कोरोनावायरस : लॉकडाउन ने रक्त की जरूरत वाले मरीजों की बढ़ाई मुश्किलें

21 अप्रैल 2020
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के ई-आरटीटी कोष डेटाबेस के अनुसार, शिविरों की संख्या जनवरी की 606 से घटकर मार्च में 369 हो गई और अप्रैल में यह केवल 81 रह गई है. फरवरी में रक्तदान करने वालों की संख्या 38207 थी जो अप्रैल में घटकर 7981 हो गई.
नूह सीलम/एएफपी/गैटी इमेजिस
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के ई-आरटीटी कोष डेटाबेस के अनुसार, शिविरों की संख्या जनवरी की 606 से घटकर मार्च में 369 हो गई और अप्रैल में यह केवल 81 रह गई है. फरवरी में रक्तदान करने वालों की संख्या 38207 थी जो अप्रैल में घटकर 7981 हो गई.
नूह सीलम/एएफपी/गैटी इमेजिस

प्रतिमा मुखर्जी को एबी-पॉजिटिव खून की चार बोतलों की सख्त जरूरत है. पश्चिम बंगाल के खड़गपुर के पास स्थित एक गांव के 31 वर्षीय व्यक्ति को कैंसर है और उसे नियमित रूप से रक्त चढ़ाने की जरूरत होती है लेकिन केंद्र सरकार द्वारा कोविड-19 महामारी के चलते किए गए लॉकडाउन ने इसे मुश्किल बना दिया है. उन्होंने मुझे बताया, उनके भाई बिस्वजीत पंडित खड़गपुर और कोलकाता में कई ब्लड बैंकों का दौरा कर चुके हैं लेकिन उन्हें रक्त नहीं मिला. "मई की शुरुआत तक लॉकडाउन का बढ़ना इसे और भी कठिन बना देगा."

बिहार के दरभंगा के रहने वाले अशोक सिंह का 12 अप्रैल को डायलिसिस कराया जाना था और उन्हें ए-पॉजिटिव ब्लड की दो यूनिट की आवश्यकता थी. उनके दामाद प्रभाकर कुमार ने मुझे बताया, "दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल का ब्लड बैंक बंद है क्योंकि पूरे अस्पताल को कोविड​​-19 के लिए लगा दिया गया है. जिन अन्य लोगों से मैंने कोशिश की उन्होंने जोर देकर कहा कि उनके रिश्तेदारों से ही ताजा रक्त प्राप्त किया जाए." सिंह के बेटे और एक अन्य रिश्तेदार ने एक-एक यूनिट रक्त दान किया था. उन्हें 21 मार्च को दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में डायलिसिस कराने का समय मिला था लेकिन अगले दिन जनता कर्फ्यू की घोषणा होने के बाद इसे टालना पड़ा. परिवार को दरभंगा के एक निजी अस्पताल में इलाज कराना पड़ा.

आंध्र प्रदेश के ओंगोल में रहने वाली किरण कुमार को अपनी भतीजी के लिए एक यूनिट रक्त की जरूरत है. वह गर्भवती हैं. उन्होंने कहा, "उसे ए-नेगेटिव की जरूरत है, जो रक्त का एक दुर्लभ समूह है और लॉकडाउन के चलते इसे प्राप्त करना और भी कठिन हो गया है. हम तीन ब्लड बैंक गए लेकिन हमें नहीं मिला." उन्होंने इस उम्मीद से सोशल मीडिया पर एक मैसेज पोस्ट किया है कि वहां से कोई मदद कर दे.

थैलेसीमिया और कैंसर जैसी बीमारियों के साथ-साथ किडनी प्रत्यारोपण और कुछ प्रकार के प्रसव जैसी प्रक्रियाओं के लिए खून की आवश्यकता होती हैं. शुरू में 21 दिनों के लिए और फिर 19 दिनों के लिए बढ़ाए गए लॉकडाउन के चलते सड़क दुर्घटनाओं जैसे गंभीर चोटों में आई एक बड़ी कमी के कारण रक्त की मांग में आई है. उन लोगों के लिए रक्त खरीदना अधिक कठिन हो गया है जिन्हें इसकी जरूरत है.

कोरोनोवायरस से निपटने के लिए पूरी चिकित्सा प्रणाली को उसी तरफ मोड़ देने के चलते गैर-जरूरी सर्जरी और प्रक्रियाओं को भी रोक दिया गया है. रक्त दान करने वाले अपने घरों में हैं और रक्तदान शिविरों की संख्या कम हो गई है. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के ई-आरटीटी कोष डेटाबेस के अनुसार, शिविरों की संख्या जनवरी में 606 से घटकर मार्च में 369 हो गई और अप्रैल में यह केवल 81 रह गई. फरवरी में रक्तदान करने वालों की संख्या 38207 से घटकर अप्रैल में 7981 हो गई.

तुषार धारा कारवां में रिपोर्टिंग फेलो हैं. तुषार ने ब्लूमबर्ग न्यूज, इंडियन एक्सप्रेस और फर्स्टपोस्ट के साथ काम किया है और राजस्थान में मजदूर किसान शक्ति संगठन के साथ रहे हैं.

Keywords: cancer coronavirus lockdown COVID-19
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