कोविड-19 के मरीजों के लिए आइवर मेक्टिन दवा को यूपी सरकार की मंजूरी, लेकिन असर का पता नहीं

07 सितंबर 2020
28 अप्रैल 2020 को फ्रांस की राजधानी पेरिस में एक फार्मेसी के काउंटर पर बिवरन द्वारा बनाई गई दवा आइवरमेक्टिन का बॉक्स. विशेषज्ञों ने नैदानिक परीक्षण प्रभावकारिता साबित होने तक कोविड-19 को नियंत्रित करने के लिए व्यापक स्तर पर दवा का उपयोग करने के खिलाफ चेतावनी दी है.
बेनोइट टेस्सिएर / रॉयटर्स
28 अप्रैल 2020 को फ्रांस की राजधानी पेरिस में एक फार्मेसी के काउंटर पर बिवरन द्वारा बनाई गई दवा आइवरमेक्टिन का बॉक्स. विशेषज्ञों ने नैदानिक परीक्षण प्रभावकारिता साबित होने तक कोविड-19 को नियंत्रित करने के लिए व्यापक स्तर पर दवा का उपयोग करने के खिलाफ चेतावनी दी है.
बेनोइट टेस्सिएर / रॉयटर्स

उत्तर प्रदेश सरकार ने कोविड-19 के इलाज और रोगनिरोधी दवा के रूप में आइवर मेक्टिन नामक एक एंटीपैरासिटिक दवा के उपयोग को मंजूरी दी है. हालांकि, इस सिफारिश का अभी तक कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है. ऐसा कोई परीक्षण नहीं हुआ है जो साबित करता है कि यह दवा नोवेल कोरोनावायरस के खिलाफ कारगर है. इसके अलावा विश्व स्वास्थ्य संगठन के वैज्ञानिकों ने कोविड-19 का इलाज करने के लिए आइवर मेक्टिन दवा का उपयोग करने के खिलाफ यह कह कर चेताया है कि मौजूदा अध्ययनों में इसकी प्रभावकारिता पर "पूर्वाग्रह का बड़ा खतरा है, साक्ष्य की विश्वसनीयता बहुत कम हैं और मौजूदा साक्ष्य दवा के फायदे के बारे में किसी तरह का निष्कर्ष निकालने के लिए पर्याप्त नहीं हैं.” अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने इस दवा को कोविड-19 की रोकथाम या इलाज के लिए अनुमोदित नहीं किया है और अतिरिक्त परीक्षण की आवश्यकता की बात कही है. केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने न तो कोविड-19 रोगियों के उपचार के लिए दवा की सिफारिश की है और न ही इसके उपयोग के खिलाफ कोई सलाह जारी की है.

लेकिन उत्तर प्रदेश में राज्य सरकार द्वारा संचालित अस्पतालों ने कोविड-19 के हल्के और मध्यम मामलों के इलाज के लिए दवा को अपने प्रोटोकॉल में शामिल कर लिया है. इसके अलावा रैपिड रिस्पांस टीम पर (डॉक्टरों की वे टीमें जो उन रोगियों का आकलन करती हैं जिनमें संक्रमण के लक्षण नहीं होते) घर में क्वारंटीन हुए लोगों और संक्रमित रोगियों के प्राथमिक और द्वितीयक संपर्कों को यह दवा वितरित करने का आरोप है.

जापान में कितासो इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं और अमेरिका स्थित दवा कंपनी मर्क एंड को ने 1970 के दशक में पहली बार आइवर मेक्टिन तैयार किया था. इसे पशु चिकित्सा में एक महत्वपूर्ण विकास माना गया था क्योंकि यह आंतरिक और बाहरी परजीवियों के खिलाफ और पशु स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में सक्षम था. बाद में दवा को मानव रोगों जैसे आंकोसर्कायसिस, लसीका फाइलेरिया और खुजली के उपचार में प्रभावी पाया गया. बार्सिलोना इंस्टीट्यूट ऑफ ग्लोबल हेल्थ के एक स्वास्थ्य शोधकर्ता डॉ. कारलोस चाकोर ने बताया, "कुछ देशों में इस दवा को सिर के जूं के खिलाफ शैम्पू के रूप में भी तैयार किया गया है. कुछ लैटिन अमेरिकी देशों में सिर की जूं के इलाज के लिए दवा की खुराक को मंजूरी दी गई है."

चाकोर ने एक दशक से अधिक समय तक इस दवा पर काम किया है और व्यापक स्तर पर कोविड-19 के इलाज में इसके उपयोग के खिलाफ चेतावनी दी है. उन्होंने पेरू जैसे लैटिन अमेरिकी देशों में आइवर मेक्टिन के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग का भी बारीकी से निरीक्षण किया है जहां मानव-उपयोगी आइवर मेक्टिन की आपूर्ति कम होने पर हजारों लोगों ने पशु चिकित्सा में उपयोगी आइवर मेक्टिन का उपयोग करना शुरू कर दिया. इसके चलते कइयों को पेट की बीमारियों, कंपकंपी, बदहवासी और दर्दनाक फफोले सहित कथित तौर पर प्रतिकूल प्रभावों का सामना करना पड़ा. द न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित एक हालिया लेख, "सीरियस इवेर्मेक्टिन टॉक्सिसिटी एंड ह्यूमन एबीसीबी1 नॉनसेंस म्यूटेशन" ने विश्लेषण किया कि कैसे मानव उपयोग के लिए तैयार आइवर मेक्टिन की एक ही खुराक के कारण असामान्य आनुवंशिक स्थिति वाला 13 साल का एक लड़का एन्सेफैलोपैथी का शिकार हो गया और कोमा में चला गया.

आइवर मेक्टिन पर उत्तर प्रदेश का ध्यान महामारी के शुरुआती दिनों में मलेरिया के उपचार के लिए अनुमोदित दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के लिए दिए गए अनुचित ध्यान की याद दिलाता है. राज्य सरकार ने आधिकारिक उपचार प्रोटोकॉल में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन को हटाकर उसकी जगह आइवर मेक्टिन को एक पूरक कोविड-19 दवा के रूप में अनुमोदित किया है. 9 अगस्त को स्वास्थ्य और चिकित्सा के लिए राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव अमित मोहन प्रसाद ने एक आदेश जारी किया जिसमें सभी जिलों में मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे कोविड-19 उपचार प्रोटोकॉल में आइवर मेक्टिन को शामिल करें. बदले में मुख्य चिकित्सा अधिकारियों ने सरकारी अस्पतालों में अपडेट प्रोटोकॉल प्रसारित किया और एंटीबायोटिक्स एजिथ्रोमाइसिन और डॉक्सीसाइक्लिन और एंटी इंफ्लेमेट्री दवा पेरासिटामोल के साथ-साथ आइवर मेक्टिन की सिफारिश की. प्रोटोकॉल ने रोगियों को प्रति दिन 12 मिलीग्राम की खुराक तक, अपने प्रतिकिलो वजन के लिए 200 माइक्रोग्राम आइवर मेक्टिन लेने की सलाह दी. इस हिसाब से 60 किलोग्राम वजन वाले वयस्क को प्रति दिन 12 मिलीग्राम आइवर मेक्टिन की एक खुराक लेनी चाहिए.

चाहत राणा कारवां में​ रिपोर्टिंग फेलो हैं.

Keywords: COVID-19 coronavirus Uttar Pradesh
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