“आज सभी संस्थाएं मनमाने तरीके से चलाई जा रही हैं,” न्यायाधीश पीबी सावंत

सुप्रीम कोर्ट के अवकाश प्राप्त जज और 1995 से 2001 के बीच पीसीआई के अध्यक्ष रहे थे पीबी सावंत अपने आवास पर.
सुप्रीम कोर्ट के अवकाश प्राप्त जज और 1995 से 2001 के बीच पीसीआई के अध्यक्ष रहे थे पीबी सावंत अपने आवास पर.

11 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी को अंतरिम जमानत दी. दो साल पुराना यह मामला अर्नब द्वारा इंटीरियर डिजाइनर अन्वय नायक को आत्महत्या के लिए मजबूर करने से संबंधित है. नायक कॉनकॉर्ड डिजाइंस प्राइवेट लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक थे. अर्नब को जमानत देते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने टिप्पणी की, “हम स्वतंत्रता के ध्वंस के रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं.“ अर्नब गोस्वामी को जमानत मिलने की प्रक्रिया अन्य पत्रकारों के मामलों की तुलना में बहुत सहज थी जबकि सरकार की आलोचना करने वाले कई पत्रकार जेलों में कैद हैं और उन्हें जमानत और सुनवाई के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है.

हाल में पत्रकारों के ऊपर सरकारी दमन तीव्र हुआ है लेकिन प्रेस संगठनों द्वारा उनके पक्ष में बयान अक्सर देर से आए या आए ही नहीं. मीडिया पर निगरानी रखने वाली संस्था प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने सार्वजनिक रूप से अगस्त 2019 में सरकार के दावे का बचाव करते हुए सर्वोच्च न्यायालय के सामने कहा था कि केंद्र सरकार द्वारा कश्मीर में मीडिया की आजादी पर लगाया गया अंकुश राष्ट्र के हितों के अनुकूल है. इसके विपरीत जब गोस्वामी पर 22 अप्रैल को हमला हुआ, तब पीसीआई ने स्वतः संज्ञान लेते हुए महाराष्ट्र सरकार से इस मामले की रिपोर्ट मांगी. उसने यह तब किया जबकि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता.

आतिरा कोनिक्करा कारवां की रिपोर्टिंग फेलो हैं. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के अवकाश प्राप्त जज और 1995 से 2001 के बीच पीसीआई के अध्यक्ष रहे पीबी सावंत से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के नियमन की जरूरत पर बातचीत की. इसके अलावा उन्होंने 2018 में सावंत द्वारा टाइम्स नाउ पर किए गए उस मानहानि के मामले पर भी बात की जब गोस्वामी चैनल के मुखिया थे.

आतिरा कोनिक्करा : प्रेस काउंसिल का न्यूजपेपर और न्यूज एजेंसियों पर न्यायाधिकार है, लेकिन इस साल अप्रैल में भारतीय प्रेस परिषद में अर्नब गोस्वामी पर शारीरिक हमले पर स्वतः संज्ञान लिया था, क्या यह इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े मामलों पर उसका हस्तक्षेप नहीं माना जाएगा?

पीबी सावंत : यह मामलों पर निर्भर करता है. ऐसा नहीं कहा जा सकता कि प्रेस काउंसिल को ऐसे मामलों पर हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए. जब पत्रकारों पर हमला होता है, या लिखने के लिए उन पर आक्रमण होता है तो प्रेस काउंसिल हस्तक्षेप कर सकता है लेकिन उसके पास कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है.

आतिरा कोनिक्करा करवां की रिपोर्टिंग फेलो हैं.

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