विश्व स्वास्थ्य संगठन ने माना भारत को स्थानीय संक्रमण वाला देश लेकिन सरकार कर रही नजरअंदाज

21 मार्च 2020
संजीव वर्मा/हिंदुस्तान टाइम्स/गैटी इमेजिस
संजीव वर्मा/हिंदुस्तान टाइम्स/गैटी इमेजिस

बीते शुक्रवार यानी 13 मार्च को नोएडा की एक चमड़ा कंपनी के कर्मचारी को कोरोनावायरस से संक्रमित पाए जाने के बाद कंपनी के 707 कर्मचारियों को घर पर रहने का निर्देश दिया गया. 46 वर्षीय संक्रमित व्यक्ति हाल ही में इटली से लौटा था, जो चीन के बाद इस बीमारी से प्रभावित दूसरा सबसे बड़ा देश है. इटली में इस वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 17660 हो गई है. कोरोनावायरस से इटली में कुल 1266 लोगों की मौत हो चुकी है. यह संख्या कुल संक्रमित लोगों की संख्या का 7 प्रतिशत है.

चमड़ा कंपनी के सभी कर्मचारियों को घर पर रहने का निर्देश दिए जाने से पहले, वायरस के लक्षण वाले उस व्यक्ति ने वहां काम करना जारी रखा था. स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया है कि क्वारंटीन करने का मतलब व्यक्ति का संक्रमित होना नहीं होता. उसी दिन हुई एक प्रेस वार्ता में स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने बताया, “हम अलग-अथल किए गए लोगों से संपर्क बनाए हुए हैं और यदि उनमें संक्रमण के संकेत नजर आते हैं तो उन्हें बाकी लोगों से अलग रख कर विशेष चिकित्सा देख-भाल में रखा जाएगा.”

इस मामले की परिस्थितियों को देखने पर और संक्रमित व्यक्ति को अलग करने में हुई देरी के कारण, बाकी लोगों में कोविड-19 के संक्रमण की गंभीर संभावना बनी हुई है. शुक्रवार को हुई दो अलग-अलग प्रेस वार्ताओं में स्वास्थ्य मंत्रालय और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ने कोरोनावायरस के स्थानीय संक्रमण की संभावना को कम करके आंका.

गुरुवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा कोरोनावायरस पर जारी की गई नवीनतम स्थिति रिपोर्ट में भारत को उन देशों की सूची में रखा गया है जिनमें संक्रमण देश के ही लोगों से एक दूसरे में फैल रहा है. इस सूची में भारत के साथ इटली, कोरिया और चीन भी हैं. ये सभी देश घरेलू स्तर पर मानव से मानव में तेजी से फैल रहे संक्रमण के उच्च दबाव का सामना कर रहे हैं.

कोविड-19 महामारी से बचाव में भारत सरकार संक्रमण से निपटने के लिए इस धारण के तहत काम कर रही है कि डब्ल्यूएचओ ने इसे "विदेशों से आने वाले लोगों में ही होने की संभावना जताई है." मतलब इसका संक्रमण केवल विदेशों से आए यात्रियों तक ही सीमित है. सभी प्रयास केवल कुछ लोगों के वीजा रद्द करने, देश की सीमाओं को काफी हद तक सील कर देने और हाल ही में विदेश की यात्रा से लौटे कुछ लोगों और उनके साथ संपर्क रखने वाले व्यक्तियों के लिए वायरस के परीक्षण तक ही सीमित हैं. डब्ल्यूएचओ ने यह संकेत दिया है कि भारत एक दोषपूर्ण धारणा के तहत काम कर रहा है. सरकार द्वारा उठाए जाने वाले कदम महामारी से निपटने के लिए काफी नहीं हैं. परीक्षण की संख्याओं को कम रखकर भारत संक्रमण के संकट को कम आंकने की कोशिश कर रहा है.

एक निजी थिंक टैंक के साथ काम करने वाले स्वास्थ्य नीति विशेषज्ञ ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "मुझे डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट पर पूरा भरोसा है क्योंकि उनके पास स्पष्ट रूप से परिभाषित मापदंड हैं."

विद्या कृष्णन स्वास्थ्य मामलों की पत्रकार हैं और गोवा में रहती हैं. एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस और वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा पर उनकी पहली किताब 2020 में प्रकाशित होगी.

Keywords: COVID-19 World Health Organisation Indian Council of Medical Research
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