हरेन पांड्या हत्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद "गुजरात फाइल्स" टेप की जांच की अपील

13 जुलाई 2019
'गुजरात फाइल्स' किताब की लॉन्चिग के दौरान लेखक राणा अय्यूब.
शाहिद तांत्रे/कारवां
'गुजरात फाइल्स' किताब की लॉन्चिग के दौरान लेखक राणा अय्यूब.
शाहिद तांत्रे/कारवां

5 जुलाई को, न्यायाधीश अरुण मिश्रा के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट की एक खंडपीठ ने गुजरात उच्च न्यायालय के 2011 के एक फैसले को पलट दिया. उच्च न्यायालय ने 2003 में गुजरात के पूर्व गृह मंत्री हरेन पांड्या की हत्या के 12 आरोपियों को बरी कर दिया था. बरी करते हुए, अदालत ने इस मामले की केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो द्वारा की गयी जांच की निंदा भी की थी- एजेंसी ने पांड्या की हत्या का संबंध गुजरात के विश्व हिंदू परिषद के एक नेता की हत्या से जोड़ा था, और कहा था कि ये हत्याएं एक अंतरराष्ट्रीय साजिश का नतीजा थीं जिसे कथित रूप से हिंदुओं के बीच आतंक फैलाने के लिए एक मुस्लिम धर्मगुरु के नेतृत्व में किया गया था.

उच्च न्यायालय ने कहा था कि, "मौजूदा मामले के रिकॉर्डों से यह साफ पता चलता है कि श्री हरेन पांड्या की हत्या के मामले की जांच को कदम-कदम पर कमजोर किया गया, आंखों पर पट्टी बांध ली गयी और कई सवालों को अनुत्तरित छोड़ दिया गया. संबंधित जांच अधिकारियों को उनकी अक्षमता और अयोग्यता के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए, जिसका नतीजा अन्याय तथा कई संबंधित व्यक्तियों की भारी प्रताड़ना और सार्वजनिक संसाधनों और न्यायालयों के सार्वजनिक समय की बहुत बड़ी बर्बादी के तौर पर निकला है." लेकिन शीर्ष अदालत ने इन टिप्पणियों को खारिज कर दिया. इसने सीबीआई के दावों से प्रभावी रूप से सहमत होते हुए 12 आरोपियों की सजा बहाल कर दी.

न्यायालय ने एक गैर-लाभकारी संस्था ‘सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन’ द्वारा दायर एक जनहित याचिका को भी खारिज कर दिया, जिसमें नए सबूतों के आलोक में पांड्या की हत्या की दोबारा जांच की मांग की गई थी. यह नई जानकारी हाल की एक गवाही थी जिसने पांड्या की हत्या को गैंगस्टर सोहराबुद्दीन शेख से जोड़ा था, जिसे बाद में गुजरात पुलिस ने कथित रूप से मुठभेड़ में मार गिराया था. शेख के एक सहयोगी और मामले में प्रमुख गवाह आजम खान ने 2018 के अंत में मुंबई की अदालत को बताया "सोहराबुद्दीन के साथ चर्चा के दौरान, उसने मुझे बताया कि उसे ...गुजरात के हरेन पांड्या को मारने का ठेका मिला है." सोहराबुद्दीन ने उससे कहा कि "वंजारा ने उसे यह ठेका दिया था." वंजारा, राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के दौरान गुजरात पुलिस के पूर्व उप महानिरीक्षक, महानिदेशक थे. गुजरात के पूर्व गृह राज्य मंत्री अमित शाह, जो अब केंद्रीय गृह मंत्री हैं, सोहराबुद्दीन मामले में मुख्य आरोपी थे.

शेख ने मुझे बताया था कि "उन्हें किसी भी मुस्लिम व्यक्ति पर दोष लगाना था ...इसलिए उन्होंने असगर अली को फंसा लिया है".

न्यायाधीशों ने सीपीआईएल द्वारा सूचीबद्ध सबूतों को खारिज कर दिया, जिसमें आउटलुक पत्रिका जैसे समाचार संगठनों की पत्रकारीय रिपोर्टें और मेरी 2016 की पुस्तक, “गुजरात फाइल: एनाटॉमी ऑफ ए कवर अप” शामिल थी. पुस्तक में सीबीआई द्वारा पांड्या की मौत की जांच किए जाने से पहले प्राथमिक जांच करने वाले पुलिस अधिकारी वाईए शेख के साथ मेरी बातचीत का प्रतिलेख था. मैंने चुपके से इस बातचीत को टेप कर लिया था. मामले का उल्लेख करते हुए, शेख ने कहा था, “एक बार सच्चाई सामने आने के बाद मोदी घर चले जाएंगे, उन्हें जेल हो जाएगी.” उन्होंने दावा किया था कि पांड्या की हत्या के मुख्य आरोपी असगर अली को हिरासत में प्रताड़ित कर गलत बयान देने के लिए मजबूर किया गया था. शेख ने मुझे बताया था कि "उन्हें किसी भी मुस्लिम व्यक्ति पर दोष लगाना था ...इसलिए उन्होंने असगर अली को फंसा लिया है."

राणा अय्यूब तहलका के साथ काम करने बाद एनडीटीवी और आउटलुक पत्रिका की स्वतंत्र स्तंभकार हैं.

Keywords: Haren Pandya Murder Sohrabuddin Tulsiram Prajapati Supreme Court of India Amit Shah Narendra Modi Arun Mishra
कमेंट