मेडिकल स्टॉफ की कमी के साथ नौकरशाही की उलझनों में फंसे जम्मू के कोरोना अस्पताल

24 अक्टूबर 2020
7 मार्च 2020 को जम्मू में सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के बाहर मास्क पहने कर खड़े लोग.
चन्नी अनहद/ एपी फोटो
7 मार्च 2020 को जम्मू में सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के बाहर मास्क पहने कर खड़े लोग.
चन्नी अनहद/ एपी फोटो

जम्मू संभाग के प्रमुख अस्पतालों में से एक गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) की पिछले कुछ महीनों से हालत खस्ता है. जम्मू शहर में स्थित अस्पताल में बुनियादी ढांचे और अमले की भारी कमी है और यह हाल तब है जब सितंबर में संभाग में कोविड-19 मामलों में इजाफा हुआ है. जम्मू संभाग में दस जिले हैं. मेडिकल कॉलेज की यह हालत नोवेल कोरोनावायरस महामारी के खिलाफ केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन की तैयारियों की कमी को दर्शाता है.

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 18 अक्टूबर तक जम्मू संभाग में कोविड​​-19 से 35246 लोग संक्रमित हुए थे और 457 लोग मारे गए थे. इनमें से 26710 मामले और 394 मौतें सितंबर की शुरुआत से हुई थीं. अगस्त में केंद्र शासित प्रदेश से लॉकडाउन हटाए जाने के बाद इस क्षेत्र में संक्रमण में तेजी आई और पहले से ही खस्ता हाल और अमले की कमी के शिकार सरकारी अस्पतालों में रोगियों की भीड़ लग गई. उदाहरण के लिए, कई छोटे अस्पतालों में वेंटिलेटर ही नहीं थे. खुद जीएमसी को खुद बीमारी से संक्रमित कर्मचारियों का इलाज करने में हताश डॉक्टरों, नौकरशाही के हस्तक्षेप, ऑक्सीजन की कमी और उसकी आपूर्ति में व्यवधान से जूझना पड़ा.

23 सितंबर को तड़के पच्चीस साल की बिंदी भट्ट की जीएमसी में मौत हो गई. उनके बहनोई रमेश भट्ट के अनुसार, अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में सेंट्रलाइज ऑक्सीजन सप्लाई खराब हो गई थी. उन्होंने बताया कि उन्होंने बिंदी की मौत के तुरंत बाद कई लोगों को मरते देखा. उनके परिवार वाले मदद के लिए डॉक्टरों को खोज रहे थे. रमेश ने बताया, “हमें एक नर्सिंग स्टाफ को जगाने में ही दस मिनट लग गए. आसपास कोई और मेडिकल स्टाफ नहीं था.” उन्होंने कहा कि बिंदी की मौत जब हुई तब वह ऑक्सीमीटर पर अपने ऑक्सीजन के गिरते स्तर को देख रही थी और बचा लेने की मिन्नतें लगा रहा थी.

भट्ट परिवार अस्पताल से लगभग बीस किलोमीटर दूर जगती बस्ती में रहता है. उन्हें बिंदी के लिए अस्पताल में बेड तलाशने में काफी मुश्किलें आईं. "हमने नारायण सुपरस्पेशलिटी अस्पताल से संपर्क किया, जो श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड द्वारा चलाया जाता है, लेकिन उन्होंने बेड उपलब्ध न होने का हवाला दिया. दूसरे निजी अस्पतालों ने हमें यह भरोसा नहीं दिया कि वहां पहुंचते ही वह ऑक्सीजन देंगे क्योंकि उनके पास ऑक्सीजन बहुत कम बची थी. हम उसे 22 सितंबर की शाम जीएमसी ले आए.” उन्होंने कहा कि हालांकि उस समय उनका ऑक्सीजन स्तर बहुत कम था (35 से 40 मिलीमीटर के बीच) जीएमसी में उन्हें देर रात तक बिस्तर या ऑक्सीजन नहीं दिया गया. सामान्यत: रक्त-ऑक्सीजन का स्तर 75 और 100 मिलीमीटर के बीच होता है.

जम्मू संभाग के अस्पतालों में उस रात सोलह लोगों की मौत हो गई. भट्ट परिवार के अलावा, अन्य परिवारों ने भी आरोप लगाया कि जीएमसी में ऑक्सीजन की गड़बड़ी के कारण उन्होंने अपनों को खो दिया. जीएमसी ने एक जांच समिति गठित की और "रोगी की मौत" के लिए "जिम्मेदार कारण" की रिपोर्ट में पाया गया कि अस्पताल प्रशासन और मैकेनिकल-इंजीनियरिंग विंग के बीच तालमेल न होने के कारण यह व्यवधान आया था. समिति की रिपोर्ट कहती है, “अस्पताल प्रशासन और अफसरों की लापरवाही के चलते ये गड़बड़ी हुई है, जो बहुत ही सामान्य और गैर-पेशेवर ढंग से हालात से निपट रहे हैं, जिससे चीजों को अव्यवस्था में डाल दिया गया है और उपलब्ध संसाधनों का इष्टतम उपयोग नहीं किया गया है.” यूटी के लेफ्टिनेंट गवर्नर के सलाहकार राजीव राय भटनागर ने उप-चिकित्सा अधीक्षक और मैकेनिकल विभाग के प्रभारी कार्यकारी अभियंता को इस आधार पर निलंबित कर दिया कि वे ऑक्सीजन की आपूर्ति में कमी के लिए जवाबदेह थे.

आशुतोष शर्मा फ्रीलांस पत्रकार हैं.

Keywords: COVID-19 Jammu oxygen Government Medical College
कमेंट