़े धूल खा रहे वेंटिलेटरों की संख्या बढ़ती जा रही है. अंततः इस साल मई में चांदबाजा ने अस्पताल में दर्जनों ऐसे वेंटिलेटरों की फोटो ली जो बाद में फरीदकोट के कोटकपूरा शहर से आम आदमी पार्टी के विधायक कुलतार सिंह संधवान तक पहुंच गई. संधवान ने यह तस्वीर 11 मई को ट्वीट कर दी. इसके तुरंत बाद खबर आई कि पंजाब में सैकड़ों ​अप्रयुक्त वेंटिलेटरों को लगाना और उनकी मरम्मत बाकी है.

कांग्रेस के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने अपनी ओर से केंद्र सरकार को प्रधान मंत्री नागरिक सहायता और आपातकालीन स्थितियों में राहत (पीएम केयर्स फंड) के तहत खराब वेंटिलेटर देने का आरोप लगाया है. मई 2020 में केंद्र ने 50000 “मेड-इन-इंडिया वेंटिलेटर” के निर्माण के लिए 2000 करोड़ रुपए के आवंटन की घोषणा की गई थी. केंद्र सरकार के मुताबिक, इस साल अप्रैल तक पंजाब को सभी 809 वेंटिलेटर दिए जा चुके थे लेकिन उनमें से कम से कम 251 को अनइंस्टॉल कर दिया गया. इस बीच राज्य ने दावा किया है कि राज्य के पास मौजूद कई पीए केयर्स वेंटिलेटर या तो खराब हैं या बिना इस्तेमाल के पड़े हैं क्योंकि डॉक्टरों का मानना है कि वे ठीक से काम नहीं करते.

दूसरी ओर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बार बार यह दावा किया है कि वेंटिलेटर ठीक काम कर रहे हैं. केंद्र ने अपने बचाव में कहा है कि जिन इंजीनियरों को वेंटिलेटर लगाने के लिए पंजाब में प्रतिनियुक्त किया गया है उनके अनुसार वेंटिलेटर काम कर रहे हैं. अपने दावे के समर्थन में केंद्र ने कहा है कि 12 मई को संधवान द्वारा फोटो ट्वीट करने के अगले दिन एक इंजीनियर ने फरीदकोट अस्पताल का दौरा किया था और पांच वेंटिलेटरों को चालू कर दिया था. केंद्र सरकार ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि, "इससे यह और स्पष्ट होता है कि जब वेंटिलेटरों को ठीक से संचालित किया जाए तो वह विश्वसनीय प्रदर्शन करेंगे."

यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है कि सैकड़ों वेंटिलेटर के लिए कौन सी सरकार जिम्मेदार है जबकि मरीजों की सांस अटकी हुई है और उन्हें आईसीयू में बेड नहीं मिल रहे हैं. पूरा दोष एक सरकार पर नहीं डाला जा सकता. इसमें कोई शक नहीं कि पंजाब और केंद्र सरकार महीनों तक राजनीति करते रहीं जबकि इसका नतीजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है.

चांदबाजा फरीदकोट स्थित भाई घन्नया कैंसर रोको सेवा सोसाइटी के संस्थापक हैं और महामारी के दौरान भी दवा और कीमोथेरेपी के जरिए कैंसर रोगियों की मदद करने के लिए अक्सर गुरु गोबिंद सिंह अस्पताल जाते रहे थे. चांदबाजा ने मुझे बताया कि उन्होंने सबसे पहले मई 2020 में गुरु गोबिंद सिंह अस्पताल में बिना इस्तेमाल पड़े वेंटिलेटरों का मुद्दा उठाया था. हालांकि, अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक शिलेख मित्तल ने मुझे बताया कि पीएम केयर्स वेंटिलेटर की पहली खेप जून में आई थी. इससे पता चलता है कि अस्पताल के पास पहले से ही बिना इस्तेमला के वेंटिलेटर थे जिनकी महामारी की पहली लहर के वक्त से ही मरम्मत नहीं हुई थी.

जतिंदर कौर तुर वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले दो दशकों से इंडियन एक्सप्रेस, टाइम्स ऑफ इंडिया, हिंदुस्तान टाइम्स और डेक्कन क्रॉनिकल सहित विभिन्न राष्ट्रीय अखबारों में लिख रही हैं.

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