सिर्फ मार्च में 90 हजार एनआरआई पंजाब आए, इटली से लौटीं एसजीपीसी की पूर्व अध्यक्ष मिलती रहीं लोगों से

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की पूर्व अध्यक्ष बीबी जागीर कौर का मामला कोविड-19 महामारी के प्रति सिख धर्मगुरुओं के अडियल रवैये की एक मिसाल है.
नरिंदर नानू / एएफपी / गेटी इमेजिस
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की पूर्व अध्यक्ष बीबी जागीर कौर का मामला कोविड-19 महामारी के प्रति सिख धर्मगुरुओं के अडियल रवैये की एक मिसाल है.
नरिंदर नानू / एएफपी / गेटी इमेजिस

इस साल मार्च में 90 हजार एनआरआई पंजाब आए. 23 मार्च को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्ष वर्धन को लिखे एक पत्र में पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने यह आंकड़ा दिया है. उस पत्र में सिद्धू ने वर्धन से कोविड महामारी से लड़ने के लिए "भारत सरकार से न्यूनतम 150 करोड़ रुपए के अतिरिक्त धन" का अनुरोध किया है.  सिद्धू ने लिखा है, ''पंजाब में देश में सबसे ज्यादा एनआरआई रहते हैं और इस महीने 90000 एनआरआई राज्य में आए हैं.  उनमें से कइयों में कोविड-19 के लक्षण दिखाई दिए हैं और यह रोग उनके संपर्क के जरिए से फैल रहा है."

उसी दिन लोगों को अपने घरों से बाहर निकलने से रोकने के लिए राज्य के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने राज्य में कर्फ्यू की घोषणा कर दी क्योंकि खबरें सामने आने लगी थीं कि शहर के लोग पिछले दिनों घोषित किए गए तालाबंदी का उल्लंघन कर रहे हैं. कर्फ्यू की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री ने पंजाब में मौजूदा स्थिति को एक "युद्ध जैसी" स्थिति करार दिया जिसमें कठोर उपायों को अपनाने की आवश्यकता है. फिर भी राज्य ने प्रकोप के पैमाने को कम करने के लिए कोई उपाय नहीं किया. होला मोहल्ला जैसे धार्मिक समारोह, जिनमें बड़े पैमाने पर भीड़ जुटती है, को बेरोकटोक जारी रखा गया, गुरुद्वारे खुले रहे और हवाई अड्डों ने अलग-थलग (क्वारंटीन) करने के प्रभावी उपायों को लागू नहीं किया. राज्य और जिला स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, राज्य के 70 वर्षीय ग्रं​थी बलदेव सिंह, जो कोविड से मरने वाले चौथे भारतीय हैं, इटली के रास्ते जर्मनी से लौटे थे और उन्होंने कम से कम 15 अन्य लोगों को संक्रमित किया है. इसी तरह बीबी जागीर कौर का मामला भी इस महामारी से लड़ने में राज्य की विफलता की एक और मिसाल बन गया है. इसके साथ ही यह सिख धर्मगुरुओं के अडियल रवैये का भी उदाहरण है.

कौर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति की पूर्व अध्यक्ष हैं. समिति देश भर में फैले गुरुद्वारों का प्रबंधन करती है. वह पंजाब के कपूरथला शहर में बेगोवाल डेरा की प्रमुख हैं. फिलहाल कौर शिरोमणि अकाली दल की महिला शाखा की अध्यक्ष हैं. इस साल फरवरी में कौर ने फ्रांस और इटली सहित यूरोप के कई देशों की यात्रा की थी. वह 28 फरवरी को राज्य वापस आई थीं. कौर ने खुद को अलग-थलग नहीं रखा और न ही राज्य के अधिकारियों ने ही इसे लागू करने पर जोर दिया. वह लोगों के साथ घुलमिल गईं और सार्वजनिक समारोहों में भाग लिया, अपने फेसबुक प्रोफाइल पर अपनी विदेश यात्राओं और बाद में पंजाब में सामाजिक यात्राओं की तस्वीरें डालीं. 27 फरवरी को जब कौर ने इटली छोड़ी तब तक उस देश में कथित तौर पर 17 मौतें और 650 संक्रमण के मामले दर्ज किए जा चुके थे. भले ही कौर में कोविड-19 का कोई लक्षण नहीं पाया गया हो लेकिन फिर भी यह उनके वायरस का वाहक होने की संभावना को खारिज नहीं करता है.

कौर ने दावा किया कि जब वह इटली से निकलीं तब वहां स्थिति "सामान्य" थी और "मुश्किल से तीन ही मामले" थे. उन्होंने अपनी यात्रा के बारे में मुझसे बड़ी बेतकल्लुफी बात की. उनके अंदाज से मुझे पता चला कि वह इस संकट की गंभीरता को जरा भी नहीं समझती हैं. कौर ने बताया, "9 से 12 फरवरी तक मैं पेरिस में रही और फिर 15 और 16 को मैं इटली में थी. वहां से हम 17 और 18 को जर्मनी गए और फिर दो दिनों के लिए 19 और 20 फरवरी को मैं स्विट्जरलैंड में थी. फिर जर्मनी में 2 दिन और उसके बाद 23-26 फरवरी तक मैं इटली में थी और 27 को भारत लौट आई थी. "जब मैंने उससे पूछा कि क्या उन्हें क्वारंटीन में रखा गया, तो उन्होंने कहा कि उनके आने पर दिल्ली में उनका तापमान जांचा गया था और वह "फिट” थीं. यह आवश्यक नहीं है कि वायरस के वाहक व्यक्तियों को तुरंत बुखार हो जाए इसलिए थर्मल स्क्रीनिंग संक्रमण नहीं होने का कोई निर्णायक प्रमाण नहीं है. कौर ने कहा कि दिल्ली या पंजाब में किसी ने भी उन्हें खुद से अलग-थलग रहने के लिए नहीं कहा. "मेरे पहुंचने के बाद कोई भी मेरा परीक्षण करने या लक्षणों की जांच करने के लिए नहीं आया."

जतिंदर कौर तुर वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले दो दशकों से इंडियन एक्सप्रेस, टाइम्स ऑफ इंडिया, हिंदुस्तान टाइम्स और डेक्कन क्रॉनिकल सहित विभिन्न राष्ट्रीय अखबारों में लिख रही हैं.

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