18 साल से ऊपर के नागरिकों को टीका लगाने का फैसला गलत, अन्य देशों ने नहीं की ऐसी गलती

बीएलके मेक्स सुपरस्पेशिएलिटी अस्पताल में टीके के लिए बैठे 18 से 45 वर्ष के लोग. ऐसे देश जो कोविड-19 से सबसे बुरी तरह से प्रभावित होने के बावजूद अपने नागरिकों के लिए निशुल्क टीकाकरण सुनिश्चित नहीं कर पाए उनमें भारत भी है.
सोनू मेहता / हिंदुस्तान टाइम्स
बीएलके मेक्स सुपरस्पेशिएलिटी अस्पताल में टीके के लिए बैठे 18 से 45 वर्ष के लोग. ऐसे देश जो कोविड-19 से सबसे बुरी तरह से प्रभावित होने के बावजूद अपने नागरिकों के लिए निशुल्क टीकाकरण सुनिश्चित नहीं कर पाए उनमें भारत भी है.
सोनू मेहता / हिंदुस्तान टाइम्स

भारत सरकार द्वारा अपने सभी नागरिकों को निशुल्क कोविड-19 वैक्सीन न देने से देश में टीकाकरण में ऊंच-नीच पैदा हो गई है. इस असमानता के चलते महामारी की चपेट से बाहर निकल आने की संभावना कमजोर पड़ रही है. भारत उन देशों में है जो कोविड-19 से सबसे बुरी तरह से प्रभावित होने के बावजूद अपने नागरिकों के लिए निशुल्क टीकाकरण सुनिश्चित नहीं कर पाए हैं.

23 मई तक अमेरिका और ब्राजील आधिकारिक रूप से कोविड-19 मौतों के मामले में भारत से आगे थे. अमेरिकी सरकार देश में रहने वाले सभी लोगों का निशुल्क टीकाकरण कर रही है. आव्रजन और स्वास्थ्य बीमा स्टेटस टीकाकरण में बाधक नहीं हैं. अमेरिका के रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र ने कहा है कि टीकाकरण केंद्रों में टीकाकरण से संबंधित कोई शुल्क लोगों से नहीं लिया जा सकता.

टीके की फीस लोगों के निजी स्वास्थ्य बीमा या कल्याणकारी कार्यक्रमों की मद से (जिनके बीमा नहीं हैं) सीधा काटा जा रहा है. ब्राजील के राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो ने पहले तो कोविड-19 को एक मामूली फ्लू बताया था लेकिन दिसंबर में घोषणा की कि उनकी सरकार सभी लोगों का निशुल्क टीकाकरण करेगी. ब्रिटेन ने अपनी राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा के तहत सभी के लिए टीकाकरण निशुल्क रखा है. इटली, फ्रांस और जर्मनी में भी टीकाकरण की फीस और खर्च स्वास्थ्य बीमा योजनाओं से काटा जा रहा है. नवंबर में रूस ने घोषणा की थी कि उसका टीका स्पुटनिक-पांच नागरिकों को निशुल्क लगाया जाएगा. मेक्सिको ने दिसंबर में नागरिकों के लिए निशुल्क टीकाकरण योजना की घोषणा की और कोलंबिया ने निजी स्वास्थ्य कंपनियों को टीका आयात का काम दिया है लेकिन जोर देकर बताया है कि टीकाकरण निशुल्क रहेगा.

भारत का टीकाकरण कार्यक्रम आरंभ में उपरोक्त देशों के जैसा ही था. जनवरी 2020 में फ्रंटलाइन वर्करों और स्वास्थ्य कर्मियों को सरकार द्वारा संचालित केंद्रों में निशुल्क टीका लगाया गया. 1 मार्च से शुरू हुए दूसरे चरण में सरकार ने 60 साल और अधिक के सभी नागरिकों को और 45 साल के उन नागरिकों को जिनमें कोमोरबिडिटी है, सरकारी केंद्रों में निशुल्क टीकाकरण की घोषणा की. साथ ही सरकार ने निजी क्षेत्र को 250 से 150 रुपए प्रति टीका की दर से टीका लगाने और टीका लगाने की फीस 100 रुपए रखी. यह मामूली मूल्य तब तीसरे चरण में भी जारी रहा जिसमें 45 साल के ऊपर के सभी लोगों को टीका लगाने की बात थी. लेकिन अंतिम चरण में, जब दूसरी लहर चरम पर थी, सरकार ने 18 साल से ऊपर के सभी लोगों को खुले बाजार में टीकाकरण की घोषणा की.

ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर इंद्रनिल का मानना है कि सरकार ने बजट में जो 35000 करोड रुपए टीकाकरण के लिए आवंटित किए हैं वह रकम भारत के सभी लोगों को निशुल्क टीका लगाने के लिए पर्याप्त है.

नयनतारा नारायणन कारवां की पब्लिक हेल्थ एडिटोरियल फेलो हैं.

चाहत राणा कारवां में​ रिपोर्टिंग फेलो हैं.

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