कोविड-19 का टीका लगने के बाद भी क्यों हो रहे स्वास्थ्यकर्मी संक्रमित?

28 मार्च 2021
स्वास्थ्य कार्यकर्ता को कोलकाता में कोविड-19 वैक्सीन का टीका लगते हुए.
रूपक डे चौधरी/रॉयटर्स
स्वास्थ्य कार्यकर्ता को कोलकाता में कोविड-19 वैक्सीन का टीका लगते हुए.
रूपक डे चौधरी/रॉयटर्स

14 मार्च को कोविड-19 वैक्सीन की दूसरी खुराक लेने के एक महीने बाद 55 वर्षीय राजिंदर वर्मा फिर से कोविड संक्र​मित हो गए. इससे दो दिन पहले वर्मा को बुखार, हल्की सर्दी और खांसी हुई थी. उन्होंने कहा, "मैं अब पहले जैसा युवा नहीं हूं इसलिए मैंने सोचा कि यह बस थकावट है और मौसम बदला है इसलिए ठंड लग गई है." लेकिन उनका तापमान बढ़कर 103 डिग्री हो गया और उनके शरीर में दर्द होने लगा. "ऐसा लग रहा था जैसे मेरे भीतर आग जल रही है," उन्होंने मुझे बताया.

वर्मा चंडीगढ़ के सरकारी मेडिकल कॉलेज में सुरक्षा गार्ड हैं. स्वास्थ्य सेवा संस्थान के कर्मचारी के बतौर उन्हें 16 जनवरी को पहला और 13 फरवरी को दूसरा बूस्टर टीका लगा था. "मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मैं संक्रमित हो जाउंगा," उन्होंने कहा. “टीके के बाद तो बिल्कुल भी नहीं. किसी ने भी यह नहीं बताया कि टीका लगने के बाद भी संक्रमित होना संभव है. ”

संक्रमित होने का पहला कारण यह है कि प्रतिरक्षा विकसित करने के लिए पहले शॉट के बाद लगभग 45 दिन लगते हैं. दूसरा यह कि प्रयोग होने वाले कोविड-19 के टीके गंभीर बीमारी को रोकते हैं लेकिन संक्रमण को नहीं. वैक्सीन की दो खुराक निर्धारित होने के बाद भी, देश भर में कई स्वास्थ्य कर्मचारियों और फ्रंटलाइन कार्यकर्ता दुबारा कोविड -19 से संक्रमित हुए हैं. प्रत्येक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को भारत में मौजूदा समय में उपलब्ध दो टीकों- कोविशिल्ड और कोवाक्सिन- में से कोई एक दिया गया है. सबसे अधिक कोविड​-19 संक्रमण वाले राज्य महाराष्ट्र में कम से कम आठ स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को टीकाकरण के बाद भी संक्रमण हुआ है. मध्य प्रदेश, गुजरात और पंजाब में टीकाकरण के बाद भी स्वास्थ्य कार्यकर्ता बीमारी से संक्रमित पाए गए.

अशोक विश्वविद्यालय के त्रिवेदी स्कूल ऑफ बायोसाइंसेज के निदेशक और वीरोलॉजिस्ट या वाइरसविज्ञानी डॉ. शाहिद जमील ने बताया, "पूर्ण प्रतिरक्षा, जो कि पर्याप्त रूप से लंबे समय तक चलने वाली इम्यून मेमोरी को प्रेरित करती है, वह बूस्टर या दूसरी खुराक के बाद लगभग 15 दिन का समय लेती है." स्वास्थ्य श्रमिकों को पहली के लगभग 28 दिनों बाद दूसरी खुराक दी गई थी. इसका मतलब यह था कि प्रत्येक स्वास्थ्यकर्मी में पहली खुराक के 45 दिन बाद ही स्थाई प्रतिरक्षा विकसित होने की संभावना थी.

मध्य प्रदेश के जबलपुर में नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के 35 वर्षीय डॉक्टर डॉ. मनीष महोबिया ने प्रतिरक्षा विकसित होने के इस अंतराल के बारे में कोई जवाब नहीं दिया. महोबिया को 15 मार्च की रात दुबारा संक्रमण हो गया था. वह खुद चकित थे क्योंकि उन्हें 29 जनवरी को वैक्सीन का पहला टीका और 26 फरवरी को दूसरा टीका लगा था. "मुझे कभी लगा ही नहीं कि मुझे कोविड-19 हो सकता है," उन्होंने कहा. "थोड़े समय तक तो मैं खुद ही दवाइयां लेता रहा और जब मेरा बुखार 103 डिग्री पार कर गया तब जाकर मैंने जांच कराई. मैंने पूरी महामारी के दौरान कोविड-19 ड्यूटी देते हुए अपने खुद के स्वास्थ्य के डर से सारी सावधानियां बरती, और अब जब मुझे लगा कि जीवन सामान्य होने को है, तो मैं संक्रमित हो गया. ”

चाहत राणा कारवां में​ रिपोर्टिंग फेलो हैं.

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