कोविड टीकाकरण : दिल्ली के अस्पतालों के कई डॉक्टरों ने कोवाक्सिन टीके पर उठाए सवाल

19 जनवरी 2021
दिल्ली में टीकाकरण अभियान की शुरुआत के पहले दिन 8000 से अधिक स्वास्थ्य कर्मचारियों को टीका लगाने की तैयारी की गई थी लेकिन आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में केवल 4319 लोगों को और पूरे भारत में कुल 191181 लोगों को उस टीका लगाया गया.
अनुश्री फडणवीस / रॉयटर्स
दिल्ली में टीकाकरण अभियान की शुरुआत के पहले दिन 8000 से अधिक स्वास्थ्य कर्मचारियों को टीका लगाने की तैयारी की गई थी लेकिन आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में केवल 4319 लोगों को और पूरे भारत में कुल 191181 लोगों को उस टीका लगाया गया.
अनुश्री फडणवीस / रॉयटर्स

भारत में कोविड-19 टीकाकरण शुरू होने के पहले दिन ही दिल्ली के कुछ सरकारी अस्पतालों के स्वास्थ्य कर्मियों ने फार्मास्युटिकल कंपनी भारत बायोटेक द्वारा विकसित कोवाक्सिन पर संशय व्यक्त किया है. इस संशय का कारण है कि सरकार ने इस वैक्सीन की अनुमति निर्माता कंपनी द्वारा तीसरे चरण के नैदानिक ​​परीक्षण की जानकारी प्रकाशित किए बिना ही दे दी है जिसके चलते कई स्वास्थ्य कर्मी 16 जनवरी की सुबह टीकाकरण के लिए निर्धारित स्थान पर नहीं आए.

जनवरी की शुरुआत में भारत में दो टीकों को आपातकालीन उपयोग की मंजूरी दी गई थी. जिनमें से एक थी कोविशील्ड, जिसे ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और ब्रिटिश-स्वीडिश फार्मास्युटिकल कंपनी एस्ट्राजेनेका के सहयोग से सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा तैयार किया गया है, और दूसरी है कोवाक्सिन, जिसे भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के सहयोग से भारत बायोटेक ने विकसित किया है. एस्ट्राजेनेका के टीके ने तीसरे चरण के परीक्षणों को पूरा किया है और कंपनी 70 प्रतिशत प्रभावकारिता का दावा करती है. कोवाक्सिन के तीसरे चरण के परीक्षण अभी भी जारी हैं और अभी तक वैक्सीन की प्रभावकारिता को लेकर कोई डेटा या आंकड़े सामने नहीं आया है. कोवाक्सिन द्वारा टीका लगवाने वालों को दिए जाने वाले सहमति फॉर्म, जिसपर लाभार्थियों को टीका लगवाने से पहले हस्ताक्षर करने होते हैं, पर यह स्वीकार किया गया है कि कोवाक्सिन की लाक्षणिक ​​प्रभावकारिता की प्रमाणिकता अभी बाकी है और अभी भी नैदानिक ​​परीक्षण के तीसरे चरण का अध्ययन किया जा रहा है. प्रभावकारिता के आंकड़े उपलब्ध न होने पर और स्वास्थ्य कर्मियों को दोनों टीकों के बीच चयन करने का मौका न दिए जाने के कारण कई डॉक्टरों ने खुद को इस टीकाकरण अभियान से अलग कर लिया है.

दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के महासचिव डॉ. पवन सिंहमार ने कहा, "यह एक गंभीर चिंता का विषय है. हां, निष्कर्ष के तौर पर यह स्वैच्छिक रूप से प्रयोग किया जा रहा है. अगर हमें कोविशील्ड दी जाती तो हम लगवाने के लिए तैयार हैं लेकिन मैं एक ऐसा टीका लगवाने में कोई फायदा नहीं देख रहा हूं जिसके परीक्षण अभी भी जारी हैं और जिसका प्रभावकारिता स्तर किसी को मालूम नहीं है." सिंहमार दिल्ली के एम्स में कोवाक्सिन परीक्षण के तीसरे चरण में एक स्वयंसेवक है फिर भी परीक्षण के पूरा होने से पहले ही इसे सामान्य उपयोग के लिए शुरू किए जाने पर अपनी अस्वीकृति जाहिर करते हैं. उन्होंने मुझे बताया कि यदि परीक्षण में स्वेच्छा से शामिल नहीं हुए होते, तो वह एम्स में आयोजित टीकाकरण अभियान में भाग नहीं लेते. उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा, "एक परीक्षण में शामिल होने में और एक बीमारी के खिलाफ लड़ाई में टीका लगवाने में अंतर होता है. एक परीक्षण के दौरान आपको पता होता हैं कि इसमें जोखिम हैं और आप यह भी जानते हैं कि इस टीके की प्रभावकारिता के बारे में सुनिश्चित नहीं हो सकते हैं. लेकिन जब टीके को मंजूरी दे दी जाती है, तब यह सुनिश्चितता होनी चाहिए क्योंकि इसने बीमारी से लड़ने के लिए प्रभावकारिता प्रमाणित की है."

दिल्ली में टीकाकरण अभियान की शुरुआत के पहले दिन 8000 से अधिक स्वास्थ्य कर्मचारियों को टीका लगाने की तैयारी की गई थी. स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा पहले दिन की शाम को जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में केवल 4319 लोगों को और पूरे भारत में कुल 191181 लोगों को टीका लगाया गया.

कोवाक्सिन टीकाकरण के लिए एम्स दिल्ली में निर्दिष्ट छह अन्य केंद्र सरकार द्वारा संचालित जिला अस्पतालों में से एक है. दिल्ली सरकार द्वारा संचालित निजी अस्पतालों और सार्वजनिक अस्पतालों सहित 75 अन्य स्थानों को कोविशील्ड टीकाकरण के लिए प्रबंधित किया गया है. सभी टीकाकरण स्थलों पर 100 लाभार्थियों की एक सूची तैयार की गई थी और उसे कोविड-19 वैक्सीन इंटेलिजेंस नेटवर्क या को-विन पर जारी किया गया था. स्वास्थ्य मंत्रालय ने भारत में बड़े पैमाने पर चल रहे टीकाकरण अभियान पर नजर रखने के लिए यह ऐप तैयार किया है.

चाहत राणा कारवां में​ रिपोर्टिंग फेलो हैं.

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