एमपी अजब है : न कोई स्वास्थ्य मंत्री है, न खाद्य और क्वारंटीन हैं मुख्यमंत्री शिवराज

10 अप्रैल 2020
मार्च में जब दूसरे राज्य कोरोना संकट से लड़ने की तैयारी कर रहे थे तब बीजेपी राज्य में सत्ता बनाने और गिराने का खेल खेल रही थी
MP.BJP.ORG
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7 अप्रैल को भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी राजकुमार पांडे की पत्नी प्रीति पांडे का एक वीडियो मध्य प्रदेश में, खासकर भोपाल में खूब वाइरल हुआ. उस वीडियो में प्रीति बता रही हैं कि कैसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में आईटी एक्सपर्ट उनके पति को अपने सहकर्मियों के साथ एक बैठक में भाग लेने के चलते कोविड-19 संक्रमण हो गया है. वह बैठक सरकारी अधिकारियों ने महामारी के खिलाफ रणनीति बनाने के लिए बुलाई थी. मध्य प्रदेश में राजकुमार सहित कई राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के कार्यकर्ता कोविड-19 से संक्रमित हुए हैं. मध्य प्रदेश में इस विभाग के लगभग सभी लोगों को क्वारंटीन में रखे जाने के चलते, प्रदेश में महामारी का संकट और गहरा गया है.

प्रीति वीडियो में बोल रही हैं, “उन्होंने अपना टेस्ट करवाया तो रिजल्ट पॉजिटिव आया और वह एम्स अस्पताल (भोपाल) में एडमिट हो गए. दो दिन से वहां एडमिट हैं लेकिन कोई डॉक्टर उन्हें देखने नहीं आ रहा, पूछने नहीं आ रहा है. आइसोलेशन के नाम पर उन्हें सिर्फ दो दवाइयां मिली हैं – सेट्रीजिन और पैरासिटामोल.” फिर खुद को संभालने के लिए प्रीति रुकती है और कहती है, “न उन्हें विटामिन सी की गोली मिल रही है न गवर्मेंट का कोई प्रोटोकॉल फोलो कर रहे हैं वे लोग और खाना भी वहां का बहुत बुरा है. दो दिन से वह परेशान हैं. उन्होंने सबसे रिक्वेस्ट किया कि वहां से निकाल कर उन्हें चिरायु (निजी अस्पताल) में शिफ्ट कर दें. लेकिन वे लोग बिल्कुल सुन नहीं रहे हैं.”

जिस दिन यह वीडियो शेयर हो रहा था भोपाल एम्स के जनसंपर्क अधिकारी ने वक्तव्य जारी कर प्रीति के आरोपों को बेबुनियाद बताया और कहा कि अस्पताल सभी मरीजों का इलाज प्रॉटोकॉल के तहत और समर्पित होकर कर रहा है और राजकुमार की नियमित जांच हो रही है.” पीआरओ ने प्रीति के वीडियो को “प्रॉपगेंडा” बताया और कहा कि इसका राज्य के स्वास्थ्य कर्मियों के हौसले पर बुरा असर पड़ेगा. लेकिन इसके बावजूद प्रदेश के स्वास्थ्य आयुक्त फैज अहमद फैज ने एम्स, भोपाल के निदेशक को खत लिख कर बताया कि कोविड-19 से संक्रमित 11 एएचएम कर्मियों को एम्स से चिरायु हस्पताल ले जाया जाएगा.

मध्य प्रदेश में अब तक चार सौ से ज्यादा पुष्ट मामले सामने आए हैं और यह तेजी से कुप्रबंधन के लिए बदनाम होता जा रहा है. 8 अप्रैल को सरकार ने इंदौर, भोपाल और उज्जैन को पूरी तरह बंद करने का आदेश दिया और इसके दूसरे दिन इंदौर में एक डॉक्टर की मौत इस वायरस से हो गई. यह भारत में इस वायरस से किसी डॉक्टर की पहली मौत थी. भोपाल के 74 पुष्ट मामलों में 34 स्वास्थ्य कर्मियों और 15 पुलिस और उनके परिजनों के हैं. मैंने इस संबंध में राज्य सरकार के जनसंपर्क विभाग के सचिव पी. नरहरि को सवाल भेजे तो उनका ईमेल आया, “यह सच है कि पुलिस अधिकारियों, स्वास्थ्य विभाग और उनके परिवार के कुछ सदस्यों में संक्रमण मिला है और वे जहां रह रहे है वह जगह कंटेनमैंट जोन है.”

मार्च के मध्य में, जब दूसरे राज्य कोविड-19 से खिलाफ लंबी लड़ाई की तैयारी कर रहे थे, राज्य में राजनीतिक उठापटक चल रही थी. भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रस सरकार को पठकनी देकर सरकार कब्जा ली और शिवराज चौहान चौथी बार मुख्यमंत्री बन गए. 23 मार्च को, देशव्यापी लॉकडाउन के दो दिन पहले, चौहान ने खचाखच भरे राज भवन में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. उस वक्त सरकार को सोशल डिसटेंसिंग का ख्याल नहीं आया.

विद्या कृष्णन स्वास्थ्य मामलों की पत्रकार हैं और गोवा में रहती हैं. एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस और वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा पर उनकी पहली किताब 2020 में प्रकाशित होगी.

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