पुणे पुलिस ने की भीमा कोरेगांव मामले के आरोपियों के खिलाफ पेश सबूतों से छेड़छाड़?

दस्तावेजों और फॉरेंसिक सामग्री की कॉपियों की बारीक जांच से तकनीकी गड़बड़ियों और प्रक्रिया के स्पष्ट उल्लंघन का पता चलता है.
दस्तावेजों और फॉरेंसिक सामग्री की कॉपियों की बारीक जांच से तकनीकी गड़बड़ियों और प्रक्रिया के स्पष्ट उल्लंघन का पता चलता है.

भीमा कोरेगांव मामले में मानव अधिकार कार्यकर्ताओं के खिलाफ जिन डिजिटल सबूतों को पुणे पुलिस ने अदालत के सामने पेश किया है उनमें तकनीकी गड़बड़ियों और प्रक्रिया के स्पष्ट उल्लंघन का पता चलता है. पिछले साल पुणे पुलिस ने दावा किया था कि उसने मानव अधिकार अधिवक्ता सुरेंद्र गाडलिंग और बंदी अधिकार कार्यकर्ता रोना विल्सन के कंप्यूटरों की हार्ड ड्राइवों से इन लोगों के खिलाफ आरोप सिद्ध करने वाले कई पत्र बरामद किए हैं. इन दस्तावेजों की बारीकी से जांच करने पर पुलिस की जांच में अनियमितताओं के गंभीर सवाल खड़े होते हैं.

इन पत्रों के आधार पर पुणे पुलिस ने दावा किया है कि आरोपी “सरकार का तख्तापलट” करने और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की हत्या के माओवादी षड्यंत्र का हिस्सा थे. इन पत्रों का इस्तेमाल छत्तीसगढ़ की वकील सुधा भारद्वाज, नागपुर विश्वविद्यालय में अंग्रेजी की प्रोफेसर शोमा सेन, सुधीर धावले, कवि वरवरा राव, कार्टूनिस्ट अरुण फरेरा और महेश रावत और वेरनॉन गोंजाल्विस जैसे कार्यकर्ताओं को फंसाने के लिए किया गया. ये सभी नौ लोग इस वक्त हिरास्त में हैं.

कारवां ने पुणे पुलिस द्वारा अदालत और आरोपी व्यक्तियों को दिए उन दस्तावेजों और फॉरेंसिक सामग्री की कॉपियों की बारीकी से जांच की जो पुलिस को गाडलिंग के कंप्यूटर से मिले थे. दस्तावेजों, फंसाने वाली फाइलों के मेटाडाटा, पुणे पुलिस का आरोपपत्र और पुणे की रीजनल फॉरेंसिक साइंस लैबोरेट्री की रिपोर्ट के अध्ययन से ऐसे कई संकेत मिलते हैं जो बताते हैं कि पुलिस ने इन दस्तावेजों को कब्जे में लेने के बाद इन पर डिवाइस का इस्तेमाल किया है या इन फाइलों को एडिट किया है. सूचना प्रौद्योगिकी कानून, 2000 में उस प्रक्रिया का उल्लेख है जिसका पालन डिजिटल सबूतों की छानबीन के वक्त पुलिस को करना होगा. जान पड़ता है पुलिस ने उस प्रक्रिया का उल्लंघन किया है.

नीचे ऐसी ही छह अनियमितताओं और प्रक्रियागत उल्लंघनों को वर्णन है :

फाइलों का पुलिस कस्टडी के दौरान संपादन किया जाना

मार्तण्ड कौशिक कारवां के सीनियर सहायक संपादक हैं.

आंजनेया शिवन कारवां में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं.

Keywords: Bhima Koregaon Pune Police
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