कोरोना का जवाब विज्ञान है नौटंकी नहीं, महामारी पर गलत साबित हुई केंद्र सरकार

भारतीय वायुसेना का एक हेलीकॉप्टर 3 मई को गुजरात के गांधीनगर के एक अस्पताल के ऊपर फूल बरसाता हुआ. वैज्ञानिकों ने इस सार्वजनिक-स्वास्थ्य संकट के दौरान विज्ञान को राजनीति और नौटंकी के बाद तीसरी स्थान पर रखे जाने पर अपनी निराशा और बेचैनी व्यक्त की है.
अमित देव / रॉयटर्स
भारतीय वायुसेना का एक हेलीकॉप्टर 3 मई को गुजरात के गांधीनगर के एक अस्पताल के ऊपर फूल बरसाता हुआ. वैज्ञानिकों ने इस सार्वजनिक-स्वास्थ्य संकट के दौरान विज्ञान को राजनीति और नौटंकी के बाद तीसरी स्थान पर रखे जाने पर अपनी निराशा और बेचैनी व्यक्त की है.
अमित देव / रॉयटर्स

5 मई को गृह मंत्रालय द्वारा देशव्यापी लॉकडाउन को बढ़ाए जाने के कुछ ही दिन बाद, भारत ने कोविड-19 संक्रमण और इससे हुई मौतों की भारी संख्या दर्ज की. 3829 नए मामले सामने आए और 194 मौतें हुईं. नरेन्द्र मोदी प्रशासन को सलाह देने के लिए भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद द्वारा गठित एक राष्ट्रीय टास्क फोर्स के कई सदस्यों के अनुसार, दूसरी बार लॉकडाउन बढ़ाने के बारे में टास्क फोर्स से परामर्श नहीं किया गया. 1 मई को तीसरे चरण की घोषणा से कुछ घंटे पहले ही 21 वैज्ञानिकों वाली टास्क फोर्स की बैठक हुई लेकिन सरकार ने नीतिगत निर्णयों पर सलाह देने के लिए नियुक्त विशेषज्ञों की समिति के साथ इस मामले पर चर्चा नहीं की.

महामारी के तीन महीनों में भारत में मामलों की संख्या बढ़ती ही जा रही है और विशेषज्ञ सलाह को दरकिनार करना मोदी सरकार की आदत हो गई है. इसके चलते भारत के वैज्ञानिक समुदाय और प्रशासन के बीच तनाव पैदा हो गया है. "नीतिगत निर्णयों में विज्ञान के अलावा भी चीजें होती हैं लेकिन वैज्ञानिक इनपुट और निर्णयों तथा उनके प्रचार में वैज्ञानिक चेतना की भावना का अभाव दुर्भाग्यपूर्ण है," कोविड-19 के लिए केंद्र द्वारा गठित 11 सदस्यीय सशक्त समूह के एक सदस्य ने मुझे बताया. 24 अप्रैल को एक राष्ट्रीय प्रेस वार्ता के दौरान केंद्र का भविष्यवाणी करना कि महामारी 16 मई को समाप्त हो जाएगी, विज्ञान की अवहेलना का स्पष्ट संकेत था.

उस प्रेस वार्ता में नीति आयोग के सदस्य विनोद पॉल ने एक स्लाइड प्रस्तुत की जिसमें दावा किया गया कि भारत में 16 मई के बाद कोविड-19 के नए मामले आने बंद हो जाएंगे. सशक्त समूह के सदस्य ने कहा कि यह भविष्यवाणी गणित मॉडल के "बदनाम सिद्धांत" पर निर्भर थी. जिस गणितीय मॉडल ने महामारी के खत्म हो जाने की भविष्यवाणी की थी, उसे एक ग्राफ में चित्रित किया गया था. इसने अनुमान लगाया कि नए संक्रमणों की संख्या मई की शुरुआत में कम होने लगेगी, लॉकडाउन के दूसरे चरण के समाप्त होने के समय लगभग 1500 से अधिक नए मामले सामने आएंगे. इसके बाद आशावादी पूर्वानुमान लगा कि 10 मई तक नए मामलों की संख्या लगभग एक हजार हो जाएगी और 16 मई के बाद भारत में कोई नया मामला सामने नहीं आएगा. ब्रीफिंग के तुरंत बाद प्रेस सूचना ब्यूरो ने यह बताते हुए गणितीय मॉडल को ट्वीट किया कि पॉल ने कहा है, "#COVID के छिपे मामलों के बाहर आने से डरने की कोई जरूरत नहीं है, बीमारी नियंत्रण में है."

24 अप्रैल को एक प्रेस वार्ता में नीति आयोग के सदस्य और राष्ट्रीय टास्क फोर्स के अध्यक्ष विनोद पॉल ने एक स्लाइड पेश की जिसमें दावा किया गया था कि भारत में 16 मई से कोविड-19 के नए मामले नहीं आएंगे.. पीआईबी मुंबई ट्विटर 24 अप्रैल को एक प्रेस वार्ता में नीति आयोग के सदस्य और राष्ट्रीय टास्क फोर्स के अध्यक्ष विनोद पॉल ने एक स्लाइड पेश की जिसमें दावा किया गया था कि भारत में 16 मई से कोविड-19 के नए मामले नहीं आएंगे.. पीआईबी मुंबई ट्विटर
24 अप्रैल को एक प्रेस वार्ता में नीति आयोग के सदस्य और राष्ट्रीय टास्क फोर्स के अध्यक्ष विनोद पॉल ने एक स्लाइड पेश की जिसमें दावा किया गया था कि भारत में 16 मई से कोविड-19 के नए मामले नहीं आएंगे.
पीआईबी मुंबई ट्विटर

पॉल "चिकित्सा आपातकालीन प्रबंधन योजना" पर 21-सदस्यीय टास्क फोर्स के अध्यक्ष और पहले सशक्त समूह के अध्यक्ष भी हैं. उनकी प्रस्तुति का शीर्षक था "भारत कोविड-19 के प्रकोप से प्रभावी ढंग से निपटता हुआ" और उनकी अधिकांश ब्रीफिंग यह अनुमान लगाने पर केंद्रित थी कि लॉकडाउन स्पष्ट रूप से सफल रहा है. "देश ने दिखाया है कि लॉकडाउन प्रभावी था," पॉल ने कहा. हालांकि वह ग्राफ में जाहिर की गई भविष्यवाणी पर चर्चा करने से बचते रहे, जिसे उनके पीछे एक बड़ी स्क्रीन पर दिखाया गया था, उन्होंने लॉकडाउन और महामारी को लेकर सरकार की प्रतिक्रिया की प्रशंसा करने के लिए बार-बार स्लाइड का उल्लेख किया. "आज हम कह सकते हैं कि इस महामारी को दूर करने के लिए देश द्वारा उठाए गए कदम बड़े सामर्थ्य के साथ समयानुकूल थे, अच्छे रहे और पूरे हुए हैं, हम इस बीमारी को नियंत्रित करने और हराने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं," पॉल ने कहा.

विद्या कृष्णन स्वास्थ्य मामलों की पत्रकार हैं और गोवा में रहती हैं. एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस और वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा पर उनकी पहली किताब 2020 में प्रकाशित होगी.

Keywords: COVID-19 health policy Narendra Modi healthcare
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